आंधियां लाख चलीं, इधर तो झोंका भी न आया… तीन दशक पहले पिता को मिला इंदिरा आवास बना इस परिवार का ‘काल’

, बारिश में ढही छत तो ‘सिस्टम’ ने कूड़ाघर में दे दी शरण

 

सोहावल (अयोध्या)। प्रशासनिक बेरुखी और गंवई राजनीति के चक्रव्यूह में फंसा एक गरीब मजदूर का परिवार आज कूड़ेदान में जिंदगी बिताने को मजबूर है। न तो गांव के सेक्रेटरी का दिल पसीजा और न ही जिले के आला अधिकारियों का ध्यान इस ओर गया। सरकारी नियमों के उलझाव और अफसरों की अनदेखी ने इस बेबस परिवार को पक्की छत देने के बजाय कूड़ाघर की चारदीवारी में धकेल दिया है।

33 हजार फीट ऊंची योजनाओं के दावों के बीच ‘कूड़ेदान’ में सिमटी जिंदगी यह दर्दनाक दास्तान सोहावल विकास खंड क्षेत्र के गोपीनाथपुर (नेवादा) निवासी 35 वर्षीय मजदूर भवानी प्रसाद प्रजापति (पुत्र स्वर्गीय राम गोविंद) की है। भवानी प्रसाद अपने सिर पर पक्की छत की उम्मीद लिए ग्राम प्रधान से लेकर ब्लॉक मुख्यालय तक के चक्कर काटते-काटते थक गए, लेकिन ‘सिस्टम’ की नींद नहीं टूटी। हाल ही में हुई मूसलाधार बारिश और चक्रवाती तूफान ने उनके कच्चे और जर्जर मकान को पूरी तरह तबाह कर दिया। इसके बाद बेघर हुआ यह मजदूर अपनी पत्नी संतोष कुमारी और पांच मासूम बच्चों—रमन (14), अमन (12), चंदन (10), लक्ष्मी (5) और अंकित के साथ विकासखंड सोहावल द्वारा बनवाए गए अपशिष्ट प्रसंस्करण केंद्र (कूड़ादान) में रहने को विवश है।

30 साल पुराना इंदिरा आवास बना जी का जंजाल भवानी प्रसाद की पत्नी संतोष कुमारी ने अपना दर्द बयां करते हुए बताया कि करीब तीन दशक पहले उनके ससुर राम गोविंद को इंदिरा आवास योजना के तहत एक कमरा मिला था और सास मंगला देवी के नाम अंत्योदय कार्ड बना था। सास-ससुर के देहांत के बाद परिवार मजदूरी करके किसी तरह गुजर-बसर कर रहा था। लगभग आठ साल पहले उस पुराने मकान की छत भरभराकर गिर गई थी। परिवार ने जान जोखिम में डालकर कई साल बिताए और लगातार अधिकारियों से नए आवास की गुहार लगाई, लेकिन सरकारी फाइलों में पुराना आवास दर्ज होने का हवाला देकर हर बार उन्हें बैरंग लौटा दिया गया।

तूफान में ढहा आशियाना, प्रधान ने दिया कूड़ेदान में सहारा बीते सप्ताह आए तूफान में जब जर्जर मकान पूरी तरह जमींदोज हो गया, तो कोई रास्ता न देख ग्राम प्रधान विनीता देवी ने पीड़ित परिवार को गांव के खाली पड़े अपशिष्ट कूड़ादान में अस्थायी रूप से शरण दी। हैरान करने वाली बात यह है कि गांव में तैनात ग्राम विकास अधिकारी (सेक्रेटरी) ने इस भयावह स्थिति का जायजा तक लेना मुनासिब नहीं समझा। ग्राम प्रधान के माध्यम से सोहावल एसडीएम को लिखित सूचना देने के बावजूद अब तक कोई प्रशासनिक मदद इस परिवार तक नहीं पहुंची है।

मामले की खुद करूंगा जांच: बीडीओ सोहावल इस पूरे प्रशासनिक संकट और लापरवाही के मामले पर सोहावल के खंड विकास अधिकारी (बीडीओ) हरिश्चन्द्र सिंह से बात की गई तो उन्होंने बताया कि यह मामला अभी तक उनके संज्ञान में नहीं आया था। उन्होंने आश्वासन दिया कि वे खुद मौके पर जाकर मामले की निष्पक्ष जांच करेंगे और परिवार की पात्रता के आधार पर तत्काल सरकारी आवास स्वीकृत कराने की कार्रवाई करेंगे।

 

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