
अमेरिका में मंगलवार, 3 नवंबर को मध्यावधि चुनाव के लिए वोटिंग हो रही है। इस चुनाव पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हैं, क्योंकि इसके नतीजे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की लोकप्रियता और उनकी सरकार के कामकाज को लेकर जनता के रुख का संकेत देंगे। मतदान शुरू होने से पहले ही करीब 5 करोड़ बैलेट पोस्ट किए जाने की जानकारी सामने आई है।
अमेरिका में मध्यावधि चुनाव को मिडटर्म इलेक्शन कहा जाता है। यह चुनाव राष्ट्रपति के चार साल के कार्यकाल के बीच यानी दो साल पूरे होने पर कराया जाता है। इसमें अमेरिकी संसद यानी कांग्रेस के दोनों सदनों- प्रतिनिधि सभा और सीनेट के सदस्यों का चुनाव होता है।
क्या है अमेरिकी कांग्रेस का चुनावी गणित?
अमेरिकी कांग्रेस के दो सदन हैं। पहला प्रतिनिधि सभा और दूसरा सीनेट। प्रतिनिधि सभा में कुल 435 सीटें हैं। इसके सभी सदस्यों का चुनाव हर दो साल में होता है। पिछला चुनाव नवंबर 2024 में हुआ था, जबकि इस बार फिर सभी 435 सीटों के लिए मतदान हो रहा है।
वहीं, अमेरिकी सीनेट में कुल 100 सीटें हैं। सीनेटर का कार्यकाल छह साल का होता है। इस वजह से हर दो साल में सीनेट की लगभग एक-तिहाई सीटों पर चुनाव कराया जाता है। इस बार करीब 35 सीटों पर मतदान हो रहा है।
मौजूदा आंकड़ों के अनुसार, प्रतिनिधि सभा में रिपब्लिकन पार्टी के 218 और डेमोक्रेटिक पार्टी के 214 सदस्य हैं। वहीं, सीनेट में रिपब्लिकन के 53 और डेमोक्रेटिक पार्टी के 45 सीनेटर हैं। ऐसे में इस चुनाव के नतीजे तय करेंगे कि दोनों सदनों में किस पार्टी की स्थिति मजबूत होती है।
ट्रंप की राष्ट्रपति की कुर्सी पर कितना असर पड़ेगा?
मध्यावधि चुनाव के नतीजों से राष्ट्रपति ट्रंप की कुर्सी पर सीधा असर नहीं पड़ेगा। अमेरिका में राष्ट्रपति का चुनाव अलग प्रक्रिया से होता है और उनका कार्यकाल चार साल का होता है। हालांकि, कांग्रेस में सत्ताधारी पार्टी का बहुमत होना राष्ट्रपति के लिए बड़े फैसले लागू कराने और विधेयक पास कराने में काफी अहम है।
अगर रिपब्लिकन पार्टी दोनों सदनों में अपना बहुमत बनाए रखती है, तो ट्रंप के लिए अपने एजेंडे को आगे बढ़ाना अपेक्षाकृत आसान हो सकता है। इसके उलट, अगर डेमोक्रेटिक पार्टी प्रतिनिधि सभा या सीनेट में बहुमत हासिल कर लेती है, तो सरकार के कई प्रस्तावों और विधेयकों को मंजूरी दिलाना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
कांग्रेस में विपक्ष की ताकत बढ़ने पर राष्ट्रपति प्रशासन के कामकाज की निगरानी और जांच-पड़ताल भी तेज हो सकती है।
मिडटर्म चुनाव में सत्ताधारी पार्टी का कैसा रहा है रिकॉर्ड?
अमेरिका में मध्यावधि चुनावों का इतिहास आमतौर पर सत्ताधारी राष्ट्रपति की पार्टी के लिए चुनौतीपूर्ण रहा है। कई चुनावों में राष्ट्रपति की पार्टी को सीटों का नुकसान उठाना पड़ा है। हालांकि, इसके कुछ अपवाद भी रहे हैं।
1998 में तत्कालीन राष्ट्रपति बिल क्लिंटन और 2002 में जॉर्ज डब्ल्यू बुश के कार्यकाल के दौरान उनकी पार्टी ने मध्यावधि चुनाव में बेहतर प्रदर्शन किया था। आम तौर पर मिडटर्म चुनाव को राष्ट्रपति के कार्यकाल के शुरुआती दो वर्षों के कामकाज पर जनता की प्रतिक्रिया के तौर पर देखा जाता है।
सर्वे में किस पार्टी को बढ़त?
चुनाव से पहले सामने आए कई सर्वेक्षणों में डेमोक्रेटिक पार्टी को रिपब्लिकन पार्टी के मुकाबले बेहतर स्थिति में दिखाया गया है। हालांकि, सर्वेक्षणों के अनुमान और वास्तविक चुनाव परिणाम अलग हो सकते हैं। अंतिम तस्वीर वोटों की गिनती के बाद ही साफ होगी।
इस चुनाव में अमेरिकी मतदाता ट्रंप प्रशासन की कई नीतियों पर अपनी राय जाहिर कर सकते हैं। इनमें ईरान के साथ तनाव, इजराइल को लेकर अमेरिकी नीति, रूस-यूक्रेन युद्ध, आयात शुल्क यानी टैरिफ और इमिग्रेशन से जुड़े फैसले शामिल हैं।
2028 के राष्ट्रपति चुनाव पर भी पड़ सकता है असर
मध्यावधि चुनाव के नतीजे सिर्फ मौजूदा सरकार के लिए ही अहम नहीं हैं, बल्कि इनका असर 2028 में होने वाले राष्ट्रपति चुनाव की राजनीतिक तैयारी पर भी पड़ सकता है।
अगर रिपब्लिकन पार्टी मजबूत प्रदर्शन करती है, तो इसे ट्रंप प्रशासन की नीतियों के समर्थन के संकेत के तौर पर देखा जा सकता है। वहीं, डेमोक्रेटिक पार्टी को बढ़त मिलने पर विपक्ष को सरकार की नीतियों पर सवाल उठाने और आगामी चुनावों के लिए अपनी रणनीति मजबूत करने का मौका मिल सकता है।
चुनाव के नतीजे 4 नवंबर से सामने आने शुरू हो सकते हैं। इनसे यह संकेत मिलेगा कि अमेरिकी जनता ट्रंप प्रशासन के पिछले दो वर्षों के कामकाज से कितनी संतुष्ट है और आने वाले समय में अमेरिकी कांग्रेस में किस पार्टी की भूमिका अधिक प्रभावशाली रहने वाली है।















