
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) की कार्यप्रणाली को लेकर अहम निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने कहा कि मनन कुमार मिश्रा की अगुवाई वाली BCI अब अकेले कोई बड़ा नीतिगत फैसला नहीं ले सकेगी। ऐसे महत्वपूर्ण फैसलों में अटॉर्नी जनरल और सॉलिसिटर जनरल की सक्रिय भागीदारी जरूरी होगी। कोर्ट के मुताबिक, मौजूदा पदाधिकारी फिलहाल BCI का नियमित और प्रशासनिक काम संभाल सकते हैं, लेकिन बड़े नीतिगत निर्णय लेने से उन्हें दूर रहना होगा।
मनन मिश्रा स्थायी अध्यक्ष नहीं: सुप्रीम कोर्ट
CJI सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने कहा कि मनन कुमार मिश्रा को BCI का स्थायी अध्यक्ष नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने उनके मौजूदा पद को प्रो-टेम यानी अंतरिम व्यवस्था के तौर पर देखा है। यह व्यवस्था राज्य बार काउंसिलों के नए चुनाव और नई BCI के गठन तक सीमित रहेगी।
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मौजूदा पदाधिकारी रोजमर्रा के प्रशासनिक और नियमित कामकाज को जारी रख सकते हैं, लेकिन ऐसे फैसले नहीं ले सकते जिनका BCI की भविष्य की कार्यप्रणाली या नीतियों पर व्यापक असर पड़े। बड़े नीतिगत फैसलों में अटॉर्नी जनरल और सॉलिसिटर जनरल की सक्रिय भूमिका रहेगी।
यह आदेश उन याचिकाओं की सुनवाई के दौरान आया, जिनमें मनन कुमार मिश्रा के BCI अध्यक्ष पद पर बने रहने और उनके कार्यकाल को चुनौती दी गई है।
2012 से पद पर बने रहने का आरोप
याचिकाकर्ताओं की ओर से आरोप लगाया गया है कि बिहार से भाजपा के राज्यसभा सांसद मनन कुमार मिश्रा लंबे समय से BCI के शीर्ष पद पर बने हुए हैं। याचिका में उनके कार्यकाल को लेकर BCI के नियमों का हवाला देते हुए सवाल उठाए गए हैं।
याचिकाकर्ताओं ने BCI से जुड़े ‘PEARL FIRST’ ट्रस्ट को लेकर भी आपत्ति जताई है। आरोप है कि मनन कुमार मिश्रा समेत कुछ लोग इसमें व्यक्तिगत क्षमता में लाइफ मैनेजिंग ट्रस्टी हैं। यह ट्रस्ट गोवा में अंतरराष्ट्रीय कानूनी शिक्षा और अनुसंधान से जुड़ी संस्था चलाता है। मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने BCI के पदाधिकारियों और ट्रस्ट के बीच संबंधों को लेकर भी सवाल उठाए।
नई BCI के गठन की प्रक्रिया तेज
सुप्रीम कोर्ट ने नई BCI के गठन की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट के मुताबिक, सभी राज्य बार काउंसिलों के चुनाव पूरे होने के बाद नई BCI के गठन की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीशों से दो सप्ताह के भीतर दो महिला सदस्यों के मनोनयन की प्रक्रिया पूरी करने को कहा गया है। इसके बाद नई राज्य बार काउंसिलें अपने अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और BCI प्रतिनिधि का चुनाव करेंगी। इन्हीं प्रतिनिधियों के जरिए नई BCI के गठन की प्रक्रिया पूरी होगी।
मामले में अगली सुनवाई 17 सितंबर को होगी। तब तक राज्य बार काउंसिलों से संबंधित चुनाव और प्रतिनिधियों के चयन की प्रक्रिया पर भी नजर रखी जाएगी।
मनन मिश्रा का कार्यकाल क्यों बना विवाद?
मनन कुमार मिश्रा लंबे समय से BCI के चेयरमैन पद पर हैं। उनके कार्यकाल को लेकर मुख्य विवाद BCI के नियम 12(2) से जुड़ा है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि इस नियम के तहत चेयरमैन का कार्यकाल दो साल का होता है।
इसके बावजूद अप्रैल 2025 में जारी अधिसूचना में मनन मिश्रा का कार्यकाल 17 अप्रैल 2025 से 16 अप्रैल 2030 तक बताया गया। याचिकाकर्ताओं ने पांच साल के इस कार्यकाल को चुनौती देते हुए नए सिरे से चुनाव कराने की मांग की है। सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान इस अवधि और नियमों के बीच तालमेल को लेकर सवाल उठाए हैं।
NALSAR विवाद के बाद भी चर्चा में आए थे मिश्रा
मनन मिश्रा हाल ही में NALSAR से जुड़े एक विवाद के कारण भी चर्चा में रहे थे। BCI ने 2026 बैच के NALSAR छात्रों के नामांकन पर रोक लगाने का निर्देश दिया था। यह विवाद छात्रों के एक वर्ग की ओर से दीक्षांत समारोह में CJI की मौजूदगी को लेकर आपत्ति जताए जाने के बाद सामने आया था।
बाद में BCI ने अपना फैसला वापस ले लिया और मनन मिश्रा ने छात्रों से माफी भी मांगी। इसके बाद BCI के भीतर से उनके इस्तीफे की मांग उठी। उनके लंबे कार्यकाल और BCI के कामकाज को लेकर उठे सवालों के बीच मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा।
अब सुप्रीम कोर्ट के ताजा निर्देश के बाद BCI के बड़े नीतिगत फैसलों पर अंतरिम तौर पर निगरानी बढ़ गई है। साथ ही नई BCI के गठन के लिए राज्य बार काउंसिलों की चुनावी प्रक्रिया को तेजी से पूरा करने की दिशा में भी कदम बढ़ाए गए हैं।














