
लखनऊ उत्तर प्रदेश में बाढ़ की स्थिति को लेकर राहत और चिंता दोनों की तस्वीरें एक साथ सामने आ रही हैं। एक तरफ जहां कुछ इलाकों में गंगा के जलस्तर में गिरावट दर्ज की गई है, वहीं दूसरी ओर टोंस और पांडु जैसी नदियों के अचानक बढ़ते पानी ने नई मुसीबत खड़ी कर दी है। प्रयागराज, वाराणसी और कानपुर समेत कई संवेदनशील जिलों में प्रशासन लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है। शुरुआती आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश के पांच जिलों में 11 हजार हेक्टेयर से अधिक कृषि भूमि जलमग्न हो चुकी है, जिससे फसलों को व्यापक नुकसान पहुंचा है।
प्रयागराज में गंगा-यमुना का उतार-चढ़ाव जारी प्रयागराज में गंगा और यमुना के जलस्तर में दोबारा बढ़ोतरी दर्ज की गई है। हालांकि राहत की बात यह है कि दोनों नदियां अभी खतरे के निशान से काफी नीचे बह रही हैं और सभी तटबंध पूरी तरह सुरक्षित हैं। इसके बावजूद कछारी इलाकों के निवासियों में डर का माहौल है। नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, छतनाग में गंगा का जलस्तर 81.09 मीटर और नैनी में यमुना का जलस्तर 81.60 मीटर दर्ज किया गया। इससे पहले टोंस और मंदाकिनी नदियों के उफान के कारण मेजा और कोरांव के कई गांवों के घरों में पानी प्रवेश कर गया था।
वाराणसी के 84 घाटों पर नौका संचालन बंद, गाजीपुर में चेतावनी बिंदु पार वाराणसी में गंगा का जलस्तर सामान्य न होने की वजह से सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। श्रद्धालुओं और पर्यटकों की जान-माल की सुरक्षा को देखते हुए शहर के सभी 84 घाटों पर नौका संचालन पूरी तरह रोक दिया गया है। उधर गाजीपुर में गंगा का पानी घटने के बावजूद जलस्तर 62.970 मीटर पर बना हुआ है, जो चेतावनी बिंदु 62.100 मीटर से ऊपर है। प्रभावित इलाकों में राहत कार्य तेज करते हुए प्रशासन ने 551 राहत किट का वितरण किया है।
कानपुर में पांडु नदी का कहर, चित्रकूट में सीएम योगी ने लिया जायजा पूर्वांचल के कुछ हिस्सों में भले ही पानी कम हो रहा हो, लेकिन कानपुर में पांडु नदी की वजह से स्थिति गंभीर है। शहर की कई बस्तियों में पानी भर जाने से 500 से अधिक घर प्रभावित हुए हैं और लगभग एक हजार लोग अपनी छतों या ऊपरी मंजिलों पर शरण लेने को मजबूर हैं। दूसरी ओर, चित्रकूट में भीषण बाढ़ के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्वयं स्थिति और पुनर्वास कार्यों की समीक्षा की। सरकार द्वारा चित्रकूट के 800 पीड़ित परिवारों को खाद्यान्न व राहत सामग्री वितरित की गई है।
11 हजार हेक्टेयर फसलें तबाह, आपदा प्रबंधन मुस्तैद बाढ़ के शुरुआती चरण में ही नदियों के उफान से 11 हजार हेक्टेयर से ज्यादा जमीन पानी में डूब गई थी। खेतों में पानी भरने से किसानों की मेहनत पर पानी फिर गया है। हालांकि अब कई जगहों पर जलस्तर घटने लगा है, लेकिन नदियों के अनिश्चित उतार-चढ़ाव को देखते हुए खतरा पूरी तरह टला नहीं है। यूपी राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (UPSDMA) और स्थानीय प्रशासन पूरी स्थिति पर पैनी नजर रख रहे हैं तथा निचले इलाकों के लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।















