कच्चा तेल से LPG तक : भारत के पास कितना है भंडार? सरकार ने दिया पूरा जवाब

नई दिल्ली: मिडिल ईस्ट में जारी भीषण युद्ध और अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते सैन्य टकराव ने पूरी दुनिया के ऊर्जा बाजार को हिलाकर रख दिया है। कच्चे तेल की सप्लाई रुकने की अफवाहों के बीच भारत सरकार ने देशवासियों को बड़ी राहत दी है। पेट्रोलियम मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि भारत के पास कच्चे तेल, पेट्रोल, डीजल और एलपीजी (LPG) का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है। वैश्विक अस्थिरता के बावजूद देश की ऊर्जा आपूर्ति पूरी तरह सुरक्षित है और घबराने की कोई आवश्यकता नहीं है।

खाड़ी देशों के बाहर से भी आयात तेज, विकल्पों पर सरकार की नजर

सरकारी सूत्रों के मुताबिक, भारत अब केवल मिडिल ईस्ट पर निर्भर नहीं है। तेल कंपनियों ने खाड़ी क्षेत्र के बाहर के देशों से कच्चा तेल मंगाने की प्रक्रिया तेज कर दी है। सरकार ने आश्वस्त किया है कि यदि भविष्य में युद्ध के कारण किसी एक मार्ग से आपूर्ति बाधित होती है, तो भारत अन्य वैकल्पिक स्रोतों से उस कमी को तुरंत पूरा कर लेगा। पिछले कुछ वर्षों में भारत ने अपनी आयात नीति में जो विविधता लाई है, वह आज संकट के समय ‘तुरुप का इक्का’ साबित हो रही है।

रूस बना भारत का ‘संकटमोचक’: आयात में 20% की भारी उछाल

आंकड़े गवाही दे रहे हैं कि रूस-भारत की तेल साझेदारी अब एक नए मुकाम पर है। साल 2022 में जहां भारत के कुल तेल आयात में रूस की हिस्सेदारी महज 0.2 प्रतिशत थी, वहीं फरवरी 2026 में यह बढ़कर 20 प्रतिशत तक पहुंच गई है। ताजा रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने रूस से प्रतिदिन लगभग 10.4 लाख बैरल कच्चा तेल आयात किया है। यह वैकल्पिक स्रोत मिडिल ईस्ट में मचे घमासान के बीच भारत के लिए एक मजबूत सुरक्षा कवच का काम कर रहा है।

MRPL रिफाइनरी बंद होने की खबरें महज अफवाह

सोशल मीडिया और कुछ हलकों में मैंगलोर रिफाइनरी (MRPL) के बंद होने को लेकर चल रही खबरों को सरकार ने सिरे से खारिज कर दिया है। अधिकारियों ने साफ किया है कि रिफाइनरी पूरी क्षमता के साथ काम कर रही है और वहां कच्चे तेल का भरपूर स्टॉक है। इसके साथ ही, देश की सभी प्रमुख रिफाइनरियों को एलपीजी उत्पादन को अधिकतम स्तर पर ले जाने के निर्देश दिए गए हैं ताकि घरेलू रसोई गैस की कोई किल्लत न हो।

रिफाइनरियों को ‘इमरजेंसी’ निर्देश: एलपीजी उत्पादन बढ़ाएं

मिडिल ईस्ट संकट को देखते हुए पेट्रोलियम मंत्रालय ने रिफाइनरियों के लिए विशेष गाइडलाइन जारी की है:

  • घरेलू आपूर्ति को प्राथमिकता: रिफाइनरियों से कहा गया है कि वे एलपीजी उत्पादन को टॉप गियर में रखें।

  • प्रोपेन और ब्यूटेन का उपयोग: इन गैसों का इस्तेमाल प्राथमिकता के आधार पर रसोई गैस बनाने में करने को कहा गया है।

  • स्टॉक मॉनिटरिंग: तेल कंपनियों को रोजाना आधार पर भंडार की समीक्षा करने के निर्देश दिए गए हैं।

होर्मुज और कतर सप्लाई पर पैनी नजर

सरकार की नजर Strait of Hormuz (होर्मुज जलडमरूमध्य) पर टिकी है, जहां से दुनिया का एक बड़ा हिस्सा तेल और गैस का व्यापार करता है। युद्ध के कारण इस मार्ग पर टैंकरों की आवाजाही प्रभावित हुई है। इसके अलावा, दुनिया के प्रमुख एलएनजी (LNG) निर्यातक देश कतर से होने वाली गैस सप्लाई पर भी अनिश्चितता के बादल मंडरा रहे हैं। हालांकि, भारत का कहना है कि वर्तमान भंडार इतना सक्षम है कि किसी भी फौरी संकट से निपटा जा सकता है।

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