
वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सख्त रुख और तेवरों को देखकर लगता है कि अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव अब एक निर्णायक और खतरनाक मोड़ पर पहुंच चुका है। सप्ताहांत की छुट्टियां बीच में ही छोड़कर राष्ट्रपति ट्रंप शनिवार रात अचानक कैंप डेविड से व्हाइट हाउस लौट आए। उनके वापस लौटते ही वॉशिंगटन में ईरान को लेकर रणनीतिक और उच्चस्तरीय बैठकों का दौर बेहद तेज हो गया है।
अमेरिकी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, ट्रंप प्रशासन तेहरान के खिलाफ आगे की सैन्य कार्रवाई को तेज करने, सख्त आर्थिक प्रतिबंध लगाने और समुद्री नाकेबंदी को कड़ा करने जैसे गंभीर विकल्पों पर विचार कर रहा है। कैंप डेविड में भी ईरान युद्ध के अगले चरण पर रणनीति बनाई गई थी, जिसके बाद ट्रंप ने खुद संकेत दिए हैं कि वह ईरान पर किसी बड़े और कड़े फैसले के बेहद करीब हैं।
सैन्य टकराव के बीच कूटनीति का रुख: ईरान की दोहरी रणनीति
एक तरफ जहां अमेरिका रणनीतिक दबाव बना रहा है, वहीं दूसरी ओर दोनों देशों के बीच कूटनीतिक रास्ते पूरी तरह बंद नहीं हुए हैं। ईरान ने कतर के जरिए बातचीत के लिए अपनी कुछ शर्तें भेजी हैं। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची की संयुक्त राष्ट्र महासभा के लिए न्यूयॉर्क यात्रा और उससे पहले कतर जाने का कार्यक्रम इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। तेहरान एक तरफ युद्ध के लिए अपनी पूरी तैयारी दिखा रहा है, तो दूसरी तरफ बातचीत की गुंजाइश भी बनाए रखना चाहता है।
होर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिका को झटका, ड्रोन मार गिराने का दावा
जमीन और समुद्र पर हालात लगातार विस्फोटक रूप ले रहे हैं। ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स का दावा है कि उनके मिसाइल और ड्रोन हमलों ने ईरान के आसपास मौजूद अधिकांश अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निष्क्रिय कर दिया है। ईरानी प्रवक्ता हुसैन मोहब्बी के अनुसार, अमेरिकी सेना को अपने जवानों और उपकरणों को दूर स्थित ठिकानों, जैसे जॉर्डन के मुफ्फाक सल्ती हवाई अड्डे, पर शिफ्ट करना पड़ा है। ईरान का यह भी दावा है कि उसने दुनिया के सबसे अहम तेल परिवहन मार्ग ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ के ऊपर अमेरिका का एक और एमक्यू-1 ड्रोन मार गिराया है। यदि इस क्षेत्र में सैन्य टकराव बढ़ता है, तो इसका सीधा असर वैश्विक तेल आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर पड़ेगा।
ईरान की अर्थव्यवस्था पर गहरी मार, 10 फीसदी से ज्यादा की गिरावट
लगातार बढ़ते युद्ध के तनाव का आर्थिक असर ईरान के भीतर गहराई से महसूस किया जा रहा है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, इस संघर्ष की वजह से ईरानी अर्थव्यवस्था में 10 प्रतिशत से अधिक की भारी गिरावट दर्ज की गई है। ऊर्जा निर्यात पर लगे प्रतिबंधों और होर्मुज में पैदा हुए व्यवधान ने आर्थिक संकट को और गहरा कर दिया है। यह लड़ाई अब केवल दो सेनाओं के बीच सीमित न रहकर वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए खतरा बन चुकी है।
सऊदी अरब पर हूती हमलों का खतरा, लाल सागर में बढ़ा तनाव
इस संघर्ष का सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि यह अब ईरान और अमेरिका की सीमा पार कर पूरे क्षेत्र में फैल रहा है। ईरान समर्थित यमनी हूती विद्रोहियों ने यमन में अपनी स्थिति मजबूत करते हुए सऊदी अरब के खिलाफ हमले तेज कर दिए हैं। राजधानी रियाद की ओर दागी गई बैलिस्टिक मिसाइल को विफल करने का दावा किया गया है, जबकि बिश, ताइफ, फरासन और यानबू जैसे इलाकों में बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने की खबरें हैं। बाब-अल-मंदब जलडमरूमध्य के आसपास हूतियों की मौजूदगी समुद्री व्यापार के लिए एक नया संकट बन गई है।
अमेरिका ने जारी किया सुरक्षा अलर्ट: नागरिकों को तुरंत ईरान छोड़ने के निर्देश
गंभीर स्थिति को देखते हुए अमेरिका ने अपने नागरिकों को तत्काल ईरान छोड़ने की चेतावनी जारी की है। अमेरिकी दूतावास के सुरक्षा अलर्ट में नागरिकों को किसी भी स्थिति में ईरान न जाने की सलाह दी गई है। साथ ही, सऊदी अरब में मौजूद अमेरिकी सरकारी कर्मचारियों को ताइफ और यनबू जाने के लिए विशेष अनुमति लेने को कहा गया है। पूरे पश्चिम एशिया में उड़ानें रद्द होने, हवाई क्षेत्र बंद होने और अचानक सीमाएं बंद होने की आशंका जताई गई है।
तीन संवेदनशील मोर्चों पर खिंची युद्ध की रेखा
सामरिक दृष्टिकोण से यह पूरा संघर्ष तीन प्रमुख मोर्चों पर सिमट चुका है—ईरान के आसपास स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकाने, होर्मुज जलडमरूमध्य और लाल सागर का बाब-अल-मंदब मार्ग। इन तीनों स्थानों में से किसी एक पर भी बड़ा व्यवधान पूरी दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति और आपूर्ति शृंखला (Supply Chain) को ध्वस्त कर सकता है। अब देखना यह होगा कि ट्रंप का यह कड़ा रुख बातचीत से हल निकालता है या फिर पूरे पश्चिम एशिया को एक महायुद्ध में झोंक देता है।















