New Delhi : अंतरिक्ष अनुसंधान की दुनिया से चीन के लिए एक बेहद बुरी खबर सामने आ रही है। चीन का महत्वाकांक्षी ‘लॉन्ग मार्च 7ए’ (Long March 7A) रॉकेट उड़ान भरने के कुछ ही पलों बाद हवा में ही धमाके के साथ फट गया। इस भीषण हादसे में रॉकेट के साथ ले जाया जा रहा बहुमूल्य सैटेलाइट भी पूरी तरह से नष्ट हो गया है। चीनी अंतरिक्ष एजेंसी के इतिहास में इस रॉकेट का यह पहला असफल मिशन साबित हुआ है, जिससे अंतरिक्ष वैज्ञानिकों के बीच हड़कंप मच गया है।
वेनचांग लॉन्च साइट से भरी थी उड़ान
यह सनसनीखेज घटना चीन के हैनान द्वीप पर स्थित वेनचांग स्पेसक्राफ्ट लॉन्च साइट (Wenchang Spacecraft Launch Site) की है। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, लॉन्ग मार्च 7ए रॉकेट ने अंतरिक्ष के लिए अपनी पहली उड़ान भरी थी। शुरुआती चरण में रॉकेट ने सामान्य रूप से काम करना शुरू किया, लेकिन जमीन से छूटने के महज 85 सेकंड बाद ही इसके ऊपर जाने के शुरुआती दौर में अचानक गंभीर तकनीकी खराबी आ गई। देखते ही देखते रॉकेट आग के गोले में तब्दील हो गया और आसमान में ही परखच्चे उड़ गए। चीनी सरकारी मीडिया के अनुसार, इस दुर्घटना के बाद मौके पर हड़कंप मच गया और तुरंत उच्चस्तरीय जांच के आदेश दे दिए गए हैं।
क्या है चीन के लॉन्ग मार्च 7ए रॉकेट की खासियत?
लॉन्ग मार्च 7ए चीन का एक ऐसा अत्याधुनिक मध्यम से भारी वजन वाले सैटेलाइट्स को अंतरिक्ष में पहुंचाने वाला रॉकेट है, जिसे चाइना एकेडमी ऑफ लॉन्च व्हीकल टेक्नोलॉजी (CALT) द्वारा डिजाइन और विकसित किया गया है। इसे विशेष रूप से जियोस्टेशनरी ट्रांसफर ऑर्बिट यानी जीटीओ (GTO) तक भारी पेलोड और सैटेलाइट पहुंचाने के लिए तैयार किया गया है। यह चीनी रॉकेट परिवार का एक बेहद अहम और भरोसेमंद हिस्सा माना जाता रहा है। सीजेड-7ए (CZ-7A) को मूल रूप से लॉन्ग मार्च 7 के बेस पर ही तैयार किया गया है, जिसमें लिक्विड-फ्यूल इंजन और दमदार बूस्टर्स का इस्तेमाल किया जाता है। इसका डिजाइन चीन को अंतरिक्ष की ऊंची कक्षाओं तक भारी वजन ले जाने में सक्षम बनाता है।
आखिर उड़ान के दौरान ऐसा क्या हुआ?
फिलहाल इस बात की आधिकारिक पुष्टि नहीं हो पाई है कि रॉकेट में यह भयानक विस्फोट किन कारणों से हुआ। अंतरिक्ष विशेषज्ञों और जांचकर्ताओं की टीमें रॉकेट से प्राप्त हो रहे टेलीमेट्री (Telemetry) और अन्य तकनीकी डेटा का बारीकी से विश्लेषण कर रही हैं। जांच का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि आखिर उड़ान के शुरुआती चरण के दौरान किस तकनीकी खामी या अंदरूनी गड़बड़ी की वजह से यह हादसा पेश आया। वैज्ञानिकों का मानना है कि उड़ान का शुरुआती दौर किसी भी रॉकेट के लिए सबसे ज्यादा जोखिम भरा और संवेदनशील होता है। इस दौरान एयरोडायनामिक प्रेशर, तीव्र कंपन और वातावरण के घनत्व में तेजी से बदलाव होता है, जिससे जरा सी चूक भी भारी पड़ सकती है।
चीन के अंतरिक्ष कार्यक्रम पर कितना असर?
पिछले कुछ वर्षों में चीन ने अपने अंतरिक्ष अभियानों और रॉकेट लॉन्च की रफ्तार में अभूतपूर्व तेजी दर्ज की है। लॉन्ग मार्च रॉकेटों का यह पूरा परिवार चीनी अंतरिक्ष कार्यक्रम की रीढ़ माना जाता है, और वेनचांग लॉन्च सेंटर देश के सबसे ताकतवर और भविष्य के मून व मार्स मिशनों का मुख्य केंद्र बन चुका है। हालांकि इस पहले असफल मिशन से चीन की अंतरिक्ष गतिविधियों को एक बड़ा झटका जरूर लगा है, लेकिन जानकारों का मानना है कि इससे चीन के दीर्घकालिक अंतरिक्ष अभियानों पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ेगा। इसके बावजूद, वैश्विक एयरोस्पेस उद्योग इस पूरी जांच रिपोर्ट पर कड़ी नजर बनाए हुए है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि भविष्य के सीजेड-7ए मिशनों में ऐसी जानलेवा और महंगी गलतियां दोबारा न दोहराई जाएं।













