
लखनऊ । शहीद सीओ देवेन्द्र मिश्रा की शिकायत पत्र के मामले की जांच रिपोर्ट बुधवार को लखनऊ जोन की आईजी लक्ष्मी सिंह शासन को सौंप सकती हैं। सूत्रों की मानें तो बिल्हौर सीओ कार्यालय की गहन जांच और कई घंटों तक पुलिसकर्मियों से हुई पूछताछ के बाद आईजी ने अपनी रिपोर्ट तैयार कर ली है। हालांकि अभी इस पर कोई अधिकारिक बयान नहीं आया है।
दरअसल, कानपुर के बिकरु गांव कांड के मुख्य अरोपित विकास दुबे की तलाश में पुलिस जैसे-जैसे अपनी जांच आगे बढ़ा रही है। वैसे-वैसे पुलिस कर्मियों द्वारा मोस्ट वांटेड विकास दुबे के मददगारों की तादाद बढ़ती जा रही है। 100 से अधिक पुलिसकर्मी शक के घेरे में हैं।
इस बीच शहीद क्षेत्राधिकारी देवेंद्र मिश्रा के शिकायती पत्र के मामले की जांच को कानपुर जोन के एडीजी से लेकर लखनऊ जोन की आईजी लक्ष्मी सिंह को सौंपी थी। मंगलवार की सुबह कानपुर पहुंचकर आईजी ने सीओ बिल्हौर कार्यालय में खंगाला और कई घंटों तक एक बंद कमरे में पुलिस कर्मियों से पूछताछ की। पुलिस विभाग के सूत्रों की मानें तो सीओ के शिकायती पत्र को लेकर जांच पूरी कर ली गयी है और इसकी रिपोर्ट आईजी लक्ष्मी सिंह आज शासन को सौंप सकती हैं।
चार माह पहले लिखा था सीओ ने पत्र
कानपुर विकरु कांड से पहले शहीद सीओ देवेंद्र मिश्रा ने चार महीने पहले 13 मार्च, 2020 को पत्र लिखा था। खत उन्होंने कानपुर के तत्कालीन एसएसपी अनंत देव को लिखा था। इस पत्र में शहीद देवेंद्र मिश्र ने लिखा है कि विकास दुबे पर करीब 150 संगीन मुकदमे दर्ज हैं। 13 मार्च को इसी विकास दुबे के खिलाफ चौबेपुर थाना में एक मुकदमा दर्ज हुआ था, जो आईपीसी की धारा 386 के तहत दर्ज हुआ था। मामला एक्सटार्शन का था। इसमें दस साल तक की सजा का प्रावधान है और ये एक गैर जमानती अपराध है।
शहीद सीओ देवेंद्र मिश्र ने पत्र में आगे लिखा है कि गैर जमानती अपराध होने के बावजूद जब चौबीस घंटे तक विकास दुबे के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई और उसे गिरफ्तार नहीं किया गया तो 14 मार्च को उन्होंने केस का अपडेट पूछा। इस पर उन्हें पता चला कि चौबेपुर के थानाध्यक्ष विनय कुमार तिवारी ने एफआईआर से 386 की धारा हटा कर पुरानी रंजिश की मामूली धारा लगा दी है। इसको लेकर सीओ ने विकास दुबे और विनय तिवारी के गहरे सम्पर्क होने की बात कही थी।
इसी शिकायती पत्र के सामने आने के बाद पूरे मामले की जांच कानपुर जोन के एडीजी को दी गई थी। इस संबंध में एसएसपी दिनेश कुमार पी ने कहा था कि रिकॉर्ड में यह शिकायती पत्र उपलब्ध नहीं है। अब इस पूरे मामले की जांच लखनऊ जोन की आईजी लक्ष्मी सिंह कर रही हैं।










