राज्यसभा चर्चाओं पर विराम: NDA कोटे से दोबारा उच्च सदन जाने की अटकलों पर ब्रेक, 2028 तक बरकरार है जयंत सिंह की सांसदी

राष्ट्रीय लोकदल (RLD) के प्रमुख और केंद्रीय मंत्री चौधरी जयंत सिंह के एनडीए कोटे से दोबारा राज्यसभा भेजे जाने की सियासी चर्चाओं पर फिलहाल पूर्णविराम लग गया है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) द्वारा राज्यसभा प्रत्याशियों की नई सूची जारी करने के साथ ही इन कयासों पर ब्रेक लग गया। राजनीतिक गलियारों में पिछले काफी समय से यह चर्चा जोरों पर थी कि भाजपा अपने कोटे से जयंत सिंह को एक बार फिर उच्च सदन की सीट दे सकती है।

2022 में सपा-रालोद गठबंधन के दम पर पहुंचे थे उच्च सदन

जयंत सिंह जुलाई 2022 में समाजवादी पार्टी (SP) और रालोद के संयुक्त प्रत्याशी के रूप में राज्यसभा चुने गए थे। उस समय उत्तर प्रदेश की 403 सदस्यीय विधानसभा में रालोद के 8 विधायक थे, जबकि राज्यसभा प्रत्याशी की जीत के लिए 34 वोटों की जरूरत थी। सपा के 111 और सहयोगियों के समर्थन से यह गठबंधन तीन सीटें जीतने की मजबूत स्थिति में था। इसी गणित के तहत जयंत सिंह तीसरे प्रत्याशी के रूप में सदन पहुंचे थे। बाद में खतौली उपचुनाव में मिली जीत से रालोद विधायकों की संख्या बढ़कर 9 हो गई थी।

एनडीए में शामिल होने के बाद उठी थीं ‘सीट की अदला-बदली’ की चर्चाएं

साल 2024 के लोकसभा चुनाव से ठीक पहले रालोद ने विपक्ष का साथ छोड़कर एनडीए का हाथ थाम लिया था। इसके बाद से ही राजनीतिक हलकों में यह अटकलें लगाई जाने लगीं कि अखिलेश यादव के समर्थन से मिली राज्यसभा सीट को छोड़कर जयंत भाजपा के सहयोग से नई सीट चुन सकते हैं। हालांकि, संवैधानिक स्थिति यह है कि जयंत सिंह का वर्तमान राज्यसभा कार्यकाल जुलाई 2028 तक प्रभावी है।

अखिलेश और जयंत के बीच जुबानी तीर और तल्खी

गठबंधन टूटने के बाद से ही दोनों प्रमुख नेताओं के बीच जुबानी जंग भी देखने को मिली है। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने बिना नाम लिए ‘चवन्नी का रुपया’ बनने के बाद पाला बदलने का तंज कसा था। इस टिप्पणी पर पलटवार करते हुए जयंत सिंह ने इसे सीधे तौर पर जाट समाज के स्वाभिमान से जोड़ते हुए करारा जवाब दिया था। भाजपा उम्मीदवारों के नए नामों के ऐलान के बाद फिलहाल इन सियासी चर्चाओं पर विराम लग गया है।

 

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