
नई दिल्ली। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के नतीजों को लेकर कहा है कि मतदाता सूची से नाम हटाना गलत था, लेकिन यह कहना सही नहीं होगा कि विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के कारण ही तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) की जीत और डीएमके की हार हुई। उन्होंने कहा कि विपक्षी दल को वोटों में कथित हेरफेर के पैमाने से जुड़े अपने दावों को साबित करना होगा।
चिदंबरम ने कहा कि चुनाव आयोग की ओर से जिन मतदाताओं के नाम हटाए गए, उनके नाम मतदाता सूची में शामिल किए जाने चाहिए थे। हालांकि, उन्होंने कहा कि उन्हें ऐसा नहीं लगता कि केवल इसी वजह से TVK चुनाव जीती और DMK को हार का सामना करना पड़ा।
चिदंबरम ने यह बयान तमिलनाडु के शिवगंगा जिले के कराईकुडी में दिया। इसी दौरान उन्होंने चुनाव आयोग के खिलाफ विरोध प्रदर्शन में भी हिस्सा लिया। कांग्रेस की ओर से मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ देश के कई हिस्सों में प्रदर्शन किए जा रहे हैं।
ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और गिरफ्तारी की मांग दोहराई
पी. चिदंबरम ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी की ओर से पहले उठाई गई मांग को भी दोहराया। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे, उनके खिलाफ FIR दर्ज करने और गिरफ्तारी की मांग की।
हालांकि, तमिलनाडु में दोबारा चुनाव कराने की संभावना को चिदंबरम ने खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि संविधान पूरे हो चुके चुनावों में दोबारा चुनाव कराने की अनुमति नहीं देता।
चिदंबरम ने कहा कि मौजूदा स्थिति में सुधार के लिए कुछ कदम उठाए जाने चाहिए। उन्होंने दूसरे राज्यों में SIR को तत्काल रोकने, कथित तौर पर हटाए गए मतदाताओं के नाम फिर से मतदाता सूची में शामिल करने और सामान्य वार्षिक पुनरीक्षण व्यवस्था को दोबारा लागू करने की मांग रखी।
20 राज्यों में 13.3 करोड़ नाम हटाने का दावा
चिदंबरम ने दावा किया कि 20 राज्यों में करीब 13.3 करोड़ मतदाताओं के नाम कथित तौर पर हटाए गए हैं। उन्होंने विशेष रूप से बिहार, महाराष्ट्र, हरियाणा और पश्चिम बंगाल का उल्लेख करते हुए इन नामों को फिर से मतदाता सूची में शामिल करने की मांग की।
उन्होंने कहा कि SIR को दूसरे राज्यों में तुरंत रोका जाना चाहिए और जिन लोगों को कथित तौर पर वोट देने के अधिकार से वंचित किया गया है, उन्हें राहत देने के उपाय तलाशे जाने चाहिए।
‘SIR को तुरंत रोकना चाहिए’
चिदंबरम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर भी SIR को लेकर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि लोगों में चुनाव आयोग के प्रति काफी नाराजगी है। उनके मुताबिक, मतदाता सूची से 13,30,00,000 लोगों के नाम हटाए गए हैं।
उन्होंने पश्चिम बंगाल और पहले हुए SIR का उल्लेख करते हुए दावा किया कि अगर ये लोग ट्रिब्यूनल में अपील करते हैं तो बड़ी संख्या में अपीलें स्वीकार होने और नाम वापस मतदाता सूची में जुड़ने की संभावना है।
चिदंबरम ने कहा कि बड़े पैमाने पर लोगों को वोट देने के अधिकार से कथित रूप से वंचित किए जाने की जिम्मेदारी चुनाव आयोग की है। उन्होंने SIR को तत्काल रोकने और प्रभावित मतदाताओं को राहत देने के उपाय किए जाने की मांग दोहराई।
चिदंबरम के बयान के बीच चुनाव आयोग और विपक्ष के बीच SIR को लेकर विवाद जारी है। चुनाव आयोग ने दूसरी ओर कहा है कि आयोग के भीतर अलग-अलग विचार और टिप्पणियां संस्थागत प्रक्रिया का हिस्सा हैं तथा उसके आदेश कानूनी प्रक्रिया के अनुरूप हैं।














