लखनऊ में गोमती की बाढ़ से हाहाकार: एक सप्ताह बाद भी जलस्तर बरकरार, 12 रैन बसेरे बनाए; अंतिम संस्कार के लिए घंटों इंतजार

राजधानी लखनऊ में गोमती नदी के उफान से उपजे बाढ़ के हालात एक सप्ताह बीत जाने के बाद भी बने हुए हैं। नदी का जलस्तर घटने का नाम नहीं ले रहा, जिससे कई तटवर्ती इलाकों में जलभराव की स्थिति गंभीर बनी हुई है। गऊ घाट, हनुमंत धाम, रिवर फ्रंट, सैठा, लोहरामऊ, फैजुल्लागंज, दाउद नगर और मिल्लत नगर जैसे इलाकों में बाढ़ का पानी भरा हुआ है। खतरे को देखते हुए हजारों लोग अपने घरों को छोड़कर सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन करने को मजबूर हैं।

35 परिवार सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट, 12 अस्थायी रैन बसेरों में शरण

बाढ़ प्रभावित परिवारों की सहायता के लिए जिला प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए 12 अस्थायी रैन बसेरे स्थापित किए हैं, जहां फिलहाल 26 लोगों को आश्रय दिया गया है। अब तक 35 से अधिक परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा चुका है। प्रभावित इलाकों में फंसे लोगों की मदद और राहत सामग्री पहुंचाने के लिए 90 नावों को काम में लगाया गया है। प्रशासन और आपदा राहत की टीमें लगातार नावों के जरिए जलभराव वाले क्षेत्रों में गश्त कर निगरानी रख रही हैं।

बीमारियों से निपटने के लिए 150 एकड़ में ड्रोन छिड़काव, टैंकरों से हो रही पेयजल आपूर्ति

बाढ़ का पानी रुकने से संक्रामक बीमारियों और मच्छरों का प्रकोप न फैले, इसके लिए नगर निगम व्यापक स्तर पर कदम उठा रहा है। लगभग 150 एकड़ के विशाल क्षेत्र में ड्रोन तकनीक के जरिए एंटी लार्वा और एमएलओ (मच्छर रोधी तेल) का छिड़काव किया जा रहा है। इसके साथ ही 250 से अधिक सफाईकर्मी प्रभावित इलाकों में निरंतर सफाई व्यवस्था संभाल रहे हैं। पीने के साफ पानी की किल्लत दूर करने के लिए 20 से अधिक पानी के टैंकर तैनात किए गए हैं और 10 हजार लीटर से ज्यादा पैक्ड पेयजल का वितरण किया गया है।

पानी घटते ही चलेगा विशेष सैनिटाइजेशन अभियान; जोखिम वाले इलाकों में न जाने की अपील

नगर आयुक्त गौरव कुमार ने पूरे दिन बाढ़ प्रभावित इलाकों में घूमकर चल रहे राहत एवं बचाव कार्यों का जायजा लिया। अधिकारियों ने बताया कि जैसे ही गोमती का जलस्तर नीचे जाएगा, प्रभावित क्षेत्रों में विशेष सफाई, फॉगिंग और सैनिटाइजेशन अभियान चलाया जाएगा। इस बीच, कई जगहों पर लोग पानी देखने या घूमने के लिए डूब क्षेत्रों में पहुंच रहे हैं। प्रशासन और पुलिस ने ऐसे लोगों को रोकने के लिए कड़े कड़े सुरक्षा इंतजाम किए हैं तथा आम जनता से अपील की है कि स्थिति सामान्य होने तक जोखिम भरे क्षेत्रों से दूर रहें।

बैकुंठ धाम और गुल्लाला घाट जलमग्न; अंतिम संस्कार के लिए घंटों इंतजार

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में गोमती नदी का जलस्तर घटने के बजाय लगातार नौवें दिन भी बढ़ता नजर आ रहा है, जिससे बाढ़ की स्थिति भयावह हो गई है। नदी के उफान का असर अब शहर के प्रमुख श्मशान घाटों पर भी साफ दिखने लगा है। बैकुंठ धाम (भैंसाकुंड) और गुल्लाला घाट के बड़े हिस्से में बाढ़ का पानी घुसने के कारण अंतिम संस्कार की प्रक्रिया बुरी तरह प्रभावित हुई है और परिजनों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

बैकुंठ धाम में 15 से ज्यादा शवदाह स्थल डूबे, सूखी लकड़ियों की भारी किल्लत

बैकुंठ धाम परिसर में जलभराव के चलते लगभग 15 शवदाह स्थल पूरी तरह से पानी में डूब चुके हैं। इसके अलावा, परिजनों के बैठने की जगह और लकड़ियों के भंडारण वाले स्थानों में भी पानी भर गया है। सूखी लकड़ियां न मिलने और दाह संस्कार के लिए सीमित जगह बचने के कारण वहां आने वाले लोगों को अपने परिजनों की अंतिम विदाई के लिए चार से पांच घंटे तक लंबी लाइनों में इंतजार करना पड़ रहा है।

परिजनों का छलका दर्द: 4-4 घंटे लाइन में लगने के बाद हो रहा दाह संस्कार

श्मशान घाट पहुंचे शोकाकुल परिजनों ने अपनी आपबीती साझा की। माता जी का अंतिम संस्कार करने आए डोरी लाल ने बताया कि वे सुबह 11 बजे पहुंचे थे, लेकिन दोपहर 3 बजे तक भी उनका नंबर नहीं आ सका था। वहीं, राम अवतार और सूरज कश्यप ने बताया कि जगह बेहद कम होने और जलभराव के कारण परिजनों को शवों को सुरक्षित स्थान पर रखकर घंटों अपनी बारी का इंतजार करना पड़ रहा है। गुल्लाला घाट पर भी पानी भरने के कारण अधिकांश लोग अब बैकुंठ धाम का रुख कर रहे हैं, जिससे वहां दबाव और बढ़ गया है।

प्रशासन से सूखी लकड़ी और जल निकासी के पुख्ता इंतजाम करने की मांग

हालात को देखते हुए स्थानीय नागरिकों और प्रभावित परिवारों ने नगर निगम और जिला प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की गुहार लगाई है। लोगों की मांग है कि श्मशान घाटों पर सूखी लकड़ियों की पर्याप्त व्यवस्था कराई जाए और पंप लगाकर जलभराव को जल्द से जल्द दूर किया जाए, ताकि दुख की इस घड़ी में आम जनता को और अधिक मानसिक व शारीरिक परेशानी न उठानी पड़े।

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