लखनऊ में सनसनी: फेसबुक फ्रेंड ने होटल बुलाकर महिला से किया गैंगरेप, अश्लील वीडियो बनाकर ब्लैकमेलिंग का आरोप; जांच में जुटी पुलिस

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के पॉश इलाके विभूतिखंड से एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है। प्रयागराज की रहने वाली एक महिला ने अपने फेसबुक मित्र और उसके साथियों पर सामूहिक दुष्कर्म (गैंगरेप), बंधक बनाने और अश्लील वीडियो के जरिए ब्लैकमेल करने का संगीन आरोप लगाया है। पुलिस ने इस मामले में मुख्य आरोपी भूपेंद्र सिंह तोमर उर्फ आदित्य उर्फ मोनू सहित सात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है।

फेसबुक पर दोस्ती और फिर होटल में बिछाया जाल

पीड़िता के मुताबिक, उसकी दोस्ती भूपेंद्र से फेसबुक के जरिए हुई थी। आरोपी ने महिला को अपने भरोसे में लिया और उसे लखनऊ बुलाया। लखनऊ पहुंचने पर आरोपी ने उसे विभूतिखंड स्थित एक नामचीन होटल के कमरे में ठहराया। महिला का आरोप है कि वहां उसे नशीला पदार्थ मिश्रित कोल्ड ड्रिंक पिलाई गई, जिसके बाद वह बेहोश हो गई।

दुष्कर्म, मारपीट और वीडियो बनाकर ब्लैकमेलिंग का खेल

शिकायत के अनुसार, महिला के अचेत होने के बाद मुख्य आरोपी ने उसके साथ दुष्कर्म किया और इस दौरान अश्लील वीडियो भी बना लिया। होश आने पर जब महिला ने विरोध किया, तो उसे बंधक बनाकर पीटा गया। पीड़िता का दावा है कि बाद में आरोपी के अन्य साथी भी कमरे में पहुंचे और उन्होंने भी उसके साथ दरिंदगी की। घटना के बाद आरोपी लगातार वीडियो वायरल करने की धमकी देकर उसे डराते और ब्लैकमेल करते रहे।

पुलिस की जांच और सीसीटीवी फुटेज में नया मोड़

मामला दर्ज होने के बाद पुलिस ने होटल के सीसीटीवी (CCTV) फुटेज को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है। हालांकि, पुलिस की शुरुआती जांच में कुछ अलग तथ्य सामने आ रहे हैं। एसीपी विभूतिखंड विनय कुमार द्विवेदी ने बताया कि 19 अप्रैल के फुटेज में महिला और मुख्य आरोपी होटल में सामान्य तरीके से प्रवेश करते दिख रहे हैं। उस दौरान किसी भी तरह की जोर-जबरदस्ती या विरोध के लक्षण नहीं पाए गए हैं।

सात आरोपियों के खिलाफ मुकदमा, पुलिस खंगाल रही साक्ष्य

पीड़िता ने यह भी आरोप लगाया है कि शिकायत दर्ज कराने के बाद आरोपी उसे जान से मारने की धमकियां दे रहे हैं। पुलिस ने सामूहिक दुष्कर्म, मारपीट, ब्लैकमेलिंग और आईटी एक्ट जैसी गंभीर धाराओं में केस दर्ज किया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि वे पीड़िता के बयानों और सीसीटीवी साक्ष्यों का मिलान कर रहे हैं। मामला बेहद संवेदनशील होने के कारण उच्चाधिकारी खुद इसकी निगरानी कर रहे हैं और आरोपियों की तलाश में दबिश दी जा रही है।

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