ट्रंप और शी जिनपिंग की ऐतिहासिक मुलाकात: ट्रेड वॉर से लेकर AI तक पर महामंथन, चीनी राष्ट्रपति बोले— ‘अमेरिका-चीन में रेस हो, रेसलिंग नहीं’

एक दशक से भी अधिक समय के लंबे अंतराल के बाद वॉशिंगटन पहुंचे चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग का अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रथम महिला मेलानिया ट्रंप ने व्हाइट हाउस में औपचारिक और भव्य स्वागत किया। इस उच्चस्तरीय बैठक के दौरान दोनों वैश्विक महाशक्तियों के प्रमुखों ने आपसी टकराव को टालने, रिश्तों में सुधार लाने और सहयोग के नए रास्ते तलाशने पर विशेष जोर दिया। वार्ता के दौरान व्यापार, तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), ताइवान और दोनों देशों के सैन्य संवाद जैसे बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तृत चर्चा हुई।

‘द्वितीय विश्व युद्ध की तरह मिलकर बनाएं बेहतर भविष्य’

शुरुआती टिप्पणी में राष्ट्रपति ट्रंप ने दोनों देशों के ऐतिहासिक संबंधों का जिक्र करते हुए कहा कि जिस तरह अमेरिका और चीन ने द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान कंधे से कंधा मिलाकर काम किया था, ठीक उसी तरह अब भी दोनों देश एक बेहतर भविष्य के निर्माण के लिए साथ आ सकते हैं। ट्रंप ने शी जिनपिंग के साथ अपनी व्यक्तिगत केमिस्ट्री को एक ‘मजबूत दोस्ती’ करार दिया, जिसकी शुरुआत 2016 में उनके पहले कार्यकाल के दौरान हुई थी। वहीं, शी जिनपिंग ने स्पष्ट किया कि वे अमेरिकी राष्ट्रपति के निमंत्रण पर द्विपक्षीय संबंधों को मजबूती देने, सहयोग का दायरा बढ़ाने और दोनों देशों की जनता के हित सुरक्षित करने के मकसद से वॉशिंगटन आए हैं।

‘प्रतिस्पर्धा स्वस्थ हो, नुकसानदेह टकराव नहीं’— शी जिनपिंग

वैश्विक मंच पर अमेरिका और चीन की तनातनी पर अपनी बात रखते हुए शी जिनपिंग ने एक बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि चीन और अमेरिका को शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व का रास्ता चुनना चाहिए, क्योंकि सहयोग में ही दोनों का फायदा है और टकराव से दोनों को भारी नुकसान होगा।

  • रेस बनाम रेसलिंग: शी ने जोर देकर कहा कि दोनों देशों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा होनी चाहिए, न कि ऐसी रेसलिंग जिसमें एक की जीत दूसरे के विनाश पर टिकी हो। उन्होंने इसे एक-दूसरे से आगे निकलने की सकारात्मक रेस बताया।

  • थ्यूसीडाइड्स ट्रैप से बचने की सलाह: उन्होंने इतिहास के प्रसिद्ध ‘थ्यूसीडाइड्स ट्रैप’ (उभरती और स्थापित ताकत के बीच अनिवार्य युद्ध का सिद्धांत) का उल्लेख करते हुए कहा कि दोनों महाशक्तियां सूझबूझ से इस खतरे को टाल सकती हैं।

  • सैन्य संवाद पर जोर: संकट के समय किसी भी तरह की गलतफहमी से बचने के लिए दोनों देशों की सेनाओं के बीच नियमित और पारदर्शी बातचीत की व्यवस्था पर सहमति जताई गई।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI): ‘सुपर इंटेलिजेंस’ इंसानी नियंत्रण में रहे

तकनीकी मोर्चे पर, विशेषकर AI को लेकर दोनों नेताओं ने अपनी गंभीर जिम्मेदारी स्वीकार की।

  • शी जिनपिंग का रुख: उन्होंने कहा कि AI के क्षेत्र में अमेरिका और चीन दुनिया के सबसे अग्रणी देश हैं। इसलिए यह दोनों की नैतिक जिम्मेदारी है कि AI का विकास हमेशा मानव नियंत्रण में रहे और इसका उपयोग केवल जनकल्याण के लिए हो।

  • ट्रंप की प्रतिक्रिया: AI को ‘सुपर इंटेलिजेंस’ की संज्ञा देते हुए ट्रंप ने कहा कि सुरक्षा और तकनीक से जुड़े आज के फैसले आने वाले दशकों की वैश्विक शांति और समृद्धि को तय करेंगे।

उल्लेखनीय है कि एडवॉन्स्ड चिप्स और कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को लेकर दोनों देशों के बीच तीखी होड़ चल रही है, फिर भी हालिया बैठकों के जरिए AI से जुड़े जोखिमों को साझा करने की नई व्यवस्था पर विचार किया जा रहा है।

ट्रेड वॉर थामने और आर्थिक स्थिरता पर बनी सहमति

बैठक से ठीक पहले अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट के हवाले से राहत भरी खबर आई। उन्होंने पुष्टि की कि दोनों देश ट्रेड वॉर को नियंत्रित करने वाली मौजूदा व्यवस्था को आगे बढ़ाने पर सहमत हो गए हैं। बीते वर्षों में ट्रेड वॉर के चरम पर अमेरिकी टैरिफ दरें 145 प्रतिशत और चीन की जवाबी दरें 125 प्रतिशत तक पहुंच गई थीं। हालांकि, हालिया वार्ताओं के बाद यह औसत अमेरिकी टैरिफ घटकर लगभग 47 प्रतिशत और चीन का टैरिफ 30 प्रतिशत के आसपास आ गया है, जिससे वैश्विक बाजार को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।

 

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