भारत और अमेरिका के बीच रक्षा संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाने वाला एक बड़ा समझौता हुआ है। भारत ने अमेरिका से अत्याधुनिक एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल FGM-148 ‘जैवलिन’ (Javelin) खरीदने के लिए ‘प्रस्ताव और स्वीकृति पत्र’ (LOA) पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। इस डील के तहत भारत न सिर्फ यह खतरनाक मिसाइल प्रणाली खरीदेगा, बल्कि अब इसका निर्माण भी देश के भीतर ही होगा। इसके लिए अमेरिकी जैवलिन जॉइंट वेंचर (JJV) ने भारत की ‘टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड’ (TASL) को अपना मुख्य भागीदार चुना है।
भारत में बनेगी जैवलिन मिसाइल, टाटा संभालेगी कमान
अमेरिकी दूतावास की प्रवक्ता डाना जिए ने इस ऐतिहासिक समझौते की पुष्टि की है। इस करार के साथ ही भारत जैवलिन मिसाइल प्रणाली का आधिकारिक ग्राहक बन गया है। अब टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स और जेजेवी (जो लॉकहीड मार्टिन और रेथियॉन का संयुक्त उपक्रम है) भारत में जैवलिन के लिए एक ‘फाइनल असेंबली एंड इंटीग्रेशन’ (FAI) सुविधा स्थापित करने की संभावनाओं पर काम करेंगे। इससे भारत में ही इस मिसाइल का बड़े पैमाने पर असेंबलिंग और निर्माण संभव हो सकेगा।
‘फायर एंड फॉरगेट’ तकनीक से लैस है यह घातक हथियार
जैवलिन एक विश्व प्रसिद्ध, मध्यम दूरी की ‘फायर-एंड-फॉरगेट’ एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि एक बार लक्ष्य साधकर इसे दागने के बाद सैनिक तुरंत अपनी जगह बदल सकता है, क्योंकि मिसाइल खुद ब खुद दुश्मन के टैंक या बख्तरबंद गाड़ी का पीछा करके उसे नष्ट कर देती है। यह मिसाइल सीधे हमले के साथ-साथ ‘टॉप अटैक’ मोड में भी काम करती है, यानी यह टैंक के सबसे कमजोर ऊपरी हिस्से पर हमला कर उसे पूरी तरह तबाह कर देती है।
‘मेक इन इंडिया’ और रक्षा क्षेत्र को मिलेगा बड़ा बढ़ावा
इस समझौते से भारत के रक्षा औद्योगिक आधार (Defense Industrial Base) को अभूतपूर्व मजबूती मिलेगी। टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स के मुख्य कार्यकारी अधिकारी और प्रबंध निदेशक सुकरन सिंह ने इसे आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक अहम कदम बताया। इस प्रोजेक्ट से देश में हाई-टेक नौकरियां पैदा होंगी, घरेलू सप्लाई चेन मजबूत होगी और भारतीय सशस्त्र बलों को युद्ध के लिए तुरंत तैयार क्षमताएं हासिल होंगी। इसके साथ ही इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सामरिक संतुलन बनाए रखने में भी मदद मिलेगी।
इंडो-पैसिफिक में बढ़ेगी क्षेत्रीय स्थिरता
जैवलिन जॉइंट वेंचर के वाइस प्रेसिडेंट और प्रोग्राम डायरेक्टर रिच लिसियन के अनुसार, टाटा के साथ यह साझेदारी भारत और अमेरिका के बीच गहरे सामरिक सहयोग को दर्शाती है। यह पहल न केवल भारत की हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग क्षमताओं को बढ़ाएगी, बल्कि इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सुरक्षा ढांचे को मजबूत करेगी, जिससे दोनों देश और उनके सहयोगी साझेदार उभरती सुरक्षा चुनौतियों का तेजी से जवाब देने में सक्षम होंगे।















