उपचुनाव: यूपी की इस सीट पर जाति की राजनीति तेज, क्षत्रिय वोट पर सपा-भाजपा की निगाहें

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घोसी विधानसभा सीट पर हो रहे उपचुनाव में 21 तारीख को मतदान होना है। जैसे-जैसे चुनाव की तारीख नजदीक आ जा रही है, वैसे-वैसे चुनावी प्रचार में नेताओं की जुबानी जंग तेज हो गयी है। पूर्व प्रधानमन्त्री स्व. चन्द्रशेखर के बेटे और भाजपा से राज्यसभा सांसद नीरज शेखर ने समाजवादी पार्टी के मुखिया पर आरोप लगाये कि सपा में क्षत्रियों का सम्मान नहीं होता है। इसका ताजा उदाहरण यह है कि घोसी विधानसभा सीट पर सपा ने सुधाकर सिंह को अपना प्रत्याशी बनाया लेकिन उनके सिम्बल वाले पार्टी पत्र पर दस्तखत नहीं किये गए जिससे उनका नामांकन पत्न खारिज हो गया। दूसरी तरफ समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता राजीव राय ने नीरज शेखर के बयान पर पलटवार करते हुए कहा कि चन्द्रशेखर जी समाजवादी थे और नीरज शेखर अवसरवादी है। नीरज शेखर एक बंगले के लिए बीजेपी के कदमों में जा गिरे हैं।

नेताओं की जुबानी जंग तेज

घोसी विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव में नेताओं की जुबानी जंग तेज हो चुकी है जिससे उपचुनाव काफी दिलचस्प हो गया है। भाजपा से राज्यसभा सांसद नीरज शेखर ने चुनाव प्रचार के दौरान कहा कि समाजवादी पार्टी में क्षत्रियों का सम्मान नहीं होता है जिसका ताजा उदाहरण यहां से निर्दल चुनाव लड़ रहे सुधाकर सिंह हैं। कुछ इसी तरह से लोकसभा चुनाव के दौरान उनके साथ भी हुआ था। अगर समाजवादी पार्टी में क्षत्रियों का सम्मान होता तो केवल सुधाकर सिंह के पार्टी सिम्बल वाले पेपर पर दस्तखत क्यों नहीं किये गए?

सपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव राय ने कहा

राज्यसभा सांसद नीरज शेखर के बयान पर पलटवार करते हुए सपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव राय ने कहा कि नीरज शेखर को यह ध्यान रखना चाहिए कि वह किसके बेटे हैं। चन्द्रशेखर जी जैसे लोग सदियों में एक पैदा होते हैं। चन्द्रशेखर जी समाजवादी थे और नीरज शेखर अवसरवादी है। नीरज शेखर मात्र एक बंगले के लिए भाजपा के कदमों में जाकर गिर गये। चन्द्रशेखर जी ने मात्र छोटी से बात के लिए पीएम तक कुर्सी छोड़ दी थी। सपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव राय ने कहा कि इनके पिता ने तो इनको ग्राम प्रधान लायक भी नहीं समझा था। जब उनका स्वर्गवास हुआ तो ये सड़क पर आ गये थे लेकिन अखिलेश यादव ने उनको सड़क से उठाकर संसद तक पहुंचा दिया। अभी तो नीरज शेखर का कार्यकाल बाकी था लेकिन उनको सिर्फ एक बंगले की चिन्ता थी, इसलिए वह भाजपा के कदमों में जा गिरे तो ऐसे अवसरवादी लोगों के बारे में क्या कहा जाए।

इस सीट पर जातिगत आंकड़ा देखा जाये

तो मुस्लिम वोटर 60 हजार, यादव 40 हजार, अनुसूचित जाति 20 हजार, राजभर 45 हजार, चौहान 35 हजार, कुर्मी 4 हजार, सवर्ण 40 हजार, निषाद 15 हजार, मौर्य़ा 12 हजार, भूमिहार 15 हजार और पिछड़े मतदाताओं की संख्या 20 हजार है। इसलिए सभी उम्मीदवार जातियों के वोट बैंक के आधार पर मतदाताओं को लुभाने में लगे हैं।

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