श्रद्धालुओं की आस्था पर भारी पड़ा कोरोना का कहर, टूटी वर्षों पुरानी परंपरा

-कोरोना संक्रमण के कारण नहीं हो पाया दशहरा मेले का आयोजन
हापुड़, । गढ़मुक्तेश्वर तहसील के ब्रजघाट पर प्रति वर्ष ज्येष्ठ माह की दशमी पर आयोजित होने वाले दशहरा मेले का इस वर्ष आयोजन नहीं हो सका। कोरोना वायरस के संक्रमण के कारण इस वर्ष मेला स्थल पूरी तरह सुनसान रहा। सोमवार को ज्येष्ठ माह की दशमी होने के कारण कुछ लोग गंगा स्नान करने अवश्य पहुंचे लेकिन पुलिस ने उन्हें वापस लौटा दिया। 


ज्येष्ठ माह की दशमी पर इस वर्ष गंगा किनारे मेले का आयोजन नहीं हो सका। इस कारण गंगा किनारे पर सन्नाटा छाया रहा। ब्रजघाट पर गंगा स्नान करने के लिए आने वाले लोगों को गंगा किनारे तक पहुंचने से रोकने के लिए प्रशासन ने गंगा नगरी को सील कर दिया था। जनपद के उच्च स्तरीय पुलिस अधिकारी ब्रजघाट पर राष्ट्रीय राजमार्ग स्थित गंगा पुल पर मौजूद रह कर पूरी व्यवस्था पर निगाह रखे हुए थे। पुलिस कर्मियों को चकमा देकर कुछ श्रद्धालु गंगा घाट तक अवश्य पहुंच गए लेकिन वहां मौजूद पुलिसकर्मियों ने उन्हें वापस लौटा दिया और चेतावनी दी कि यदि प्रशासन के निर्देशों का पालन नहीं किया गया तो उनकी विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इस दौरान उपजिलाधिकारी विजय वर्धन तोमर, पुलिस क्षेत्राधिकारी पवन कुमार और कोतवाली प्रभारी निरीक्षक राजपाल सिंह भी मौजूद थे। 


पंडित राजेन्द्र शास्त्री ने बताया कि इस दिन मुहूर्त दोपहर 2 बजकर 37 मिनट तक था। यह समय स्नान, ध्यान और दान करने के लिए पूरी तरह उपयुक्त था, किन्तु कोरोना संक्रमण के कारण प्रशासन द्वारा गंगा स्नान करने की अनुमति नहीं दिए जाने के कारण लोग गंगा स्नान करने से वंचित रह गए। उन्होंने बताया कि इस दिन ही पृथ्वी पर गंगा का अवतरण हुआ था। अतः गंगा दशहरा का विशेष महत्व है। श्रद्धालु इस दिन गंगा नदी में आस्था की डुबकी लगाते हैं। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन गंगा नदी में स्नान करने से व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती है।

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