दिल्ली-एनसीआर (Delhi-NCR) की आबोहवा में हर साल की तरह इस बार भी प्रदूषण का जहर घुलना शुरू हो चुका है, लेकिन इस बार दिवाली से पहले ही हालात बेहद चिंताजनक मोड़ पर पहुंच गए हैं। राजधानी में लगातार बिगड़ते वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) के बीच अब एक चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। नासा (NASA) के सैटेलाइट आंकड़ों और ‘डॉन’ (Dawn) की एक विस्तृत रिपोर्ट के विश्लेषण से पता चला है कि अक्टूबर महीने में पड़ोसी देश पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में खेतों में पराली जलाने (Stubble Burning) की घटनाएं भारतीय पंजाब के मुकाबले चार गुना से भी अधिक दर्ज की गई हैं। उत्तर-पश्चिम दिशा से बहने वाली तेज हवाओं के कारण सीमा पार की पराली का यह जहरीला धुआं भारतीय सीमा को पार कर पंजाब, हरियाणा से होता हुआ सीधे दिल्ली-एनसीआर के वातावरण को गंभीर रूप से प्रदूषित कर रहा है।
सैटेलाइट तस्वीरों का खुलासा: पाकिस्तान में भारतीय पंजाब से 4.2 गुना ज्यादा जली पराली
नासा के ‘फायर इंफॉर्मेशन फॉर रिसोर्स मैनेजमेंट सिस्टम’ (FIRMS) द्वारा जारी आंकड़ों के विश्लेषण के अनुसार, 1 से 29 अक्टूबर के बीच पाकिस्तान के पंजाब में पराली में आग लगाने की कुल 13,241 घटनाएं दर्ज की गईं। इसके विपरीत, इसी समयावधि के दौरान भारतीय पंजाब में खेतों में आग की कुल 3,158 घटनाएं ही सामने आईं। यानी दोनों देशों के पंजाब के आंकड़ों में 4.2 गुना का एक बड़ा अंतर देखने को मिला है।
विशेष रूप से अक्टूबर के अंतिम सप्ताह (24 से 30 अक्टूबर) के बीच पाकिस्तान के पंजाब में लाहौर के आसपास धान उगाने वाले प्रमुख इलाकों में अचानक पराली जलाने की 6,655 घटनाएं हुईं, जो कि पूरे महीने के मामलों का लगभग आधा हैं। इस भयावह स्थिति का असर खुद पाकिस्तान पर भी दिखा, जहां 2 नवंबर को लाहौर शहर का AQI 500 के पार चले जाने के कारण वह दुनिया का सबसे प्रदूषित शहर बन गया।
2019 से 2025 तक बदला ट्रेंड: भारतीय पंजाब में 95% घटी पराली, पाकिस्तान में बढ़ी
पराली जलाने के पुराने रिकॉर्ड्स पर नजर डालें तो सालों पहले स्थिति इसके ठीक उलट थी। साल 2019 में भारतीय पंजाब में खेतों में आग लगाने के मामले पाकिस्तान से लगभग 5 गुना अधिक हुआ करते थे। लेकिन कड़े प्रशासनिक कदमों और जागरूकता के चलते 2021 से 2025 के बीच भारतीय पंजाब में पराली जलाने के मामलों में 95 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की गई है। वहीं दूसरी तरफ, पाकिस्तान के पंजाब में 2019 से 2025 के दौरान ऐसी पराली जलाने की घटनाओं में 33 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है।
हालांकि, पर्यावरण विशेषज्ञों का यह भी स्पष्ट मानना है कि दिल्ली के जहरीले स्मॉग के लिए पूरी तरह से पाकिस्तान को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता, क्योंकि दिल्ली के अपने स्थानीय वाहनों का उत्सर्जन, निर्माण गतिविधियों की धूल, औद्योगिक धुआं और भारतीय राज्यों की पराली भी इसमें बराबर की भागीदार है।
बारिश के बाद सुधरी थी दिल्ली की हवा, लेकिन फिर लागू करना पड़ा ‘GRAP-II’
अक्टूबर के अंत में हुई बेमौसम बारिश की वजह से दिल्लीवासियों को थोड़ी राहत जरूर मिली थी, जहां 30 अक्टूबर को AQI घटकर 60 तक आ गया था और पूरे अक्टूबर का औसत AQI 167 (पिछले 8 सालों में सबसे साफ) रहा था। लेकिन यह राहत ज्यादा दिनों तक नहीं टिक सकी। हवा की दिशा बदलते ही मंगलवार को दिल्ली का औसत AQI उछलकर 330 तक पहुंच गया, जबकि शहर के तीन से ज्यादा प्रमुख मॉनिटरिंग स्टेशनों पर AQI 400 के पार यानी ‘गंभीर’ (Severe) श्रेणी में दर्ज किया गया।
आमतौर पर दिल्ली में दिवाली के बाद ग्रैप के दूसरे चरण (GRAP-II) के प्रतिबंध लगाए जाते थे, लेकिन इस बार हालात बिगड़ने के कारण दिवाली से हफ्ता भर पहले ही प्रशासन को ग्रैप-2 लागू करना पड़ा है। इसके तहत सड़कों पर पानी का मशीनी छिड़काव, एंटी-स्मॉग गन का इस्तेमाल और निर्माण स्थलों की कड़ी निगरानी की जा रही है।
उत्तर-पश्चिमी हवाओं और कम तापमान के कारण दिल्ली पर स्मॉग का पहरा
मौसम विज्ञानियों के अनुसार, मौजूदा समय में चल रही उत्तर-पश्चिमी हवाएं अपने साथ पाकिस्तान और भारतीय पंजाब के धुएं को बहाकर दिल्ली की तरफ ला रही हैं। इसके साथ ही, हवा की धीमी गति और गिरते तापमान के कारण वायुमंडल में भारी प्रदूषक कण (PM 2.5 और PM 10) जमीन के करीब फंसकर रह जाते हैं और बाहर नहीं निकल पाते।
मौसम विभाग (IMD) के पूर्वानुमान के अनुसार, आने वाले दिनों में उत्तर-पश्चिमी हवाओं के जारी रहने और हवा की रफ्तार धीमी रहने से स्थिति और बिगड़ सकती है। ऐसे में दिल्ली-एनसीआर के सामने दोहरी चुनौती खड़ी हो गई है—एक तरफ जहां खेतों का धुआं और स्थानीय प्रदूषण हवा को जहरीला बना रहा है, वहीं दूसरी तरफ दिवाली पर अगर पटाखों का धुआं बढ़ा तो आने वाले दिनों में सांसों का यह संकट बेहद खतरनाक रूप ले सकता है।


















