अमेरिका में आज मिडटर्म चुनाव के लिए वोटों की गिनती का दौर पूरी तेजी के साथ आगे बढ़ रहा है और इस महामुकाबले पर पूरी दुनिया की निगाहें टिकी हुई हैं। सामने आ रहे शुरुआती रुझानों में डेमोक्रेटिक पार्टी अपनी मजबूत बढ़त बनाए हुए नजर आ रही है, जबकि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी पिछड़ती हुई दिखाई दे रही है। जैसे-जैसे मतगणना के आंकड़े साफ होते जा रहे हैं, यह तय होने की घड़ी नजदीक आ गई है कि ट्रंप के कार्यकाल के बचे हुए आखिरी दो साल में अमेरिकी संसद यानी कांग्रेस के दोनों सदनों पर आखिरकार किस पार्टी का पूर्ण नियंत्रण स्थापित होगा। इस चुनाव में अमेरिका के हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स यानी प्रतिनिधि सभा और सीनेट के नए सदस्यों का चुनाव किया जा रहा है, और दोनों सदनों पर कब्जा जमाने के लिए डेमोक्रेट्स को प्रतिनिधि सभा में कम से कम चार और सीनेट में भी चार सीटों की अतिरिक्त बढ़त हासिल करनी होगी।
डेमोक्रेट्स की जीत से क्या ट्रंप का नियंत्रण हो जाएगा खत्म
अगर हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में डेमोक्रेट्स पूर्ण जीत हासिल करने में कामयाब हो जाते हैं, तो उन्हें सीधे तौर पर संसदीय समितियों पर नियंत्रण मिल जाएगा। इस समीकरण के बदलते ही उन्हें ट्रंप प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ खुलकर जांच शुरू करने का संवैधानिक अधिकार मिल जाएगा और वे जरूरत पड़ने पर पूछताछ के लिए समन भी जारी कर सकेंगे। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को अपनी राजनीतिक प्राथमिकताओं के अनुसार आगे बढ़ने की ज्यादा स्वतंत्रता मिल जाएगी। इसके अलावा, टैरिफ और ईरान युद्ध जैसे तमाम विवादित मुद्दों पर रिपब्लिकन पार्टी के सांसदों पर भी राष्ट्रपति ट्रंप से अलग रुख अपनाने का कड़ा दबाव लगातार बढ़ता हुआ दिखाई देगा।
डेमोक्रेट्स इस राजनीतिक बढ़त का फायदा उठाकर मेडिकल सर्विसेस, गर्भपात के अधिकार, आवास और बढ़ती महंगाई जैसे आम जनता से जुड़े अहम मुद्दों पर नए बिल पास करा सकते हैं, हालांकि रिपब्लिकन पार्टी के नियंत्रण वाली सीनेट में इन विधेयकों का कड़ा विरोध देखने को मिल सकता है, जहां आसानी से कानून पास कराना संभव नहीं होगा। इसके साथ ही, साल 2027 में देश के बजट और कर्ज की सीमा को लेकर होने वाला संभावित राजनीतिक टकराव वैश्विक वित्तीय बाजारों में बड़ी अस्थिरता भी पैदा कर सकता है।
अगर दोनों सदनों में जीत गए डेमोक्रेट्स तो राष्ट्रपति ट्रंप को उठानी होगी बड़ी मुश्किलें
यदि डेमोक्रेट्स प्रतिनिधि सभा और सीनेट दोनों ही सदनों पर अपना कब्जा जमाने में सफल रहते हैं, तो उन्हें राष्ट्रपति ट्रंप के हर एक एजेंडे को खुलकर चुनौती देने की असीम ताकत मिल जाएगी। इसमें सीनेट पर नियंत्रण सबसे ज्यादा अहम माना जा रहा है, क्योंकि देश के जजों, कैबिनेट सदस्यों और राजदूतों की महत्वपूर्ण नियुक्तियों को अपनी मंजूरी देने की मुख्य जिम्मेदारी इसी सदन के पास होती है। वे रणनीतिक रूप से साल 2028 के राष्ट्रपति चुनाव के बाद तक सुप्रीम कोर्ट में किसी भी खाली पड़े पद को भरने की प्रक्रिया को लंबा खींचने या टालने की पूरी कोशिश भी कर सकते हैं।
डेमोक्रेट्स को ट्रंप प्रशासन की तमाम नियुक्तियों और नीतियों पर कानूनी रोक लगाने की अधिक शक्ति मिल जाएगी, हालांकि रिपब्लिकन सांसदों के समर्थन के बिना देश में कोई भी बड़ा नीतिगत बदलाव करना उनके लिए भी आसान नहीं होगा। इसके साथ ही, पार्टी के ऊपर यह नैतिक और सियासी दबाव भी लगातार बना रहेगा कि वह केवल राष्ट्रपति का विरोध करने तक सीमित न रहे, बल्कि देश की जनता को महंगाई और अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर वास्तविक राहत देने के लिए ठोस उपाय करे।
रिपब्लिकन पार्टी का कब्जा बरकरार रहने पर ट्रंप को मिलेगा सीधा फायदा
दूसरी तरफ, अगर रिपब्लिकन पार्टी प्रतिनिधि सभा और सीनेट दोनों ही जगहों पर अपना नियंत्रण पूरी तरह से बनाए रखती है, तो राष्ट्रपति ट्रंप के लिए अपने कार्यकाल के बचे हुए आखिरी दो सालों में अपने राजनीतिक एजेंडे को आगे बढ़ाना बेहद आसान साबित होने वाला है। कांग्रेस के दोनों सदनों में अपनी ही पार्टी का मजबूत कंट्रोल होने की वजह से रिपब्लिकन नेता ट्रंप की प्राथमिकताओं वाले तमाम कानूनों को बिना किसी बड़े अवरोध के आगे बढ़ा सकेंगे। इसके अलावा, देश के जजों और अन्य तमाम अहम पदों पर होने वाली नियुक्तियों को संसद की हरी झंडी दिलाने में भी उन्हें बेहद कम रुकावटों का सामना करना पड़ेगा।
राष्ट्रपति ट्रंप और रिपब्लिकन पार्टी इन चुनाव परिणामों को देश की आम जनता के नए और अटूट समर्थन के रूप में दुनिया के सामने पेश कर सकेंगे। अमेरिकी राष्ट्रपति को अपनी नीतियों और योजनाओं के क्रियान्वयन में संसद की तरफ से बेहद कम चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा, जबकि दूसरी तरफ डेमोक्रेट्स के पास कानून निर्माण प्रक्रिया या तीखी जांच के जरिए ट्रंप के एजेंडे को टक्कर देने के लिए काफी सीमित मौके ही बाकी रह जाएंगे।


















