बस्ती। उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले में निर्वाचन आयोग की पारदर्शी चुनाव व्यवस्था और मतदाता सूची की शुद्धता पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। जिले में चल रहे विशेष मतदाता पुनरीक्षण अभियान के दौरान चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं, जहां एक ही व्यक्ति का नाम दो से तीन अलग-अलग जगहों पर दर्ज पाया गया है। सबसे हैरानी की बात यह है कि कुछ मामलों में नाम, पता और फोटो बिल्कुल एक जैसे हैं, लेकिन उनके वोटर आईडी कार्ड यानी EPIC नंबर अलग-अलग हैं। इस बड़ी गड़बड़ी के सामने आने के बाद जिला प्रशासन और निर्वाचन विभाग में हड़कंप मच गया है।
खैर कॉलेज मतदान केंद्र पर उमड़ी भीड़, सामने आए गजब के मामले
बस्ती शहर के खैर कॉलेज स्थित मतदान केंद्र पर जब लोग अपनी शिकायतें लेकर पहुंचे, तो एक के बाद एक कई अजीबोगरीब मामले उजागर हुए। खैर कॉलेज पहुंचीं आशिया खातून ने शिकायत दर्ज कराई कि मतदाता सूची में उनका नाम तीन अलग-अलग स्थानों पर दर्ज है। तीनों ही सूचियों में उनकी फोटो एक जैसी है, लेकिन तीनों के EPIC नंबर बिल्कुल अलग हैं।
इसी तरह, गुड़िया नाम की महिला का नाम भी दो जगहों पर मिला, जिसमें फोटो और EPIC नंबर अलग-अलग थे, जबकि उनके पति राकेश का नाम और पता दोनों प्रविष्टियों में समान पाया गया। इसके अलावा तुर्कहिया निवासी कुसुम देवी और अदीबा वहीद के मामलों में भी एक ही नाम और समान फोटो के बावजूद अलग-अलग EPIC नंबर होने की पुष्टि हुई है।
7 हजार नाम संदिग्ध, 152 दोहरी प्रविष्टियां चिह्नित: निर्वाचन विभाग
मामले की गंभीरता को देखते हुए बस्ती जिला निर्वाचन कार्यालय के कर्मचारी पीयूष गुप्ता ने जानकारी दी है कि फिलहाल लगभग 7 हजार नामों को ‘संदिग्ध’ (Suspected) श्रेणी में रखा गया है, जिनकी गहनता से जांच की जा रही है। जो नाम और प्रविष्टियां दोहरी (Double) पाई जा रही हैं, उन्हें नियमानुसार वोटर लिस्ट से डिलीट करने की कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
वहीं, एडीएम ज्ञान चंद्र गुप्ता ने इस मामले पर स्पष्ट किया कि अभी तक जांच के दौरान कुल 152 दोहरी प्रविष्टियां (Double Entries) सामने आई हैं। प्रशासन इन सभी मामलों की बारीकी से जांच करा रहा है और जिनका नाम सूची में दो बार दर्ज पाया जाएगा, उनके नाम तत्काल हटाए जाएंगे।
डेटा एंट्री की गलती या सत्यापन में लापरवाही? उठ रहे बड़े सवाल
विशेष अभियान के दौरान सामने आए इन मामलों ने मतदाता सूची के सत्यापन और उसकी शुद्धता की पोल खोल दी है। हालांकि, जानकारों का मानना है कि एक ही नाम या फोटो के साथ अलग-अलग EPIC नंबर मिलने मात्र से यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि किसी ने फर्जी तरीके से दो बार मतदान किया है, क्योंकि यह तकनीकी गड़बड़ी या डेटा एंट्री ऑपरेटर्स की लापरवाही का नतीजा भी हो सकता है। बावजूद इसके, निर्वाचन अधिकारियों के लिए यह एक गंभीर जांच का विषय बन गया है।
लोकतंत्र में त्रुटिरहित मतदाता सूची निष्पक्ष चुनाव की सबसे बड़ी बुनियाद मानी जाती है। ऐसे में बस्ती प्रशासन के सामने चुनौती है कि वह विशेष अभियान के तहत मिल रही शिकायतों का त्वरित सत्यापन करे, ताकि किसी भी पात्र मतदाता का नाम कटे बिना फर्जी और दोहरी प्रविष्टियों को पूरी तरह से साफ किया जा सके।















