Banda : पूर्व चेयरमैन के भतीजे समेत नौ साइबर ठग गिरफ्तार, हजारों की नकदी व उपकरण बरामद

  • फर्जी फर्म के नाम पर बैंक खाता खुलवाकर मंगाए जाते थे रुपए
  • संयुक्त पुलिस टीम को एसपी ने 20 हजार रुपए का दिया पुरस्कार
Banda : साइबर क्राइम थाना, कोतवाली नगर और एसओजी की संयुक्त टीम ने साइबर अपराध के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए संगठित साइबर ठगी गिरोह का पर्दाफाश करते हुए नौ साइबर ठगों को गिरफ्तार कर लिया। पकड़े गए अभियुक्तों में नगर पालिका के पूर्व चेयरमैन का भतीजा भी शामिल बताया जाता है। साइबर ठगों के पास से 52,475 रुपये नगद, बोलेरो, लैपटॉप और छह एटीएम कार्ड सहित कई डिजिटल उपकरण बरामद किए गए। बताया गया है साइबर ठग फर्जी फर्मों के नाम पर बैंक खाता खुलवाकर रुपए मंगवाने का काम करते थे। जनपद में अपराध व अपराधियों पर नियंत्रण लगाने और वांछित अभियुक्तों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस लगातार अभियान चला रही है। साइबर क्राइम थाना पुलिस को एक संदिग्ध बैंक खाते की सूचना मिली। इसमें साइबर ठगी से मिले रुपये जमा किए जा रहे थे। जांच के दौरान 11/12 जुलाई की रात मवई बाइपास से पुलिस ने संदिग्ध साइबर ठग नरैनी कोतवाली क्षेत्र के जवाहर नगर निवासी प्रेम प्रकाश पुत्र भैरम प्रसाद को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की। उसने अपने गिरोह और अन्य साथियों के बारे में पुलिस को जानकारी दी। साइबर क्राइम थाना, कोतवाली नगर और एसओजी की संयुक्त टीम ने बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे के नीचे घेराबंदी कर बोलेरो सवार शहर कोतवाली क्षेत्र के डिग्गी चौराहा निवासी पूर्व नगर पालिका चेयरमैन के भतीजे कृष्णा पुत्र महेश साहू समेत बिजलीखेड़ा निवासी सूरज पुत्र सुरेश, किरन कालेज चौराहा निवासी समीर पुत्र सुनील कुमार, जरैली कोठी निवासी अभिषेक पुत्र राजू, कंचनपुरवा निवासी जीतू पुत्र राजेश, पल्हरी निवासी योगेश पुत्र चुनबाद, कनवारा निवासी सुशील कुमार पुत्र श्रीराम गोपाल और मटौंध थाना क्षेत्र के बसहरी गांव निवासी मुकेश कुमार पुत्र नत्थू को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में खुलासा हुआ कि आरोपी एपीके फाइल और अन्य एप्लिकेशन के माध्यम से लोगों के मोबाइल फोन हैक कर साइबर ठगी करते थे। वह लोगों को झांसा देकर उनके आधार कार्ड, पैन कार्ड और अन्य दस्तावेज हासिल करते थे। इन दस्तावेजों का उपयोग कर फर्जी फर्मों और कंपनियों के नाम पर बैंक खाते खुलवाए जाते थे। ठगी की रकम इन्हीं खातों में मंगाकर बाद में उसे विभिन्न खातों में ट्रांसफर कर नकद निकाला जाता था। पुलिस के मुताबिक आरोपी अपनी पहचान छिपाने के लिए फर्जी सिम कार्ड का भी इस्तेमाल करते थे। शिकायत दर्ज होने पर वह मोबाइल, सिम और अन्य डिजिटल साक्ष्यों को नष्ट कर देते थे ताकि उनका पता न चल सके। फिलहाल पुलिस गिरोह के अन्य सदस्यों, फर्जी बैंक खातों, सिम उपलब्ध कराने वालों और साइबर ठगी से जुड़े पूरे नेटवर्क की गहन जांच कर रही है। बरामद मोबाइल फोन, लैपटॉप और अन्य डिजिटल उपकरणों की फॉरेंसिक जांच भी कराई जा रही है, जिससे गिरोह द्वारा की गई अन्य साइबर ठगी की वारदातों का खुलासा हो सके। साइबर क्राइम थाना में पकड़े गए ठगों के विरुद्ध आईटी एक्ट की रिपोर्ट दर्ज करने के बाद सभी को जेल भेज दिया गया। साइबर ठगी के संगठित गिरोह का पर्दाफाश करने वाली पुलिस की संयुक्त टीम की सराहना करते हुए पुलिस अधीक्षक ने 20 हजार रुपए के पुरस्कार से सम्मानित किया।

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