US PERM Program Suspension: PERM निलंबन से भर्ती रणनीति प्रभावित नहीं होगी, अगले 5 साल में 15,000 अमेरिकी नौकरियां देने की योजना पर कायम—TCS

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन द्वारा दिग्गज आईटी कंपनियों को ग्रीन कार्ड से जुड़े परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन (PERM) प्रोग्राम से निलंबित किए जाने के फैसले पर भारत की सबसे बड़ी आईटी सेवा प्रदाता कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) ने अपनी आधिकारिक प्रतिक्रिया जारी की है। कंपनी ने स्पष्ट किया है कि अमेरिकी श्रम विभाग (US Department of Labor) के इस कदम से उसकी अमेरिकी भर्ती रणनीति (Recruitment Strategy) और ग्राहकों के साथ काम करने की प्रतिबद्धता पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा। TCS ने यह भी दोहराया है कि वह अगले पांच वर्षों में अमेरिका में 15,000 और स्थानीय लोगों को नियुक्त करने के अपने पुराने लक्ष्य पर मजबूती से कायम है।

आखिर क्या है PERM प्रोग्राम, जिसके तहत TCS और अन्य टेक कंपनियों पर हुई कार्रवाई?

परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन (PERM) अमेरिकी श्रम विभाग द्वारा संचालित एक अनिवार्य कानूनी प्रक्रिया है। इसके तहत किसी भी अमेरिकी या वहां कार्यरत टेक कंपनी को किसी विदेशी कर्मचारी के एम्प्लॉयमेंट-बेस्ड ग्रीन कार्ड (स्थायी निवास) की प्रक्रिया आगे बढ़ाने से पहले यह साबित करना होता है कि संबंधित पद के लिए कोई भी स्थानीय अमेरिकी नागरिक उपलब्ध या इच्छुक नहीं है। PERM सर्टिफिकेशन मिलने के बाद ही कंपनी कर्मचारी के ग्रीन कार्ड के अगले चरणों को आगे बढ़ा सकती है।

TCS

ट्रंप प्रशासन ने TCS, इंफोसिस, विप्रो, HCLTech, कॉग्निजेंट, कैपजेमिनी, माइक्रोसॉफ्ट और एडोबी जैसी 8 कंपनियों पर वीजा और भर्ती नियमों के गलत इस्तेमाल का आरोप लगाते हुए PERM से निलंबित कर दिया है। हालांकि, इसका मतलब H-1B वीजा रद्द होना नहीं है; यह निलंबन केवल ग्रीन कार्ड के लिए दाखिल की जाने वाली नई अर्जियों और पेंडिंग लेबर सर्टिफिकेशन प्रक्रियाओं को प्रभावित करता है।

TCS ने दी सफाई: “अमेरिका में स्थानीय प्रतिभाओं और कैम्पस सिलेक्शन पर केंद्रित है हमारा मॉडल”

अमेरिकी श्रम विभाग के निर्देशों पर अपनी स्थिति साफ करते हुए TCS ने कहा कि वह अमेरिकी सरकार के सभी नियमों व निर्देशों का पूरी तरह से पालन करेगी। कंपनी ने बयान जारी कर बताया कि अमेरिका में उसकी वर्कफोर्स स्ट्रेटजी (कार्यबल रणनीति) स्थानीय प्रतिभाओं को नौकरी देने पर आधारित है, जिसके लिए वह अमेरिकी यूनिवर्सिटीज और कॉलेज कैम्पस से बड़े पैमाने पर डायरेक्ट रिक्रूटमेंट मॉडल का इस्तेमाल करती है।

TCS ने जानकारी दी कि पूरे अमेरिका में उसके 31 ऑफिस और डिलीवरी सेंटर्स स्थापित हैं, जहां उसने पहले से ही बड़ी संख्या में अमेरिकी नागरिकों का एक मजबूत वर्कफोर्स तैयार किया हुआ है। कंपनी का उद्देश्य आने वाले सालों में स्थानीय अमेरिकियों की नियुक्ति को और अधिक बढ़ावा देना है।

सस्पेंशन से प्रभाव न पड़ने का कारण: TCS के PERM आवेदन पहले से ही ‘सिंगल डिजिट’ में

TCS ने अपने आधिकारिक बयान में यह महत्वपूर्ण तथ्य साझा किया कि पिछले दो वित्त वर्षों के दौरान कंपनी के द्वारा दाखिल किए गए PERM आवेदनों की संख्या नगण्य यानी केवल ‘सिंगल डिजिट’ (10 से भी कम) में रही है। क्योंकि कंपनी पहले से ही विदेशी स्पॉन्सरशिप पर निर्भरता घटाकर स्थानीय अमेरिकी कर्मचारियों की ऑन-शोर तैनाती पर काम कर रही थी, इसलिए PERM सस्पेंड होने से उसकी नियमित बिजनेस डिलीवरी, प्रोजेक्ट्स या रिक्रूटमेंट प्लान्स पर कोई खास असर नहीं पड़ेगा।

किन कर्मचारियों को हो सकती है परेशानी?

TCS ने भले ही आश्वस्त किया हो कि कंपनी के स्तर पर कोई संकट नहीं है, लेकिन व्यक्तिगत तौर पर उन विदेशी आईटी प्रोफेशनल्स को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है जो H-1B वीजा पर अमेरिका में कार्यरत हैं और अपनी कंपनी के जरिए PERM फाइलिंग का इंतजार कर रहे थे। PERM रुकने के कारण H-1B की 6 साल की तय अवधि खत्म होने के बाद उन्हें वीजा एक्सटेंशन पाने में देरी या दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि, जिन कर्मचारियों के PERM आवेदन पहले से मंजूर हो चुके हैं या जो ग्रीन कार्ड की अगली स्टेज में हैं, उनके मामलों की समीक्षा इमिग्रेशन नियमों के तहत अलग से की जाएगी। 

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