स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तेल टैंकर पर मिसाइल हमला: ओमान के पास 3 प्रोजेक्टाइल से निशाना, क्रूड ऑयल और LPG की कीमतें बढ़ने की आशंका

दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण और संवेदनशील समुद्री तेल मार्ग ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ (Strait of Hormuz) में एक बार फिर युद्ध जैसे हालात और तनाव का माहौल बन गया है। इस रणनीतिक जलमार्ग से गुजर रहे एक अंतरराष्ट्रीय तेल टैंकर पर तीन अज्ञात प्रोजेक्टाइल (मिसाइल या ड्रोन) से अचानक हमला कर दिया गया। घटना के बाद पूरे मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) और वैश्विक ऊर्जा क्षेत्र में सुरक्षा को लेकर भारी चिंता फैल गई है। जानकारों की मानें तो यदि इस जलमार्ग से जहाजों की आवाजाही बाधित होती है, तो आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) और एलपीजी (LPG) के दामों में भीषण उछाल आ सकता है।

ओमान के तट से 31 किमी दूर हुआ हमला, टला बड़ा हादसा

ब्रिटेन की नौसैनिक निगरानी एजेंसी यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस (UKMTO) के अनुसार, यह घटना उस समय हुई जब टैंकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से बाहर निकल रहा था। हमला ओमान के खसाब शहर से लगभग 17 समुद्री मील (करीब 31 किलोमीटर) पूर्व में हुआ। राहत की बात यह है कि इस अचानक हुए हमले के बावजूद टैंकर के क्रू में से कोई घायल नहीं हुआ है और न ही समुद्र में तेल रिसाव (Oil Spill) की कोई खबर है। UKMTO स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है।

दुनिया की 20% तेल आपूर्ति पर संकट, क्यों महत्वपूर्ण है होर्मुज?

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण और व्यस्ततम तेल परिवहन मार्गों में से एक है। सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), कुवैत, इराक और ईरान जैसे प्रमुख खाड़ी देशों से निर्यात होने वाला कच्चा तेल और तरल प्राकृतिक गैस (LNG/LPG) इसी संकरे समुद्री रास्ते से होकर दुनिया भर के बाजारों तक पहुंचता है। दुनिया की कुल कच्चा तेल आपूर्ति का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा इसी मार्ग से गुजरता है। ऐसे में यहां किसी भी हमले का सीधा असर वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (Global Supply Chain) और पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर पड़ना तय है।

अमेरिका-ईरान जंग के मुहाने पर क्षेत्र, किसने किया हमला?

यह हमला ऐसे समय में हुआ है जब मध्य पूर्व में अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य तनाव अपने चरम पर पहुंच चुका है। अमेरिका द्वारा हाल ही में ईरान के सामरिक लारक द्वीप (Larak Island) पर स्थित मिसाइल लॉन्चरों को निशाना बनाए जाने के बाद पूरे इलाके में सैन्य हलचल तेज हो गई है। हालांकि, इस टैंकर पर हुए हमले की जिम्मेदारी फिलहाल किसी समूह या देश ने नहीं ली है, लेकिन जांच एजेंसियां इस घटनाक्रम को जारी क्षेत्रीय संघर्ष से जोड़कर देख रही हैं।

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