एप्पल मैनेजर विवेक तिवारी हत्याकांड: कोर्ट में सजा से बचने के लिए गिड़गिड़ाया बर्खास्त सिपाही, मिली 10 साल की सजा

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के बहुचर्चित एप्पल कंपनी के एरिया मैनेजर विवेक तिवारी हत्याकांड में जिला एवं सत्र न्यायालय ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। मुख्य आरोपी बर्खास्त सिपाही प्रशांत कुमार चौधरी को अदालत ने 10 साल के कठोर कारावास और 20 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है। सजा के प्रश्न पर सुनवाई के दौरान कोर्ट रूम में आरोपी सिपाही प्रशांत कुमार चौधरी फूट-फूटकर रोया और सजा से बचने के लिए गिड़गिड़ाता रहा।

प्रशांत ने अपनी 36 साल की उम्र, बूढ़े माता-पिता और पारिवारिक दुहाइयों का हवाला देते हुए कोर्ट से रहम की गुहार लगाई। उसने कहा, “हुजूर, घर पर वृद्ध माता-पिता हैं, पत्नी भी 2023 में तलाक देकर छोड़कर चली गई, एक बिन ब्याहा भाई है और मैं आठ साल जेल में रह चुका हूं। मेरा कोई पूर्व आपराधिक इतिहास नहीं है, इसलिए जेल में बिताई गई अवधि को ही सजा मानकर रिहा कर दिया जाए।” हालांकि, विवेक तिवारी पक्ष के अधिवक्ता प्रांशु अग्रवाल ने इसका कड़ा विरोध करते हुए तर्क दिया कि अभियुक्त ने एक निर्दोष व्यक्ति की नृशंस हत्या की है, इसलिए उसे सख्त से सख्त सजा दी जानी चाहिए।

बचाव में गोली चलाने का तर्क, कोर्ट ने गैरइरादतन हत्या का पाया दोषी

अदालत ने अपने फैसले में घटनाक्रम की परिस्थितियों को रेखांकित करते हुए स्पष्ट किया कि 29 सितंबर 2018 की रात जब आरोपी प्रशांत अपने साथी संदीप कुमार के साथ बाइक से पेट्रोलिंग कर रहा था, तब उसने एक एक्सयूवी कार को आते देखा। सिपाही द्वारा कार रोकने का इशारा करने पर विवेक तिवारी ने कार नहीं रोकी, बल्कि उनकी मोटरसाइकिल में टक्कर मार दी। कोर्ट ने माना कि इससे सिपाही को अपनी जान का खतरा महसूस हुआ और उसने आत्मरक्षण (बचाव) में कार की विंडस्क्रीन पर गोली चलाई, जो विवेक तिवारी को जा लगी और उनकी मृत्यु हो गई। इसी आधार पर अदालत ने प्रशांत को हत्या (Murder) के बजाय गैरइरादतन हत्या (Culpable Homicide not amounting to murder) का दोषी माना।

8 साल पहले गोमतीनगर में क्या हुआ था?

29 सितंबर 2018 की रात विवेक तिवारी अपनी सहकर्मी सना खान को उनके घर छोड़ने जा रहे थे। गोमतीनगर की मकदूमपुर पुलिस चौकी के पास गश्त कर रहे सिपाही प्रशांत चौधरी और संदीप ने उन्हें रोकने की कोशिश की। सना के बयान के अनुसार, डर के कारण कार न रोकने पर सिपाही संदीप ने कार की खिड़की में डंडा डाला, जिसके बाद प्रशांत ने पिस्टल से सीधी गोली चला दी। गोली लगने के बाद कार एक खंभे से टकरा गई और सिपाही मौके से फरार हो गए। लोहिया अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने विवेक को मृत घोषित कर दिया था।

चार स्तर की जांच में दोषी पाया गया था आरोपी, सड़क से विदेशी मीडिया तक गुंजा था मामला

इस दर्दनाक घटना के बाद पूरे लखनऊ शहर में भारी जनआक्रोश फैल गया था। मामले ने इतना तूल पकड़ा कि इसकी गूंज अंतरराष्ट्रीय मीडिया तक पहुंची। परिजनों, राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों ने सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन किया था।

विवेक तिवारी की पत्नी कल्पना के भाई विष्णु शुक्ला के अनुसार, इस पूरे मामले की जांच चार अलग-अलग स्तरों पर हुई थी। तत्कालीन आईजी सुजीत पांडेय के नेतृत्व वाली एसआईटी (SIT), थाना प्रभारी महानगर द्वारा की गई पुलिस जांच, मजिस्ट्रेटी जांच और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) की जांच—सभी चारों जांच रिपोर्टों में सिपाही प्रशांत कुमार चौधरी को हत्या का दोषी पाया गया था।

खबरें और भी हैं...

Leave a Comment

Are you human? Please solve:Captcha