
गंगा नदी में बढ़ते प्रदूषण और इसके तटों पर हो रहे अवैध कब्जों को लेकर सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) ने कड़ा रुख अपनाया है। न्यायमूर्ति की पीठ ने उत्तर प्रदेश, बिहार समेत कई राज्यों के ढुलमुल रवैये पर भारी नाराजगी जताते हुए कड़ी फटकार लगाई है। सुप्रीम कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा, “आप लोग गंगा को पहले ही बहुत बर्बाद कर चुके हैं। अब इसे ठीक करने की पूरी जिम्मेदारी आपकी है। नदी के किनारों पर किए गए सभी अवैध निर्माणों और अतिक्रमणों को जल्द से जल्द हटाया जाए।” अदालत ने उत्तर प्रदेश सरकार और अन्य संबंधित राज्यों को स्पष्ट चेतावनी दी है कि गंगा नदी के प्राकृतिक स्वरूप के साथ किसी भी तरह की छेड़छाड़ अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
बिहार को अवैध कब्जे हटाने के लिए 12 हफ्ते की मोहलत
बिहार राज्य से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने वहां की बाढ़ की विभीषिका और नदियों में पानी के अत्यधिक तेज बहाव के गंभीर संकट पर ध्यान दिया। सुप्रीम कोर्ट ने राज्य में बाढ़ के मौजूदा हालातों को ध्यान में रखते हुए बिहार सरकार को गंगा के तटबंधों व कैचमेंट एरिया से सभी अवैध कब्जों को हटाने के लिए 12 सप्ताह (तीन महीने) की मोहलत दी है। अदालत ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि पूर्व में जारी किए गए निर्देशों के बावजूद राज्य सरकारों और स्थानीय प्रशासन की सेहत पर कोई असर नहीं पड़ा है, जिसके कारण अब न्यायपालिका को यह सख्त कदम उठाने के लिए मजबूर होना पड़ा है।
यूपी, बिहार समेत 11 राज्यों को सुप्रीम कोर्ट का नोटिस
गंगा के समूचे कैचमेंट एरिया और बेसिन की बदहाली पर सुनवाई करते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने करीब एक सप्ताह पूर्व ही गंगा क्षेत्र के दायरे में आने वाले 11 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को कारण बताओ नोटिस जारी किया था।
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इन राज्यों में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, बिहार, पश्चिम बंगाल, झारखंड, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और दिल्ली शामिल हैं।
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शीर्ष अदालत ने सभी 11 राज्यों से नदी के तटवर्ती इलाकों में फैले अवैध अतिक्रमण, बाढ़ के मैदानी क्षेत्रों (Flood Plains) का नए सिरे से सीमांकन करने और इसके संरक्षण को लेकर विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है।
केंद्र सरकार का सुप्रीम कोर्ट में बड़ा हलफनामा: नई जलविद्युत परियोजनाओं पर रोक
मामले की सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार (पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, जल शक्ति मंत्रालय और विद्युत मंत्रालय) ने सर्वोच्च न्यायालय में एक महत्वपूर्ण संयुक्त हलफनामा दाखिल किया है। केंद्र ने हलफनामे के माध्यम से शीर्ष अदालत को आश्वस्त किया है कि सरकार उत्तराखंड की संवेदनशील अलकनंदा और भागीरथी नदी घाटियों (गंगा की सहायक नदियां) में पूर्व से स्वीकृत एवं निर्माणाधीन 7 जलविद्युत परियोजनाओं (Hydroelectric Projects) के अलावा किसी भी नई पनबिजली परियोजना को मंजूरी या समर्थन नहीं देगी। केंद्र का यह फैसला गंगा के अविरल और निर्मल प्रवाह को बनाए रखने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।


















