अमेरिकी राजनीति में आए बड़े बदलाव और मिड-टर्म चुनावों में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को मिली हार ने पश्चिम एशिया के शक्ति संतुलन को पूरी तरह पलट कर रख दिया है। ईरान अब होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पर अपना पूर्ण नियंत्रण स्थापित करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। रणनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप पर लगी संवैधानिक पाबंदियों के कारण अब अमेरिका के लिए सैन्य ताकत के बल पर इस फ्री समुद्री मार्ग (Free Maritime Route) को पहले की तरह बहाल करा पाना लगभग असंभव हो गया है।
युद्ध के फैसले पर संवैधानिक बेड़ियां, क्या खत्म होगा ट्रंप का ‘ईरान मिशन’?
मिड-टर्म चुनावों में मिली शिकस्त के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का ‘ईरान मिशन’ पूरी तरह खटाई में पड़ता नजर आ रहा है। अमेरिकी संविधान के कड़े दायरों और राजनीतिक दबाव के कारण अब ट्रंप के लिए ईरान के खिलाफ किसी बड़े युद्ध या सैन्य कार्रवाई की मंजूरी लेना बेहद कठिन हो गया है। दूसरी ओर, ओमान और ईरान के बीच पहले ही एक रणनीतिक समझौता हो चुका है। ऐसे में यह लगभग तय माना जा रहा है कि अमेरिका अब होर्मुज से अपने कदम पीछे खींच सकता है और दुनिया के इस सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर तेहरान का एकतरफा प्रभुत्व स्थापित हो जाएगा।
होर्मुज में ईरान वसूलेगा भारी टोल, सुप्रीम लीडर की सख्त चेतावनी
ईरान के सुप्रीम लीडर मुज्तबा खामेनेई और उनके प्रशासन ने यह साफ कर दिया है कि होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों से अब फीस (टोल टैक्स) वसूली जाएगी। सुप्रीम लीडर के वरिष्ठ सलाहकार मोहसेन रेजाई ने दोटूक चेतावनी देते हुए कहा है कि ईरान के तय रास्तों के अलावा किसी भी गैर-कानूनी रूट को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यदि अमेरिका अपने युद्धपोत भी इस इलाके में उतारता है, तो ईरानी सेना उन्हें भी सीधा निशाना बनाएगी।
समुद्री माइंस का खौफनाक जाल, 9 दिनों में 11 तेल टैंकरों में धमाका
होर्मुज जलडमरूमध्य में इस समय ईरानी नौसेना और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) का खौफ साफ देखने को मिल रहा है। ईरान ने केश्म द्वीप (Qeshm Island) के पास ओमान वाले समुद्री मार्ग पर नई समुद्री माइंस (Naval Mines) बिछा दी हैं। ट्रांसपॉन्डर और रडार बंद करके गुजरने की कोशिश कर रहे अंतरराष्ट्रीय तेल टैंकर इन खतरनाक माइंस की चपेट में आ रहे हैं। पिछले 9 दिनों में ही 11 तेल टैंकर धमाकों के बाद आग की लपटों में घिर चुके हैं। इसके अलावा ईरानी सेना की स्पीड बोट्स और गुरिल्ला वॉरफेयर तकनीक (जैसे लिम्पेट माइंस और वॉटर ड्रोन्स) ने सुरक्षा तंत्र को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया है।
अमेरिकी वायुसेना को भारी नुकसान: 55 MQ-9 रीपर ड्रोन नष्ट, तकनीक हैक होने का खतरा
ईरान ने न केवल समुद्र बल्कि आसमान में भी अमेरिका की चुनौती को पस्त कर दिया है। होर्मुज के पास ईरान ने अपना एयर डिफेंस और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम बेहद मजबूत कर लिया है। हाल के दिनों में अमेरिका के 4 जासूसी ड्रोन्स को ईरान ने हैक करके सुरक्षित रूप से जमीन पर उतार लिया, जिससे अमेरिकी तकनीक के लीक होने का खतरा बढ़ गया है। खबर है कि ईरान अब तक अमेरिका के कुल 55 ‘MQ-9 रीपर’ (MQ-9 Reaper) ड्रोन्स को मार गिरा चुका है। यही नहीं, ईरान अब रॉकेट की मदद से हवा से ही समुद्र में सैकड़ों माइंस गिराने की नई तकनीक पर भी काम कर रहा है।
भारत, चीन और कतर को मिलेगी विशेष छूट, बाकी दुनिया चुकाएगी मोटी कीमत
होर्मुज जलडमरूमध्य में फीस वसूली की इस नई व्यवस्था में ईरान ने अपने दोस्त देशों के लिए राहत का रास्ता खुला रखा है। ईरान और ओमान के बीच बने इस नए प्लान के तहत भारत, चीन, इराक और कतर के जहाजों को विशेष छूट मिलेगी। इन मित्र राष्ट्रों के जहाजों पर कोई प्रतिबंध लागू नहीं होगा और वे बिना किसी रुकावट के होर्मुज से गुजर सकेंगे। हालांकि, अमेरिका और पश्चिमी देशों के जहाजों को इस वैश्विक व्यापार मार्ग का इस्तेमाल करने के लिए भारी-भरकम फीस चुकानी होगी।
















