भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) ने मतदाता पंजीकरण प्रक्रिया को लेकर एक बड़ा कदम उठाते हुए ऑनलाइन फॉर्म-6 से स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) से जुड़ी घोषणा को अलग कर दिया है। इससे पहले SIR से संबंधित यह घोषणा फॉर्म-6 के भीतर ही अनिवार्य रूप से शामिल थी, जिससे नए मतदाताओं को आवेदन करते समय कुछ खास विकल्पों का चयन करना पड़ता था। अब चुनाव आयोग के इस नए फैसले के तहत, जिन राज्यों में SIR की प्रक्रिया अभी भी जारी है, वहां भी नए मतदाताओं को ECINet पोर्टल पर फॉर्म-6 और SIR घोषणा-पत्र को अलग-अलग भरना होगा।
चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों के बाद बदले हालात
यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों के दौरान कम-से-कम 14 अलग-अलग नोट्स के माध्यम से कई प्रशासनिक और तकनीकी फैसलों पर अपनी कड़ी आपत्तियां दर्ज कराई थीं। आयुक्तों का मुख्य तर्क था कि बिना कानूनी संशोधन के फॉर्म-6 में इस तरह के बदलाव करना नियमों के अनुकूल नहीं है। 13 अगस्त को चुनाव आयुक्त संधू ने इस घोषणा को “अनधिकृत/अवैध” करार देते हुए इसे तत्काल हटाने की मांग की थी। अब सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अपने जवाबी हलफनामे में आयोग ने स्पष्ट किया है कि 21 अक्टूबर को मतदाता सूची प्रभाग (ER Division) ने दोनों प्रक्रियाओं को अलग करने का आधिकारिक निर्णय ले लिया था।
फॉर्म-6 से हटाई गई घोषणा, लेकिन पूरी तरह समाप्त नहीं
नियमों के मुताबिक, नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए उपयोग किए जाने वाले ऑनलाइन आवेदन फॉर्म-6 में सेक्शन J और K के बीच जोड़ी गई वह विशेष घोषणा अब हटा दी गई है, जिसमें आवेदकों को अपने या अपने पूर्वजों के नाम 2000 के दशक की शुरुआत के SIR डेटाबेस में होने या न होने से जुड़े तीन विकल्पों में से किसी एक को चुनना अनिवार्य किया गया था। आयोग का कहना है कि इस घोषणा को फॉर्म-6 में केवल इसलिए शामिल किया गया था ताकि आवेदक को दो अलग-अलग ओटीपी (OTP) और ई-सिग्नेचर देने के बजाय केवल एक ही बार प्रक्रिया पूरी करनी पड़े। हालांकि इसे एक नेकनीयती वाला उद्देश्य बताया गया था, लेकिन तकनीकी प्लेटफॉर्म पर इसके प्रदर्शन को लेकर उठी चिंताओं के बाद इसे अब एक अलग दस्तावेज के रूप में उपलब्ध करा दिया गया है।
आयोग के कामकाज और आंतरिक व्यवस्था में बड़े सुधार
द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट और चुनाव आयुक्तों की टिप्पणियों के बाद निर्वाचन आयोग ने अपनी कार्यप्रणाली में कई महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं:
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बैठकों का एजेंडा और मिनट्स: अब आयोग की प्रत्येक बैठक से पहले उसका एजेंडा सभी सदस्यों को भेजा जाएगा और बैठक के बाद कार्यवाही का विस्तृत विवरण जारी किया जाएगा।
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विदेश यात्राओं पर नियम: अधिकारियों की किसी भी विदेश यात्रा के लिए अब निर्वाचन आयोग की औपचारिक मंजूरी को अनिवार्य कर दिया गया है।
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आईटी प्रणालियों की निगरानी: नए आईटी मॉड्यूल और पोर्टल पहले अधिकारियों की एक समिति के पास जाएंगे और फिर पूर्ण आयोग के समक्ष मंजूरी के लिए रखे जाएंगे।
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ECINet का विशेष ऑडिट: ECINet की कार्यप्रणाली और नियमों के अनुपालन की उच्च स्तरीय जांच के लिए आईआईटी बॉम्बे और आईआईएससी बेंगलुरु के स्वतंत्र विशेषज्ञों सहित एक वरिष्ठ समिति का गठन किया गया है।
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फील्ड अधिकारियों को अधिकार: सॉफ्टवेयर में बदलाव कर फील्ड स्तर पर काम करने वाले अधिकारियों (जैसे EROs और CEO) को तार्किक विसंगतियों और मामलों पर फैसला लेने के लिए अधिक विवेकाधिकार दिए गए हैं।
मतदाता पंजीकरण के लिए नए विशेष अभियान
इन प्रशासनिक और तकनीकी सुधारों के साथ-साथ निर्वाचन आयोग ने उन नागरिकों के लिए भी रास्ते आसान कर दिए हैं जिनके नाम ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से हट गए थे। आयोग ने निर्देश दिया है कि जिन राज्यों में SIR की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, वहां एक विशेष अभियान चलाया जाए ताकि छूटे हुए पात्र मतदाताओं के नाम सूची में दोबारा जोड़े जा सकें। इसके अलावा, 17 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (Special Summary Revision) का भी आदेश दिया गया है ताकि वर्ष 2027 में 18 वर्ष की आयु पूरी करने वाले युवा मतदाता आसानी से अपना पंजीकरण करा सकें।


















