
नेपाल में आई भीषण बाढ़ और भूस्खलन के पांच दिन बीत जाने के बाद भी हालात गंभीर बने हुए हैं। तबाही का दायरा इतना बड़ा है कि मौतों का आंकड़ा बढ़कर 788 तक पहुंच गया है, जबकि 2,500 से अधिक लोग अब भी लापता हैं। कई इलाकों में नदियों का जलस्तर दोबारा बढ़ने से राहत और बचाव कार्यों में भारी बाधा आ रही है। पहचान न हो पाने के कारण कई शवों के जरूरी डीएनए साक्ष्य सुरक्षित रखकर उनका सामूहिक रूप से अंतिम संस्कार किया जा रहा है।
गोरखा को हाईवे से जोड़ने वाला 130 मीटर लंबा पुल बहा, 400 परिवारों का संपर्क टूटा
मध्य नेपाल में त्रिशूली नदी के अचानक उफान पर आने से घ्यालचोक-चारौदी पुल बह गया। करीब 130 मीटर लंबा यह पुल गोरखा जिले के घ्यालचोक इलाके को सीधे पृथ्वी हाईवे से जोड़ता था। इसके ध्वस्त होने से लगभग 400 परिवारों का मुख्य संपर्क मार्ग कट गया है। इस रास्ते से रोजाना दूध और सब्जियां बाजार तक पहुंचाने वाले स्थानीय किसानों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। इससे पहले 26 अगस्त की बाढ़ में धवादिघाट का पुल भी बह चुका था, जिससे यह वैकल्पिक रास्ता भी पूरी तरह बंद हो चुका है।
हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स की सुरंगों में जिंदगी की तलाश: भारतीय टीम 3 किमी भीतर पहुंची
सबसे चुनौतीपूर्ण रेस्क्यू ऑपरेशन हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स की सुरंगों में चलाया जा रहा है। रसुवा के ‘अपर त्रिशूली-1’ प्रोजेक्ट की टनल में फंसे लोगों को निकालने के लिए नेपाली सेना के साथ भारत, चीन और दक्षिण कोरिया के विशेषज्ञ दिन-रात जुटे हुए हैं। भारतीय एक्सपर्ट्स ने सुरंग के 3 किलोमीटर भीतर तक जाकर सघन खोजबीन की और दो दिनों के भीतर 250 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला। वहीं, नुवाकोट के ‘अपर त्रिशूली-3 ए’ प्रोजेक्ट में फंसे मजदूरों तक पहुंचने के लिए सेना कंट्रोल्ड ब्लास्टिंग और भारी मशीनों की मदद से रास्ता चौड़ा कर रही है।
9,435 लोगों को सुरक्षित निकाला गया, भारत ने भेजी 68.5 टन राहत सामग्री
नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह के अनुसार, अब तक 9,435 लोगों को सुरक्षित ठिकानों पर पहुंचाया जा चुका है, जिसके लिए 394 हवाई उड़ानें संचालित की गईं। जमीन पर सेना और पुलिस के 20,618 जवान तैनात हैं। भारत की ओर से राहत सामग्री की चौथी खेप (C-130 विमान द्वारा 11 टन) भेजी गई है, जिससे भारत की कुल सहायता 68.5 टन तक पहुंच चुकी है। इसमें दवाओं, जनरेटर और खाद्यान्न के साथ-साथ सुरंग बचाव के आधुनिक उपकरण, बेली ब्रिज का सामान और डीएनए जांच किट शामिल हैं। रसुवा और नुवाकोट में बने 26 राहत शिविरों में हजारों लोगों को शरण दी गई है।














