35 रुपये की दिहाड़ी से 100 करोड़ के साम्राज्य तक: नाना पाटेकर छोड़ गए करोड़ों की संपत्ति; जानें कितनी थी फीस और नेटवर्थ

हिंदी और मराठी सिनेमा के महान व दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर के अचानक निधन की खबर से पूरा देश स्तब्ध है. 75 वर्ष की उम्र में उन्होंने इस दुनिया को अलविदा कह दिया. अपनी बुलंद आवाज, कड़क डायलॉग्स और बेजोड़ अदाकारी से दशकों तक दर्शकों के दिलों पर राज करने वाले नाना पाटेकर के जाने के बाद प्रशंसक गमगीन हैं. इसके साथ ही लोग उनके संघर्षपूर्ण जीवन और उनके द्वारा पीछे छोड़ी गई संपत्ति के बारे में भी जानने को उत्सुक हैं. संघर्ष के दिनों में रोजाना महज 35 रुपये कमाने वाले इस महान कलाकार ने अपनी कड़ी मेहनत के दम पर करीब 80 से 100 करोड़ रुपये का विशाल साम्राज्य खड़ा किया था.

कार्डियक अरेस्ट से हुआ निधन, 45 मिनट के सीपीआर के बाद डॉक्टरों ने घोषित किया मृत

घटना गोवा स्थित उनके डोना पावला आवास की है, जहां वे रात के वक्त अचानक बेसुध पाए गए. इसके बाद उन्हें रात करीब 3:30 बजे दोना पावला के मणिपाल अस्पताल ले जाया गया. मणिपाल अस्पताल के ऑन्कोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ. शेखर सालकर ने बताया कि नाना पाटेकर को गंभीर कार्डियक अरेस्ट आया था. अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों की इमरजेंसी टीम ने उन्हें बचाने की हर संभव कोशिश की और करीब 45 मिनट तक लगातार सीपीआर दिया, लेकिन उनके शरीर में कोई प्रतिक्रिया नहीं हुई. आखिरकार डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया.

जेब्रा क्रॉसिंग पेंट करने से करोड़ों की नेटवर्थ तक, फिर भी जीते थे सादगी भरा जीवन

1 जनवरी 1951 को महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले में जन्मे नाना पाटेकर का शुरुआती जीवन कड़े अभावों में बीता. आर्ट्स में ग्रेजुएशन करने के बावजूद करियर के शुरुआती दिनों में वे पार्ट-टाइम जॉब करते थे, जहां उन्हें रोजाना सिर्फ 35 रुपये मिलते थे. पेट पालने के लिए उन्होंने सड़कों पर जेब्रा क्रॉसिंग पेंट करने और फिल्मों के पोस्टर बनाने तक का काम किया. लेकिन अपनी काबिलियत से उन्होंने 80 से 100 करोड़ रुपये की संपत्ति बनाई. इतनी अपार दौलत होने के बावजूद नाना का जीवन बेहद सादा रहा; वे अपनी कमाई का एक बड़ा हिस्सा नाम फाउंडेशन (NGO) के जरिए किसानों और जरूरतमंदों की मदद में दान कर देते थे.

1 करोड़ रुपये मांगने वाले पहले कैरेक्टर एक्टर, ‘द वैक्सीन वॉर’ के लिए ली थी आधी से भी कम फीस

नाना पाटेकर अपने उसूलों के पक्के माने जाते थे. अभिनेता परेश रावल के अनुसार, नाना पाटेकर भारतीय सिनेमा के पहले ऐसे कैरेक्टर एक्टर थे, जिन्होंने एक फिल्म के लिए 1 करोड़ रुपये की फीस मांगी थी और हासिल भी की थी. वे सामान्यतः एक फिल्म का 2 से 3 करोड़ रुपये चार्ज करते थे. हाल ही में आई फिल्म ‘ओ रोमियो’ (2026) के लिए उन्हें करीब 4 करोड़ रुपये मिले थे, वहीं ‘द वैक्सीन वॉर’ जैसी सामाजिक फिल्म के लिए उन्होंने अपनी तय फीस का केवल 20 प्रतिशत हिस्सा ही लिया था.

‘गमन’ से लेकर ‘हाउसफुल 5’ और ‘सूबेदार’ तक, ऐसा रहा शानदार फिल्मी सफर

साल 1978 में फिल्म ‘गमन’ से शुरुआत करने वाले नाना पाटेकर को 1986 की फिल्म ‘अंकुश’ से पहचान मिली. ‘परिंदा’, ‘प्रहार’, ‘तिरंगा’, ‘क्रांतिवीर’, ‘खामोशी’, ‘वेलकम’, ‘अब तक छप्पन’, ‘गुलाम-ए-मुस्तफा’, ‘नटसम्राट’, ‘शागिर्द’, ‘अपहरण’ और ‘वजूद’ जैसी फिल्मों में उनके अभिनय को हमेशा याद किया जाएगा. हाल के वर्षों में वे साल 2025 की मल्टीस्टारर फिल्म ‘हाउसफुल 5’, शाहिद कपूर स्टारर ‘ओ रोमियो’ और अनिल कपूर की फिल्म ‘सूबेदार’ में भी अपनी अदाकारी का जलवा बिखेरते नजर आए थे.

 

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