चंडीगढ़। पंजाब में भारतीय जनता पार्टी (BJP) और शिरोमणि अकाली दल (SAD) के बीच संभावित गठबंधन को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हैं। 2024 लोकसभा चुनाव के विधानसभा-वार वोट आंकड़ों के आधार पर किए गए एक गणितीय विश्लेषण से संकेत मिलता है कि अगर दोनों दल साथ चुनाव लड़ते हैं तो कई सीटों पर उनका संयुक्त वोट कांग्रेस या आम आदमी पार्टी (AAP) से अधिक हो सकता है। हालांकि, यह सिर्फ पिछले चुनाव के आंकड़ों पर आधारित आकलन है और इसे 2027 विधानसभा चुनाव का सीधा संकेत नहीं माना जा सकता।
2024 में भाजपा ने 23 विधानसभा क्षेत्रों में सबसे ज्यादा वोट हासिल किए थे, जबकि अकाली दल 9 सीटों पर आगे रहा था। यानी दोनों दल अलग-अलग चुनाव लड़ने के बावजूद कुल 32 विधानसभा क्षेत्रों में अपनी बढ़त बनाने में सफल रहे। यदि दोनों दलों के वोट को एक साथ देखा जाए तो कुछ अन्य सीटों पर भी मुकाबले का समीकरण बदलता नजर आता है।
इस संभावित गठबंधन की सबसे बड़ी ताकत दोनों दलों का अलग-अलग सामाजिक और भौगोलिक आधार माना जाता है। भाजपा का प्रभाव मुख्य रूप से शहरी और व्यापारी वर्ग में है, जबकि अकाली दल की पकड़ ग्रामीण पंजाब, खासकर मालवा और पंथक इलाकों में रही है। ऐसे में दोनों का वोट आधार एक-दूसरे का समर्थन करता है तो कई सीटों पर मुकाबला बेहद करीबी हो सकता है।
2024 के आंकड़ों में खरड़ में भाजपा और अकाली दल को मिलाकर 58,045 वोट मिले थे, जो कांग्रेस के 46,622 वोट से अधिक थे। मानसा में दोनों दलों के संयुक्त वोट 57,918 रहे, जबकि AAP को 48,008 वोट मिले। इसी तरह समाना में भाजपा-अकाली के 44,258 संयुक्त वोट AAP के 36,141 वोट से ज्यादा थे।
पटियाला ग्रामीण, मौर, अमृतसर पश्चिम और फगवाड़ा जैसे क्षेत्रों में भी दोनों दलों के वोट जोड़ने पर कांग्रेस या AAP के मुकाबले बढ़त दिखाई देती है। अटारी, नाभा और साहनेवाल में भी यही स्थिति रही। वहीं श्री आनंदपुर साहिब के बलाचौर में संयुक्त वोट कांग्रेस से अधिक रहे।
कुछ सीटों पर मुकाबला बेहद करीबी भी रहा। दीनानगर में भाजपा और अकाली दल के संयुक्त वोट 45,919 थे, जबकि कांग्रेस को 45,319 वोट मिले। यानी दोनों के बीच अंतर सिर्फ 600 वोट का रहा। मालवा के बठिंडा शहर, लंबी, भुच्चो मंडी, बठिंडा ग्रामीण और बुढलाडा जैसे क्षेत्रों में भी दोनों दलों के वोटों का गणित गठबंधन की स्थिति में महत्वपूर्ण हो सकता है।
हालांकि, सिर्फ वोट जोड़ देने से यह तय नहीं होता कि 2027 में गठबंधन को वही समर्थन मिलेगा। चुनाव में उम्मीदवार की लोकप्रियता, स्थानीय समीकरण, किसान और पंथक मुद्दे, बेरोजगारी, विकास और सत्ता विरोधी लहर जैसे कई कारक असर डालेंगे। साथ ही भाजपा और अकाली दल के मतदाता हर सीट पर एक-दूसरे के उम्मीदवार को कितना समर्थन देते हैं, यह भी अहम होगा।
इसलिए फिलहाल 2024 के आंकड़े इतना जरूर बताते हैं कि BJP-SAD गठबंधन होने पर पंजाब की कई सीटों पर चुनावी मुकाबला बदल सकता है, लेकिन 2027 का वास्तविक परिणाम अभी कई राजनीतिक परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।











