नवंबर की दस्तक के साथ ही देश की राजधानी दिल्ली की आबोहवा एक बार फिर से बेहद खतरनाक और दमघोटूं होती जा रही है। राजधानी का औसत एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) उछलकर 373 के ऊंचे स्तर पर दर्ज किया गया है, जिसने आम जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। हालात इतने भयावह हो चुके हैं कि दिल्ली के कई प्रमुख इलाकों में प्रदूषण का स्तर 450 के खतरनाक आंकड़े को भी पार कर चुका है, जिससे लोगों की सांसों पर गहरा संकट मंडराने लगा है। पंजाबी बाग में AQI 452, जहांगीरपुरी में 450 और प्रतिष्ठित आईआईटी दिल्ली (IIT Delhi) परिसर में प्रदूषण का स्तर 446 तक रिकॉर्ड किया गया है, जहां की हवा सीधे तौर पर फेफड़ों को भारी नुकसान पहुंचा रही है।
इन इलाकों में हवा सबसे ज्यादा ‘गंभीर’ श्रेणी में
राजधानी के विभिन्न हिस्सों में वायु गुणवत्ता की स्थिति बेहद दयनीय बनी हुई है। रोहिणी में वायु गुणवत्ता सूचकांक 435 तक पहुंच गया है, जबकि मुंडका में 440, डीटीयू (DTU) में 434, पूसा (IITM) में 429 और आरके पुरम में 423 AQI दर्ज किया गया है। इसके अलावा, अलीपुर में 421, आईटीओ और नरेला में 418, पटपड़गंज में 415 तथा मंदिर मार्ग और नॉर्थ कैंपस में 413 AQI रिकॉर्ड किया गया है। डॉ. कर्णी सिंह शूटिंग रेंज और ओखला फेज-2 में प्रदूषण का स्तर 411, बवाना में 410 और जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में 406 AQI पर बना हुआ है। इन तमाम इलाकों में हवा की गुणवत्ता ‘गंभीर’ (Severe) श्रेणी में बनी हुई है, जो स्वास्थ्य के लिए एक बड़ा खतरा है।
राजधानी के अन्य हिस्सों में भी हवा ‘बेहद खराब’
राजधानी के कई दूसरे इलाकों में भी प्रदूषण का कहर कम होने का नाम नहीं ले रहा है, जहां हवा ‘बेहद खराब’ (Very Poor) श्रेणी में दर्ज की गई है। मेजर ध्यानचंद नेशनल स्टेडियम और द्वारका सेक्टर-8 में AQI 398 रिकॉर्ड किया गया, जबकि सीआरआरआई मथुरा रोड और पूसा (DPCC) में 392, जेएनयू (JNU) में 391 और बुराड़ी क्रॉसिंग में 390 AQI दर्ज किया गया है। कॉमनवेल्थ स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में 384, एनआईएच नरेला में 382 और एनएसयूटी जाफरपुर में 381 AQI रहा। आया नगर में 379, नजफगढ़ में 376, चांदनी चौक में 369 और नांगलोई में 360 दर्ज किया गया है। इसके अलावा, आईजीआई एयरपोर्ट टर्मिनल-3 पर AQI 358, शादीपुर में 348, अशोक विहार में 346, बदरपुर में 330 और नेहरू नगर में 334 AQI दर्ज किया गया है, जो स्थिति की गंभीरता को बयां करता है।
कुछ इलाकों में प्रदूषण से थोड़ी राहत, लेकिन मानक अभी भी चिंताजनक
दिल्ली के गिने-चुने इलाकों में ही प्रदूषण का स्तर 300 या उससे थोड़ा नीचे दर्ज किया गया है। आनंद विहार में AQI 300 रहा, जबकि कैंटोनमेंट एरिया में 299 और छावला में 296 दर्ज किया गया। आईएमडी लोधी रोड में 294 और इग्नू मैदान गढ़ी में 257 AQI रिकॉर्ड किया गया।
पर्यावरण विशेषज्ञों और सरकारी मानकों के अनुसार:
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201 से 300 के बीच: वायु गुणवत्ता ‘खराब’ (Poor) श्रेणी में मानी जाती है।
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301 से 400 के बीच: हवा ‘बेहद खराब’ (Very Poor) होती है।
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400 से अधिक: वायु गुणवत्ता ‘गंभीर’ (Severe) श्रेणी में आ जाती है।
राजधानी के अधिकांश मॉनिटरिंग स्टेशनों पर प्रदूषण का यह उच्च स्तर प्रशासन और आम जनता दोनों के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गया है।
प्रदूषण पर लगाम कसने के लिए कड़े प्रतिबंध: ‘ग्रैप-2’ (GRAP-2) लागू
दिल्ली में लगातार बिगड़ती और जहरीली होती हवा को नियंत्रित करने के लिए सरकार ने मजबूरी में ‘ग्रैप-2’ (GRAP-2) के प्रावधानों को पूरी सख्ती के साथ लागू कर दिया है। इसके तहत प्रदूषण के स्तर को नीचे लाने के लिए कई कड़े प्रतिबंध और कदम उठाए गए हैं:
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निर्माण कार्यों पर पाबंदी: धूल और प्रदूषण फैलाने वाली निर्माण गतिविधियों पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है।
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खुले में जलाने पर रोक: कचरे या अन्य किसी भी सामग्री को खुले में जलाने और भारी धुआं फैलाने पर सख्त प्रतिबंध है।
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सड़कों पर पानी का छिड़काव: धूल कणों को हवा में उड़ने से रोकने के लिए लगातार सड़कों पर स्प्रिंकलर से पानी का छिड़काव किया जा रहा है और प्रमुख जगहों पर वॉटर टैंकर तैनात किए गए हैं।
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वाहन प्रदूषण पर नकेल: बिना वैध पीयूसीसी (PUCC – Pollution Under Control Certificate) के पेट्रोल पंपों पर गाड़ियों को पेट्रोल-डीजल देने पर रोक लगा दी गई है। इसके साथ ही, बीएस-6 (BS6) मानक से नीचे की गाड़ियों की दिल्ली में एंट्री पर भी सख्ती से पाबंदी है।
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बॉर्डर चेकिंग: दिल्ली-नोएडा और अन्य सीमाओं पर सघन वाहन जांच अभियान चलाया जा रहा है, और नियमों का उल्लंघन करने वाली गाड़ियों के भारी चालान काटे जा रहे हैं या उन्हें वापस भेजा जा रहा है।
डॉक्टरों की सख्त सलाह: स्वास्थ्य को लेकर बरतें विशेष सावधानी
इस जहरीले प्रदूषण के बीच स्वास्थ्य विशेषज्ञों और डॉक्टरों ने आम नागरिकों को अत्यधिक सावधानी बरतने की सलाह दी है। डॉक्टरों का कहना है कि जब तक बहुत जरूरी न हो, सुबह की सैर पर जाने से पूरी तरह बचें। विशेष तौर पर गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों, छोटे बच्चों और पहले से किसी गंभीर बीमारी (जैसे सांस या दिल की बीमारी) से पीड़ित लोगों को अपने स्वास्थ्य को लेकर विशेष एहतियात बरतनी चाहिए। घर से बाहर निकलते समय अच्छी क्वालिटी के एन-95 (N95) मास्क का इस्तेमाल करना ही समझदारी होगी ताकि इस जहरीली हवा के दुष्प्रभावों से बचा जा सके।


















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