तंत्र-मंत्र के खौफनाक अंत से दहला आजमगढ़: पूजा के मंडप में चलीं ताबड़तोड़ गोलियां, सनकी पति और मासूम समेत 5 की मौत, आधी रात कमांडो ऑपरेशन से बचे 2 बच्चे

उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले का शंभूपुर गहजी गांव मंगलवार की शाम एक ऐसी दिल दहला देने वाली वारदात का गवाह बना, जिसने पूरे प्रदेश को सन्न कर दिया है। अहरौला थाना क्षेत्र के इस शांत गांव में अंधविश्वास, कथित प्रेतबाधा और मानसिक बीमारी के खतरनाक कॉकटेल ने खूनी नरसंहार का रूप ले लिया। घर में मंडरा रही बड़े भाई की आत्मा के साये को भगाने के नाम पर चल रहे धार्मिक अनुष्ठान के बीच अचानक गोलियों की तड़तड़ाहट गूंज उठी। इस सनसनीखेज घटनाक्रम में अब तक आरोपी पति, उसकी पत्नी, दो पुरोहितों और एक 4 साल के मासूम बच्चे समेत कुल 5 लोगों की मौत हो चुकी है।

आंगन में जल रही थी हवन की अग्नि, सनकी पति ने ढाया कहर पुलिस पड़ताल और ग्रामीणों से मिली जानकारी के अनुसार, आरोपी अरविंद सिंह का पिछले काफी समय से वाराणसी से मानसिक रोग का इलाज चल रहा था। घरवाले इस बीमारी को इलाज के बजाय अंधविश्वास का चश्मा पहनकर देख रहे थे। परिवार को आशंका थी कि अरविंद के ऊपर उसके स्वर्गीय बड़े भाई सुनील सिंह की आत्मा और प्रेतबाधा का साया है। इसी अंधविश्वास के फेर में आकर अरविंद की वृद्ध मां समला देवी (70) और पत्नी बबीता सिंह (40) ने घर के आंगन में 4 दिनों का विशेष तांत्रिक अनुष्ठान और तंत्र-पूजा आयोजित की थी, जिसकी बुधवार को पूर्णाहुति होनी थी। मंगलवार शाम करीब 6 बजे जब अरविंद बाजार से लौटा, तो आंगन में चल रहे इस अनुष्ठान को देखते ही उसका पारा चढ़ गया। वह आपा खोकर जोर-जोर से चिल्लाने लगा कि ‘तेरे ही चक्कर में मेरे भाई की हत्या हुई है।’ इसके बाद उसने बिना संभलने का मौका दिए अपनी लाइसेंसी बंदूक से अपनी पत्नी बबीता को पहली गोली मार दी। इसके बाद पूजा करा रहे दो पुरोहितों—महेंद्र पाठक और अखिलेश मिश्रा पर ताबड़तोड़ गोलियां बरसाकर उन्हें वहीं ढेर कर दिया।

तीन मासूमों को बनाया ढाल, 7 घंटे तक सांसें थामे रही पुलिस त्रिपाल मर्डर की इस भयानक वारदात को अंजाम देने के बाद सनकी अरविंद अपने तीन छोटे-छोटे मासूम बच्चों को घसीटते हुए एक कमरे में ले गया और अंदर से कुंडी बंद कर ली। सूचना मिलते ही आजमगढ़ पुलिस में हड़कंप मच गया। 6 थानों की फोर्स, एसपी डॉ. अनिल कुमार और एसपी ग्रामीण चिराग जैन भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। करीब 7 घंटे तक पुलिस अधिकारी लाउडस्पीकर और खिड़की से सिरफिरे अरविंद को समझाते रहे और बच्चों को सही-सलामत छोड़ने की मिन्नतें करते रहे। लेकिन मानसिक रूप से अस्वस्थ अरविंद अजीबोगरीब हरकतें करते हुए लगातार पुलिस टीम को गोलियां मारने की धमकियां देता रहा।

आधी रात को कमांडो का सर्जिकल एक्शन, गोलियों की तड़तड़ाहट से कांपा इलाका कमरे में बंद मासूमों की जान पर बन आई तो देर रात करीब 11:30 बजे वाराणसी जोन के एडीजी नवीन अरोड़ा खुद कमान संभालने पहुंचे। स्थिति को गंभीर देखते हुए रात 12:30 बजे विशेष कमांडो दस्ते को मोर्चा सौंप दिया गया। कमांडो टीम ने जैसे ही दरवाजा तोड़कर आरोपी को ललकारा, अरविंद ने ताबड़तोड़ 6 राउंड गोलियां चला दीं। इससे पहले कि कोई कुछ समझ पाता, सनकी पिता ने कमरे के अंदर मौजूद अपने 4 साल के मासूम बच्चे को भी गोली मार दी। जवाबी कार्रवाई और आत्मरक्षा में पुलिस व कमांडो टीम को भी मोर्चा खोलना पड़ा, जिसमें अरविंद गंभीर रूप से घायल हो गया।

अस्पताल में आरोपी व मासूम ने तोड़ा दम, दो बच्चे सुरक्षित फायरिंग थमते ही पुलिस ने दरवाजा तोड़कर कमरे में फंसे 2 अन्य बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाला। खून से लथपथ आरोपी अरविंद और उसके गोली लगे मासूम बच्चे को तत्काल एम्बुलेंस से जिला अस्पताल भिजवाया गया। हालांकि, डॉक्टरों के भरसक प्रयास के बावजूद इलाज के दौरान आरोपी अरविंद और उसके 4 साल के मासूम बेटे दोनों ने दम तोड़ दिया। पुलिस की मुस्तैदी से 2 मासूम बच्चों की जान बचा ली गई है।

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने दी आधिकारिक जानकारी मामले की गंभीरता पर वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) आजमगढ़ डॉ. अनिल कुमार ने आधिकारिक पुष्टि करते हुए बताया कि आरोपी ने अपनी पत्नी और दो पुरोहितों की हत्या के बाद अपने ही बच्चों को कमरे में बंधक बना लिया था। पुलिस की लगातार चेतावनी के बाद भी उसने अपने ही एक मासूम बच्चे को गोली मारकर गंभीर रूप से घायल कर दिया था। बंधक बच्चों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए पुलिस द्वारा जवाबी कार्रवाई की गई, जिसमें आरोपी घायल हुआ। इलाज के दौरान आरोपी और उसके घायल बच्चे दोनों की मृत्यु हो गई है। बाकी दो बच्चों को सुरक्षित बचा लिया गया है। वर्तमान में फॉरेंसिक और एसओजी की टीमें मौके से साक्ष्य जुटाने में लगी हुई हैं और स्थिति नियंत्रण में है।

 

खबरें और भी हैं...

Leave a Comment

Are you human? Please solve:Captcha