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लखनऊ: उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UPSSSC) की स्नातक स्तरीय मुख्य परीक्षा के दौरान नकल कराने वाले एक और हाईटेक और हाई-प्रोफाइल नेटवर्क का भंडाफोड़ हुआ है। रविवार को स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने राजधानी लखनऊ के एक परीक्षा केंद्र पर छापेमारी कर ब्लूटूथ डिवाइस की मदद से नकल कर रहे एक अभ्यर्थी को रंगे हाथों धर दबोचा। शुरुआती पूछताछ में खुलासा हुआ है कि इस पूरी परीक्षा को पास कराने और नकल की मदद देने के लिए अभ्यर्थी से 10 लाख रुपये का भारी-भरकम सौदा तय हुआ था।
महानगर के परीक्षा केंद्र से दबोचा गया प्रयागराज का आरोपी
STF से मिली आधिकारिक जानकारी के अनुसार, गिरफ्तार किए गए अभ्यर्थी की पहचान प्रयागराज निवासी बृजेश कुमार यादव के रूप में हुई है। एसटीएफ के अपर पुलिस अधीक्षक दीपक कुमार ने बताया कि आयोग की परीक्षा को पूरी तरह पारदर्शी और नकलविहीन कराने के लिए टीमों को अलर्ट पर रखा गया था। इसी दौरान सूचना मिली कि महानगर क्षेत्र स्थित ‘दयानंद कन्या इंटर कॉलेज’ केंद्र पर एक अभ्यर्थी तकनीकी उपकरणों की मदद से सेंधमारी करने वाला है। एसटीएफ और स्थानीय पुलिस की टीम ने तुरंत केंद्र पर पहुंचकर संदिग्ध अभ्यर्थी की तलाशी ली, जहां से इलेक्ट्रॉनिक्स का जखीरा बरामद हुआ।
विशेष बनियान की जेब में छिपाया था ब्लूटूथ, बाहर से मिलने थे जवाब
पुलिस पूछताछ में आरोपी बृजेश ने जो खुलासे किए, उसने जांच अधिकारियों को भी हैरान कर दिया। अभ्यर्थी ने बताया कि प्रयागराज के ही एक नेटवर्क सरगना ने उसे एक खास तौर पर तैयार की गई स्पेशल बनियान दी थी, जिसकी गुप्त जेबों में अत्याधुनिक ब्लूटूथ डिवाइस और संचार उपकरण छिपाए गए थे। योजना के मुताबिक, परीक्षा हॉल में बैठते ही बाहर मौजूद सॉल्वर गैंग के सदस्य ब्लूटूथ के जरिए उसे प्रश्नों के सही उत्तर बोलकर लिखवाने वाले थे।
बरामद हुआ सामान और दर्ज हुआ मुकदमा
एसटीएफ की टीम ने मौके से अभ्यर्थी के पास से अत्याधुनिक ब्लूटूथ डिवाइस, मोबाइल फोन, प्रवेश पत्र, आधार कार्ड, ओएमआर शीट (OMR Sheet) और प्रश्नपत्र जब्त कर लिया है। आरोपी बृजेश यादव के खिलाफ लखनऊ के महानगर थाने में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की प्रासंगिक धाराओं और उत्तर प्रदेश सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम-2024 के तहत कठोर धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की गई है।
फिलहाल पुलिस और एसटीएफ की संयुक्त टीम इस गिरोह के तार खंगालने में जुटी है। आशंका जताई जा रही है कि 10 लाख रुपये में परीक्षा पास कराने का दावा करने वाला यह गिरोह अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में भी सक्रिय हो सकता है, जिसके मुख्य सरगना की तलाश में ताबड़तोड़ दबिश दी जा रही है।












