बरेली: ग्लोबल वार्मिंग पृथ्वी पर विनाशकारी खतरा  


बरेली। पृथ्वी दिवस पर बरेली के होटल में आयोजित सम्मेलन में विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों ने ग्लोबल वार्मिंग पृथ्वी पर विनाशकारी खतरा होने पर अपने अपने विचार व्यक्त किये। सेमिनार के उद्घाटन सत्र और चार सत्रों की समूह चर्चा में विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों ने जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वार्मिंग के भयावह और विनाशकारी खतरों के प्रति गंभीर चिंता जताई और जल, जंगल, जमीन तथा पर्यावरण की रक्षा की खातिर सरकार, स्वयंसेवी संगठनों और खासकर मीडिया कर्मियों की ईमानदार भागीदारी सुनिश्चित करने का पुरजोर आह्वान किया।

सेमिनार का उद्घाटन वरिष्ठ आईएएस सिंचाई विभाग में विशेष सचिव और शारदा सहायक समादेश के अध्यक्ष/निदेशक डॉ. हीरालाल ने रायबरेली से आईं अर्जुन पुरस्कार विजेता, ओलंपियन, पद्मश्री सुधा सिंह, प्रो. गीता गांधी और कई अन्य हस्तियों के साथ दीप जलाकर शुभारम्भ किया। सभी मंचासीन अतिथियों को जूट के थैले और पौधे भी भेंट किए गए। उद्घाटन सत्र में चर्चित ओलंपिक तालिका सुधा सिंह ने कहा कि हम खिलाड़ियों को अपना स्टेमिना बढ़ाने और प्रैक्टिस के बाद खुद को ताजादम-मजबूत बनाए रखने के लिए बरेली जैसे प्रदूषित शहरों को भी ऊटी की तर्ज पर पेड़-पौधों की हरियाली से मालामाल करना निहायत ही जरूरी है।

सिटी मांटेसरी स्कूल सोसाइटी की अध्यक्ष-प्रबंधक प्रो़. गीता गांधी ने अपने वक्तव्य और वीडियो प्रजेंटेशन के जरिये समझाया कि जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वार्मिंग पृथ्वी पर जीवन और मानव के अस्तित्व पर कितना भयंकर और विनाशकारी खतरा बनकर मंडरा रहे  हैं। पर्यावरण रक्षा के प्रति जन चेतना जगाकर इस बड़ी लड़ाई में सबकी भागीदारी सुनिश्चित करने के महा अभियान में मीडिया कर्मियों को आज और अभी से महत्वपूर्ण भूमिका निभानी ही होगी। तभी हम खुद को और अपनी भावी पीढ़ियों को सुरक्षित जीवन और भविष्य दे पाएंगे। चेताया-अभी नहीं चेते तो ग्लोबल वार्मिंग की वजह से दक्षिण एशिया में अगले 25 वर्षों में 80 करोड़ से भी ज्यादा लोगों का जीवन गहरे संकट में फंस जाएगी।

अतिरिक्त आयुक्त ग्रेटर शारदा डॉ. राजीव यादव ने कहा कि सिर्फ भारत में ही हर साल 35 लाख टन प्लास्टिक कचरे के पहाड़ बन रहे हैं। पिछले कुछ वर्षों में 3.84 लाख हेक्टेयर जंगल गायब हो चुके हैं। माइक्रो प्लास्टिक कचरा धीमे जहर की तरह मानव शरीर में घुसकर जानलेवा हार्ट अटैक, पैरालिसिस और अन्य जानलेवा बीमारियों का मुख्य कारण बन रहा है।

स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण यूपी के एमडी राजकुमार ने सुझाव दिया कि प्लास्टिक की जगह थर्मस या कांच की बोतलों में पानी परोसा जाय। साफ किया कि पर्यावरण खुद को बचाने के लिए मनुष्यों को मारने पर भी उतर आया है। यही वजह है कि जानलेवा प्रोस्टेंट कैंसर के केसों में पिछले 10 साल में 20 से 30 फीसदी तक का भारी उछाल आया है। आज हम नहीं सुधरे तो कल प्रकृति अपना विनाशकारी रूप दिखाकर खुद ही हमें सुधार देगी।

वरिष्ठ आईएएस डॉ. हीरालाल ने कहा कि पृथ्वी मां गंभीर बीमार है और हम सब बेफिक्र हैं। स्वार्थ और गलत आदतों की वजह से हमने धरती मां पर बहुत जुल्म किए हैं। उन्होंने जलवायु परिवर्तन के खिलाफ हल्ला बोल का आह्वान करते हुए समझाया कि प्लास्टिक जल, जंगल, जमीन, समुद्र-सबका दुश्मन है। पानी बचाने, पेड़-पौधे लगाने और प्लास्टिक को भगाने का मंत्र भी दिया।

समूह चर्चा के पहले सत्र में डॉक्टर हीरालाल ने पृथ्वी ग्रह और प्लास्टिक विषय पर पक्ष रखते हुए पानी बचाने, पौधे लगाने और उनकी हिफाजत करने और प्लास्टिक भगाने के लिए अपने और समाज के अंदर जुनून पैदा करने की भी पत्रकारों समेत सभी से भावपूर्ण अपील की। पद्मश्री से सम्मानित प्रगतिशील कृषक राम सरन वर्मा (बाराबंकी) ने भूगर्भीय जल स्रोतों को बचाने, उर्वरकों के संतुलित प्रयोग पर जोर दिया।

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