कौशांबी के मनौरी में हुए भीषण अवैध पटाखा फैक्ट्री विस्फोट का दर्दनाक असर प्रयागराज के स्वरूप रानी नेहरू (SRN) अस्पताल की इमरजेंसी में देखने को मिला। सोमवार को अस्पताल में अचानक अफरा-तफरी मच गई, जब झुलसे और लहूलुहान हालत में घायलों को एक के बाद एक वहां लाया जाने लगा। घायलों की कराह और परिजनों की चीख-पुकार से पूरा परिसर दहल उठा। कोई अपने मासूम को पुकार रहा था तो कोई डॉक्टरों के आगे हाथ जोड़कर बिलखते हुए बस यही गुहार लगा रहा था— “साहब, किसी तरह बचा लीजिए!”
इलाज के दौरान डॉक्टरों ने 5 वर्षीय मासूम प्रियांजलि, 13 वर्षीय प्रवीण सिंह और 32 वर्षीय अंजू को मृत घोषित कर दिया। डॉक्टरों की इस घोषणा के साथ ही परिजनों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा और पूरे इमरजेंसी वार्ड में सन्नाटा पसर गया। तीनों शवों को अस्पताल की मोर्चरी में रखवाया गया है, जहां मंगलवार को उनका पोस्टमार्टम किया जाएगा।
तीन भाई-बहनों में सबसे छोटी थी प्रियांजलि, रो-रोकर बेसुध हुए परिजन
विस्फोट में जान गंवाने वाली 5 साल की मासूम प्रियांजलि तीन भाई-बहनों में सबसे छोटी थी। प्रियांजलि के पिता कौशांबी स्थित एक बैंक में कैशियर के पद पर कार्यरत हैं। हादसे के समय वह अपनी ड्यूटी पर गए हुए थे, जबकि घर पर प्रियांजलि अपनी मां, दो भाइयों और परिवार के अन्य सदस्यों के साथ मौजूद थी। अस्पताल पहुंचे बच्ची के मामा मंजीत जैसे ही प्रियांजलि की मौत की खबर सुनी, वह बेसुध होकर गिर पड़े।
चार घायलों की हालत नाजुक, वेंटिलेटर सपोर्ट पर चल रहा इलाज
एसआरएन अस्पताल लाए गए घायलों में से चार की स्थिति बेहद चिंताजनक बनी हुई है:
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गंभीर घायल (वेंटिलेटर पर): सविता देवी (33), उर्वशी (16), राजेश कुमार (45) और अनीता (35)।
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खतरे से बाहर: माला देवी (36)।
अस्पताल में आठ घायलों को लाया गया था, जिनमें से तीन की अस्पताल पहुंचने से पहले ही सांसें थम चुकी थीं।
मोती लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य ने संभाला मोर्चा
हादसे की संवेदनशीलता को देखते हुए मोती लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. ए.के. वर्मा और एसआरएन अस्पताल की प्रमुख अधीक्षक डॉ. नीलम सिंह अपनी विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम के साथ तुरंत ट्रॉमा सेंटर के ट्रायज रूम पहुंचे। प्राचार्य डॉ. वर्मा ने खुद इलाज की व्यवस्था की कमान संभाली। गंभीर रूप से झुलसे मरीजों के लिए क्रिटिकल केयर विशेषज्ञ डॉ. अनिल सिंह, ट्रॉमा सेंटर प्रभारी डॉ. राजकुमार चौधरी, सर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ. वैभव श्रीवास्तव और डॉ. सूर्यभान कुशवाहा समेत कई डॉक्टरों की स्पेशल टीमों को जीवन रक्षक इलाज में तैनात किया गया है।















