
फ्रांस में जर्जर होती स्कूली शिक्षा, आधारभूत सुविधाओं के अभाव और बजट कटौती के खिलाफ शुरू हुआ छात्रों का प्रदर्शन अब देश के इतिहास के सबसे भीषण और विशाल छात्र विद्रोह में बदल चुका है। टूटी-फूटती इमारतों की मरम्मत, शिक्षकों की कमी दूर करने, कक्षाओं में पर्याप्त टेबल-कुर्सियों की व्यवस्था और शिक्षा बजट बढ़ाने की मांगों को लेकर शुरू हुआ यह आंदोलन अब पूरे फ्रांस में फैल चुका है। स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि देश के 1200 से अधिक स्कूलों पर तालाबंदी कर दी गई है और राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों को इस संकट से निपटने के लिए आपातकालीन बैठक बुलानी पड़ी है।
21 सितंबर से शुरू हुई चिंगारी बनी शोला: 24 स्कूलों में आगजनी, 500 से अधिक विद्यालय पूरी तरह ठप
दरअसल, कई स्कूलों की छतों से पानी का रिसाव, चूहों का आतंक और शौचालयों में दरवाजे तक न होने जैसी दयनीय स्थिति के विरोध में 21 सितंबर को क्रेटेल के एक स्कूल से छात्रों ने गेट बंद कर विरोध प्रदर्शन शुरू किया था। देखते ही देखते यह चिंगारी पूरे देश में आग की तरह फैल गई। शिक्षा मंत्री एडवर्ड जेफ्रे के अनुसार, अब तक हिंसा और उपद्रव के दौरान 24 स्कूलों में आगजनी व तोड़फोड़ की घटनाएं हो चुकी हैं। इस हिंसा में 78 कर्मचारी घायल हुए हैं और करीब 30 हजार छात्रों की पढ़ाई प्रभावित हुई है। वर्तमान में 500 से ज्यादा स्कूलों में पठन-पाठन पूरी तरह से ठप पड़ा हुआ है।
सड़कों पर उतरे 4.5 लाख प्रदर्शनकारी, आंसू गैस और वाटर कैनन का इस्तेमाल; 85% नाबालिग गिरफ्तार
मंगलवार 6 अक्टूबर को आंदोलन ने अपना सबसे उग्र और आक्रामक रूप दिखाया। आयोजकों का दावा है कि फ्रांस भर में करीब 4.5 लाख लोग सड़कों पर उतरे, जबकि सरकारी आंकड़ों में यह संख्या 2.66 लाख बताई गई है (जिम्मे अकेले पेरिस में ही 56 हजार प्रदर्शनकारी शामिल थे)। पेरिस, लियोन, मार्सेल, स्ट्रासबर्ग, रेनेस और टूलूज जैसे बड़े शहरों में पुलिस और हिंसक छात्रों के बीच भीषण झड़पें हुईं, जिन्हें नियंत्रित करने के लिए पुलिस को आंसू गैस के गोले और वाटर कैनन का सहारा लेना पड़ा। आंदोलन के दौरान अब तक 6,500 से अधिक गिरफ्तारियां हो चुकी हैं, जिनमें से चौंकाने वाली बात यह है कि 85% से अधिक नाबालिग हैं। अकेले मंगलवार को ही 488 लोगों को हिरासत में लिया गया था।
प्रशासनिक कार्रवाई से भड़का जनाक्रोश: छात्र का हाथ उड़ा, कई के दांत टूटे
आंदोलन उस समय और ज्यादा हिंसक हो गया जब पुलिस कार्रवाई के दौरान गंभीर हादसों की खबरें आईं। सोमवार को लेंस शहर में एक 15 वर्षीय छात्र का हाथ पुलिस द्वारा फेंके गए ग्रेनेड को उठाने के प्रयास में उड़ गया। वहीं, पेरिस में आंसू गैस का गोला लगने से एक 14 साल के छात्र के कई दांत टूट गए। इन घटनाओं के बाद गृह मंत्री लॉरेंट नुनेज ने पुलिस कार्रवाई का बचाव करते हुए कहा कि बल प्रयोग केवल वहीं किया गया जहां हिंसा हुई थी। प्रधानमंत्री सेबेस्टियन लेकोर्नू ने चेतावनी दी कि उपद्रव करने वालों पर सख्ती जारी रहेगी और इसके साथ ही उन्होंने सुरक्षा के लिहाज से स्कूली कक्षाओं को एक हफ्ते के लिए निलंबित कर दिया है।
2027 के शिक्षा बजट में 54 अरब यूरो की कटौती ने आग में डाला घी; मैक्रों सरकार पर संकट
छात्रों के इस अभूतपूर्व असंतोष के पीछे सरकार की आर्थिक नीतियां भी मुख्य वजह हैं। वर्ष 2027 के प्रस्तावित शिक्षा बजट में की गई 54 अरब यूरो की भारी कटौती ने आग में घी का काम किया है। आम चुनावों से ठीक 6 महीने पहले भड़का यह मुद्दा राष्ट्रपति मैक्रों की सरकार के लिए अब तक का सबसे बड़ा राजनीतिक संकट बनता नजर आ रहा है। इस बीच, छात्र यूनियनों ने अपनी मांगों पर अड़े रहते हुए आने वाले गुरुवार को फिर से पूरे देश में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन करने का नया ऐलान कर दिया है।

















