प्रतापगढ़ में किसान सम्मान निधि में 60 करोड़ का महाघोटाला: तहसील कुंडा की ID से 3 लाख फर्जी रजिस्ट्रेशन, इतने करोड़ की चपत की आशंका

उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना (PM Kisan Samman Nidhi) में अब तक का सबसे बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। कुंडा तहसील की आधिकारिक लॉगिन/आईडी का दुरुपयोग कर गिरोह ने संगठित तरीके से अपात्रों, नाबालिगों और राज्य से बाहर के लाखों लोगों का फर्जी पंजीकरण कराकर करोड़ों रुपये डकार लिए।

इस सिलसिले में 26 अगस्त 2026 को उप कृषि निदेशक की तहरीर पर साइबर क्राइम थाना प्रतापगढ़ में गंभीर धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज (FIR) कर ली गई है।

3 लाख संदिग्ध लाभार्थी, 60 करोड़ से ज्यादा के गबन की प्राथमिक पुष्टि

पुलिस में दर्ज शिकायत के अनुसार, जालसाजों ने शासकीय पोर्टल के सुरक्षा तंत्र में सेंध लगाकर बड़े पैमाने पर फर्जी एंट्रीज कीं। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि लगभग 3 लाख अपात्र लोगों ने धोखे से इस योजना की किश्तें हासिल की हैं।

शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक, इस सिंडिकेट ने सरकार को करीब 60 करोड़ रुपये से अधिक की सीधी चपत लगाई है। हालांकि, जांच का दायरा बढ़ने पर यह फर्जीवाड़ा और भी बड़ा होने की आशंका जताई जा रही है।

नाबालिगों और दूसरे राज्यों के लोगों के नाम पर जारी हुई सम्मान निधि

तहरीर में लगाए गए आरोपों के मुताबिक, फर्जीवाड़े को अंजाम देने के लिए तहसील कुंडा के आधिकारिक सिस्टम और क्रेडेंशियल्स का दुरुपयोग किया गया।

अपराधियों ने बिना किसी भौतिक सत्यापन (Physical Verification) के नाबालिगों, जिले व उत्तर प्रदेश राज्य से बाहर के निवासियों और योजना के लिए पूरी तरह से अपात्र व्यक्तियों के नाम पर हजारों संदिग्ध आईडी बना दीं। इसके बाद योजना की सरकारी धनराशि का भुगतान सीधे इन फर्जी खातों में कराया जाता रहा।

SP प्रतापगढ़ का बयान: साइबर सेल की जांच तेज, सिंडिकेट के नेटवर्क की तलाश

मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद हो गया है। प्रतापगढ़ के पुलिस अधीक्षक (SP) श्री दीपक भूकर ने बताया कि उप कृषि निदेशक की शिकायत पर सुसंगत धाराओं में आपराधिक मामला दर्ज कर विवेचना शुरू कर दी गई है।

एसपी ने स्पष्ट किया कि मामले की गहनता से जांच के लिए साइबर विशेषज्ञों की टीम लगाई गई है। डिजिटल साक्ष्यों और बैंक खातों के विवरण के आधार पर कड़े विधिक कदम उठाए जाएंगे। इस अंतरप्रांतीय सिंडिकेट से जुड़े सरकारी कर्मचारियों, जनसेवा केंद्र संचालकों और मुख्य साजिशकर्ताओं की धरपकड़ के लिए पुलिस टीम लगातार छापेमारी कर रही है।

 

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