मायावती की शर्त पर आकाश आनंद के ससुर अशोक सिद्धार्थ का राजनीति से संन्यास: एक्स पर लिखा- ‘बहन जी के लिए जान भी दे सकता हूं’

नई दिल्ली। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) में चल रही अंदरूनी हलचल के बीच बड़ा सियासी मोड़ आ गया है। पार्टी सुप्रीमो मायावती द्वारा रखी गई शर्त के महज 24 घंटे के भीतर पूर्व राज्यसभा सांसद और आकाश आनंद के ससुर अशोक सिद्धार्थ ने सक्रिय राजनीति और सामाजिक जीवन से पूरी तरह संन्यास का ऐलान कर दिया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (ट्विटर) पर एक भावुक और विस्तृत पत्र जारी कर उन्होंने कहा कि ‘बहन जी’ का आदेश उनके लिए दुनिया की हर चीज से बढ़कर है और बहुजन मिशन के लिए अगर जान भी देनी पड़े तो यह उनके लिए गर्व की बात होगी।

मायावती ने रखी थी राजनीति से संन्यास की शर्त दरअसल, बुधवार को बसपा अध्यक्ष मायावती ने स्पष्ट शब्दों में कहा था कि जब तक अशोक सिद्धार्थ राजनीति में सक्रिय रहेंगे, तब तक आकाश आनंद पूरी स्वतंत्रता से काम नहीं कर पाएंगे। मायावती ने शर्त रखी थी कि अगर अशोक सिद्धार्थ राजनीति से पूरी तरह संन्यास ले लेते हैं, तभी आकाश आनंद को पार्टी में फिर से जिम्मेदारियां वापस सौंपने पर विचार किया जाएगा। इस बयान के बाद अशोक सिद्धार्थ ने बिना कोई देरी किए तुरंत संन्यास लेने की घोषणा कर दी।

‘आकाश की वापसी से न जोड़ा जाए मेरा फैसला’ सोशल मीडिया पर लिखे अपने पत्र में अशोक सिद्धार्थ ने कहा, “मुझ पर पार्टी पर कब्जा करने और आकाश आनंद को गुमराह करने के झूठे आरोप लगाए जा रहे हैं, जो विरोधियों की साजिश है। मैं पिछले 35 सालों से मान्यवर कांशीराम जी और बाबा साहेब के मिशन के लिए समर्पित रहा हूं। बहन जी ने ही मुझे एमएलसी और राज्यसभा सांसद बनाया।” उन्होंने मायावती से अपील करते हुए लिखा कि उनके संन्यास को आकाश की वापसी से न जोड़ा जाए; आकाश बहन जी के भतीजे हैं और उन्हें जिम्मेदारी देना या न देना पूरी तरह से मायावती का ही फैसला है।

पारिवारिक रिश्तों से ऊपर पार्टी और बहन जी का आदेश अशोक सिद्धार्थ ने पत्र में आगे लिखा कि बहन जी के आदेश के आगे उनके रिश्ते, परिवार और व्यक्तिगत जीवन सब कुछ छोटे हैं। उन्होंने लिखा, “आप त्याग और दया की प्रतिमूर्ति हैं। अगर मेरे राजनीतिक-सामाजिक जीवन में रहने से बहुजन मिशन को जरा सा भी नुकसान पहुंचता है, तो मैं तुरंत प्रभाव से राजनीति और सामाजिक जीवन त्याग रहा हूं।”

आकाश आनंद की मुख्यधारा में वापसी तय माना जा रहा राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि अशोक सिद्धार्थ द्वारा मायावती की शर्त को तत्काल स्वीकार किए जाने के बाद अब आकाश आनंद का बसपा में पुनरुद्धार तय माना जा रहा है। ससुर के राजनीति छोड़ने के बाद अब मायावती द्वारा आकाश आनंद को दोबारा नेशनल को-ऑर्डिनेटर या पार्टी में कोई अन्य बड़ा पद सौंपने का मार्ग निष्कंटक हो गया है।

 

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