
नई दिल्ली। चिप्स, कोल्ड ड्रिंक्स, समोसे, बर्गर और चॉकलेट जैसे जंक फूड्स बच्चों की पसंदीदा खाने-पीने की चीजें हैं, यही वजह है कि स्कूल की छुट्टी होते ही बच्चे अक्सर कैंटीन या आसपास की दुकानों का रुख करते हैं। लेकिन अब स्कूलों के आसपास इन चीजों की आसान उपलब्धता पर जल्द ही पूर्ण विराम लग सकता है। केंद्र सरकार और भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) स्कूलों के 50 मीटर के दायरे में जंक फूड की बिक्री पर प्रतिबंध लगाने के प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं।
50 मीटर के दायरे में जंक फूड पर रोक की तैयारी
FSSAI के 2026 के नए मसौदे के तहत स्कूलों के 50 मीटर के दायरे में हाई फैट, हाई शुगर और हाई सॉल्ट (HFSS) वाले खाद्य पदार्थों की बिक्री पर पूरी तरह से रोक लगाने की योजना है।
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इन उत्पादों पर लगेगा बैन: चिप्स, नमकीन स्नैक्स, कोल्ड ड्रिंक, मीठे पेय, बर्गर, पिज्जा, नूडल्स और अन्य पैकेज्ड जंक फूड्स।
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विक्रेताओं पर नियम: स्कूलों के आसपास स्थित दुकानों, ठेलों और किराना दुकानों पर HFSS श्रेणी में आने वाले उत्पाद बेचने पर रोक रहेगी। हालांकि, वे स्वस्थ और पौष्टिक खाद्य पदार्थ बेचना जारी रख सकते हैं।
भारत में तेजी से बढ़ रहा है बच्चों में मोटापा
यह सख्त कदम देश में बच्चों और किशोरों में तेजी से बढ़ रहे मोटापे को नियंत्रित करने के उद्देश्य से उठाया जा रहा है। विश्व मोटापा महासंघ के आंकड़ों के अनुसार:
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2015: भारत में 5 से 19 वर्ष की आयु के मोटापे से ग्रस्त बच्चों की संख्या लगभग 2.8 करोड़ थी।
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2025: यह संख्या बढ़कर करीब 4.1 करोड़ हो चुकी है।
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2040 का अनुमान: यदि खान-पान की आदतें नहीं सुधरीं, तो यह आंकड़ा बढ़कर 5.6 करोड़ तक पहुंच सकता है।
छोटे खुदरा विक्रेताओं और कंपनियों पर पड़ेगा असर
FSSAI के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) राजित पुनहानी के अनुसार, इस कदम का मुख्य उद्देश्य बच्चों में कम उम्र से ही संतुलित और स्वस्थ खान-पान की आदत डालना है। साथ ही, इससे खाद्य कंपनियां अपने उत्पादों में इस्तेमाल होने वाली चीनी, नमक और वसा की मात्रा को घटाने के लिए प्रेरित होंगी।
हालांकि, इस नीति के लागू होने से स्कूलों के आसपास स्थित छोटी किराना दुकानों, रेस्तरां और स्ट्रीट वेंडर्स की आय पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। चिली जैसे कई अन्य देशों में भी अस्वास्थ्यकर खाद्य पदार्थों को नियंत्रित करने के लिए इसी तरह के कड़े कानून लागू किए जा चुके हैं।















