
भाई-बहन के अटूट प्रेम का प्रतीक रक्षाबंधन का पावन पर्व इस साल 28 अगस्त 2026, शुक्रवार को देशभर में धूमधाम से मनाया जाएगा। इस दिन बहनें अपने भाई की लंबी उम्र और समृद्धि की कामना करते हुए उनकी कलाई पर रक्षासूत्र बांधती हैं, वहीं भाई उनकी रक्षा का वचन देते हैं। हालांकि, इस बार रक्षाबंधन के समय पंचक का प्रभाव रहने के कारण लोगों के मन में संशय है कि क्या पंचक काल में राखी बांधना शुभ होगा या नहीं।
क्या पंचक के दौरान भाई को राखी बांधी जा सकती है?
ज्योतिषशास्त्र के विद्वानों के अनुसार, पंचक काल के दौरान भाई की कलाई पर राखी बांधना पूरी तरह से शास्त्रसम्मत और शुभ है। पंचक को भले ही सामान्य तौर पर शुभ कार्यों के लिए विचारणीय माना जाता है, लेकिन रक्षाबंधन जैसे अत्यंत पवित्र, मांगलिक और पारिवारिक पर्वों पर इसका कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ता है। इसलिए बहनें बिना किसी भय के पंचक काल में अपने भाइयों को राखी बांध सकती हैं।
क्या होता है अग्नि पंचक और क्यों मानी जाती है इसमें सावधानी?
जब पंचक की शुरुआत मंगलवार या गुरुवार से होती है, तो उसे ज्योतिष में ‘अग्नि पंचक’ कहा जाता है। अग्नि पंचक के दौरान नया निर्माण कार्य शुरू करने, नए औजार या भारी मशीनरी खरीदने से बचने की सलाह दी जाती है, क्योंकि इस अवधि में दुर्घटना या नुकसान की आशंका बनी रहती है। हालांकि, कोर्ट-कचहरी के लंबित मामलों को सुलझाने या किसी पुराने विवाद के निपटारे के लिए यह समय अनुकूल माना गया है।
पंचक काल में भूलकर भी न करें ये 5 कार्य
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दक्षिण दिशा की यात्रा: दक्षिण दिशा को यमराज का द्वार माना गया है, इसलिए पंचक के दौरान इस दिशा में यात्रा करने से परहेज करना चाहिए।
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लकड़ी व घास एकत्र करना: धनिष्ठा नक्षत्र के प्रभाव के कारण लकड़ी, सूखी घास या ज्वलनशील वस्तुएं जमा करने से अग्नि का भय रहता है।
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चारपाई या पलंग बनवाना: इस दौरान नया पलंग या चारपाई बनवाने से परिवार पर मानसिक व शारीरिक कष्ट आने की मान्यता है।
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घर की छत या लेंटर ढलवाना: पंचक में घर की छत बनवाने से गृह क्लेश और आर्थिक हानि का सामना करना पड़ सकता है।
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बिना विधान अंतिम संस्कार: पंचक में किसी के निधन पर दाह-संस्कार से पूर्व पुतला रखकर शांति पूजन कराने का विधान है, ताकि परिवार पर संकट न आए।
पंचक में किन चीजों की खरीदारी पर रहती है रोक?
ज्योतिषीय नियमों के अनुसार, पंचक के पांच दिनों की अवधि में लकड़ी का सामान, लोहे की वस्तुएं, नया पलंग या चारपाई और नए वस्त्र खरीदने की मनाही होती है। मान्यता है कि इस दौरान इन वस्तुओं की खरीदारी करने से धन हानि और घर में अशांति फैल सकती है।
ज्योतिष शास्त्र में क्यों अशुभ गिना जाता है पंचक?
धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद और रेवती—इन पांच नक्षत्रों के विशेष संयोग को पंचक कहा जाता है। इस अवधि में चंद्रमा कुंभ और मीन राशि में गोचर करता है। ज्योतिष के अनुसार, पंचक के दौरान किए गए किसी भी कार्य का फल पांच गुना बढ़ जाता है या उस कार्य की बार-बार पुनरावृत्ति होती है। इसी वजह से इस दौरान बड़े मांगलिक कार्य जैसे विवाह, मुंडन और गृह प्रवेश वर्जित माने जाते हैं।














