पेरिस के विश्व प्रसिद्ध लूव्र संग्रहालय के कांच के पिरामिड के सामने जैसे ही हजारों प्रदर्शनकारी उतरे, दुनिया भर से आए पर्यटक सन्न रह गए। फ्रांस में आसमान छूती महंगाई और बढ़ती जीवन-यापन की लागत के खिलाफ भड़का गुस्सा अब आधुनिक इतिहास की सबसे भीषण और भयानक सड़क हिंसा का रूप ले चुका है। हालात इतने बेकाबू हो चुके हैं कि सरकार को पेरिस समेत देश के कई प्रमुख शहरों में आंशिक कर्फ्यू लगाने का सख्त फैसला लेना पड़ा है। राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के राजनीतिक भविष्य और आगामी चुनावों से ठीक छह महीने पहले देश गृहयुद्ध जैसे हालात का सामना कर रहा है।
शांतिपूर्ण आंदोलन से सड़कों पर तांडव तक कैसे पहुंचा मामला
यह पूरा बवंडर रातों-रात खड़ा नहीं हुआ, बल्कि पिछले चार हफ्तों से सुलगती चिंगारी का नतीजा है। शुरुआत में हाई स्कूलों के छात्रों ने शिक्षण संस्थानों में बेहतर बुनियादी सुविधाओं और हालात सुधारने की मांग को लेकर मोर्चा खोला था। देखते ही देखते इस मुहिम में आम नागरिक भी जुड़ गए और शनिवार को देशभर की सड़कों पर करीब पांच लाख लोग महंगाई के खिलाफ उतर आए।
लेकिन यह शांतिपूर्ण जनआंदोलन जल्द ही हिंसक तांडव में बदल गया। जगह-जगह नकाबपोश उपद्रवियों ने पुलिस बलों पर पथराव और हमले किए, सरकारी इमारतों व टाउन हॉल में भयंकर तोड़फोड़ और आगजनी की। प्रदर्शनकारियों ने कई दुकानों को लूट लिया और सड़कों पर खड़ी कारों, साइकिलों व स्कूटरों को आग के हवाले कर दिया।
प्रशासनिक नाकामी और पुलिस हिरासत के आंकड़े हैरान करने वाले
सरकारी और प्रशासनिक आंकड़ों के मुताबिक इस देशव्यापी हिंसा में अब तक 2,500 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। अकेले न्याय मंत्रालय के अनुसार 2,330 से अधिक लोगों को पुलिस हिरासत में लिया गया है, जिनमें 70 प्रतिशत से ज्यादा वयस्क शामिल हैं। इस खूनी संघर्ष और झड़प में सुरक्षा बलों के लगभग 1,000 जवान गंभीर रूप से घायल हुए हैं।
लघु व्यवसाय मंत्रालय के शुरुआती अनुमानों के अनुसार कम से कम 3,000 व्यापारिक दुकानें इस हिंसा से प्रभावित हुई हैं और देश को करोड़ों यूरो का भारी-भरकम नुकसान उठाना पड़ा है। हालांकि, आम नागरिक और प्रदर्शनकारी भी इस हिंसा का शिकार हुए हैं, जिनमें एक व्यक्ति का हाथ पुलिस के भीड़ नियंत्रण वाले ग्रेनेड की चपेट में आकर उड़ गया।
राष्ट्रपति मैक्रों ने मानी चूक, गृह मंत्री का इस्तीफा और मंत्रियों की हाई-लेवल बैठक
भले ही सरकार ने कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए करीब 60,000 सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया हो, लेकिन राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने खुद सरकारी प्रतिक्रिया और प्रशासनिक तैयारियों में कमियों को स्वीकार किया है। रविवार को देश के नाम अपने संबोधन में उन्होंने इस बेलगाम और अराजक हिंसा की कड़ी भर्त्सना की। बढ़ते दबाव के बीच गृह मंत्री लॉरेंट नुनेज ने अपना इस्तीफा सौंप दिया, जिसे फिलहाल राष्ट्रपति ने स्वीकार नहीं किया है।
प्रशासन अब लुटाई गई संपत्ति के ऑनलाइन व्यापार पर भी शिकंजा कस रहा है। डिजिटल मंत्री ऐनी ले हेनानफ ने ई-कॉमर्स और सोशल मीडिया दिग्गजों पर नकेल कसते हुए विंटेड, ईबे, अमेजन, लेबोनकॉइन, मेटा और टिकटॉक के प्रतिनिधियों को तलब किया है ताकि लूट के सामान की ऑनलाइन बिक्री और लिस्टिंग तुरंत रोकी जा सके।
लूव्र संग्रहालय बंद, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी दिखने लगा असर
महंगाई की इस भयंकर मार का असर अब पर्यटन और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर भी साफ दिखने लगा है। सोमवार को प्रदर्शनकारियों के एक उग्र समूह ने लूव्र संग्रहालय के मुख्य प्रवेश द्वार को पूरी तरह घेर लिया, जिसके चलते मजबूरन इस ऐतिहासिक संग्रहालय को पर्यटकों के लिए बंद करना पड़ा। ऑस्ट्रेलिया से आए 73 वर्षीय पर्यटक पैट बोलैंड ने निराशा जताते हुए कहा कि वे और उनके साथी इस अफरा-तफरी का हिस्सा बिल्कुल नहीं बनना चाहते थे।
आंकड़ों पर नजर डालें तो फ्रांस में पिछले कुछ महीनों में डीजल की कीमतों में लगभग 40 प्रतिशत और पेट्रोल के दामों में 25 प्रतिशत का भारी उछाल आया है। इसके साथ ही पिछले पांच वर्षों में खाने-पीने की बुनियादी चीजें भी 25 प्रतिशत तक महंगी हो गई हैं। यह राजनीतिक और सामाजिक अशांति ऐसे वक्त पर भड़की है जब अप्रैल-मई में राष्ट्रपति चुनाव होने वाले हैं। मौजूदा सर्वेक्षणों में धुर दक्षिणपंथी उम्मीदवार मरीन ले पेन आगे चल रही हैं, जबकि सरकार का आरोप है कि अति-वामपंथी समूह जीन-ल्यूक मेलेंचोन की संभावनाओं को मजबूत करने के लिए देश में हिंसा भड़का रहे हैं।
यूरोप के दूसरे देशों में भी फैली आग, यात्रा को लेकर जारी हुई एडवाइजरी
फ्रांस की इस सुलगती आग का असर अब पड़ोसी यूरोपीय देशों में भी फैलने लगा है। यूरोपीय संघ ने इस हिंसा को पूरी तरह अस्वीकार्य करार दिया है, हालांकि साथ ही नागरिकों के शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन के अधिकार की सुरक्षा पर भी जोर दिया है। इस स्थिति को देखते हुए जर्मनी ने अपनी आधिकारिक यात्रा सलाह को अपडेट कर दिया है, वहीं चीन ने भी अपने नागरिकों को फ्रांस यात्रा के दौरान अत्यधिक सतर्क रहने की हिदायत दी है।
केवल फ्रांस ही नहीं, बल्कि इटली के मिलान शहर में भी झड़पों की खबरें सामने आई हैं। बेल्जियम की राजधानी ब्रुसेल्स और लीज में पुलिस ने उग्र भीड़ को नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े और पानी की बौछारों का इस्तेमाल किया। इसके अलावा मैड्रिड, लिस्बन और पोर्टो जैसे शहरों में भी बढ़ती आवास महंगाई और जीवन-यापन की लागत के खिलाफ विरोध शिविर लगने शुरू हो गए हैं।



















