अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने बुधवार को कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप राष्ट्रीय नीति के एक शक्तिशाली हथियार के रूप में टैरिफ के इस्तेमाल पर मजबूत विश्वास रखते हैं। रूस और ईरान से जुड़े नए कड़े प्रतिबंध कानून ने राष्ट्रपति ट्रंप को रूस-यूक्रेन युद्ध और क्षेत्रीय तनाव को प्रभावित करने के लिए व्यापक अतिरिक्त अधिकार दे दिए हैं।
कानून में 100% टैरिफ का प्रावधान, पर स्वतः लागू नहीं होगा नियम
राष्ट्रपति ट्रंप ने बीते शुक्रवार को ‘Lindsey O. Graham Sanctioning Russia and Iran Act of 2026’ पर हस्ताक्षर कर इसे आधिकारिक रूप से कानून का रूप दिया। यह नया कानून अमेरिकी राष्ट्रपति को उन प्रमुख देशों पर 100 प्रतिशत तक का भारी टैरिफ लगाने की शक्ति देता है, जो रूस से कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की खरीद जारी रखे हुए हैं। उल्लेखनीय है कि भारत और चीन रूसी ऊर्जा के सबसे बड़े खरीदारों में शामिल हैं। हालांकि, कानून लागू होने का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि 100 प्रतिशत टैरिफ अपने आप लागू हो जाएगा; यह केवल राष्ट्रपति को ऐसा कड़ा कदम उठाने का विशेष अधिकार प्रदान करता है।
70 साल बाद कांग्रेस ने राष्ट्रपति को दिया यह विशेष अधिकार
विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए इस कानून के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, “यह कानून राष्ट्रपति को टैरिफ लगाने का विशेष अधिकार देता है। मुझे लगता है कि बीते लगभग 70 वर्षों में यह पहली बार है जब अमेरिकी कांग्रेस ने राष्ट्रपति को इस तरह का प्रत्यक्ष टैरिफ अधिकार सौंपा है। राष्ट्रपति ट्रंप राष्ट्रीय नीति के साधन के रूप में टैरिफ पर बहुत गहरा भरोसा रखते हैं।”
राष्ट्रीय सुरक्षा छूट और राष्ट्रपति का विशेषाधिकार
रुबियो ने स्पष्ट किया कि कानून में राष्ट्रीय सुरक्षा के आधार पर छूट (waiver) देने का विशेष प्रावधान भी शामिल किया गया है। इससे अमेरिकी प्रशासन को अलग-अलग देशों और परिस्थितियों के हिसाब से लचीला रुख अपनाने का मौका मिलेगा। उन्होंने आगे कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप के पास अब एक ऐसा प्रभावी साधन आ गया है, जिसका इस्तेमाल रूस-यूक्रेन युद्ध के घटनाक्रम को प्रभावित करने के साथ-साथ ईरान से जुड़े अंतरराष्ट्रीय मामलों में भी किया जा सकता है। इस हथियार का इस्तेमाल कब, कैसे और किस स्थिति में करना है, इसका अंतिम निर्णय स्वयं राष्ट्रपति ट्रंप करेंगे।
एस जयशंकर के साथ बैठक में उठा भारत की चिंताओं का मुद्दा
यह प्रेस कॉन्फ्रेंस अमेरिकी विदेश मंत्री रुबियो और भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर के बीच हुई महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठक के ठीक बाद आयोजित की गई। बैठक के दौरान विदेश मंत्री एस जयशंकर ने नए अमेरिकी रूस-ईरान प्रतिबंध कानून को लेकर भारत के आर्थिक हितों, प्राथमिकताओं और चिंताओं को अमेरिकी पक्ष के समक्ष स्पष्ट रूप से रखा।
यूएन महासभा में बोले ट्रंप: हत्याएं रोकने का समय आ गया है
इससे पहले मंगलवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ट्रंप ने इस नए कानून को बेहद ‘शक्तिशाली’ करार दिया था। उन्होंने कहा था कि इस कानून के जरिए उन्हें रूस से तेल खरीदने वाले भारत और चीन जैसे बड़े देशों पर टैरिफ लगाने के व्यापक अधिकार प्राप्त हुए हैं। ट्रंप ने चेतावनी भरे अंदाज में कहा था कि अगर जरूरत पड़ी, तो वह इन अधिकारों का इस्तेमाल करने से नहीं झिझकेंगे। रूस-यूक्रेन संघर्ष पर बात करते हुए उन्होंने जोर देकर कहा कि अब हिंसा और मौतों के सिलसिले को रोकने का समय आ गया है।
भारत का दोटूक जवाब: 1.4 अरब लोगों की ऊर्जा सुरक्षा सबसे ऊपर
अमेरिका के इस सख्त कानून और बयानों पर भारत ने अपनी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट कर दी है। भारतीय पक्ष की ओर से प्रतिक्रिया देते हुए कहा गया है कि देश अपने 1.4 अरब नागरिकों की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। भारत ने साफ कर दिया है कि वह अपने राष्ट्रीय आर्थिक हितों, रणनीतिक स्वायत्तता और ऊर्जा सुरक्षा की रक्षा के लिए सभी आवश्यक कदम उठाना जारी रखेगा।
















