मुंबई। घर या बैंक लॉकर में रखे सोने-चांदी को लेकर अक्सर लोगों के मन में कई तरह के सवाल और डर रहते हैं. हाल ही में इनकम टैक्स अपीलेट ट्रिब्यूनल (ITAT) मुंबई की पीठ ने एक अहम मामले में सुनवाई करते हुए एक महिला के पक्ष में बड़ा फैसला सुनाया है. यह मामला एक शादीशुदा महिला के घर और बैंक लॉकर पर हुई इनकम टैक्स की तलाशी से जुड़ा था, जहां विभाग ने बड़ी मात्रा में मिले सोने-चांदी और गहनों को ‘अघोषित संपत्ति’ (unexplained asset) मानकर जब्त कर लिया था.
अंततः महिला ने ट्रिब्यूनल में यह केस पूरी तरह से जीत लिया. इस फैसले ने एक बार फिर स्पष्ट कर दिया है कि दशकों से चले आ रहे पारिवारिक रीति-रिवाजों, स्त्रीधन और विरासत में मिले जेवर केवल बिल न होने की वजह से अवैध नहीं ठहराए जा सकते.
जानिए क्या था पूरा मामला?
आयकर विभाग की तलाशी के दौरान महिला के पास से कुल 427.71 ग्राम वजन के सोने के गहने, 258 ग्राम शुद्ध सोना, 161.33 ग्राम सोने वाले हीरे के गहने और 11.200 किलोग्राम वजन की चांदी-मिश्रित वस्तुएं बरामद हुई थीं.
अधिकारियों द्वारा पूछताछ करने पर महिला ने स्पष्ट किया कि यह संपत्ति उसने पिछले 35 से अधिक वर्षों के वैवाहिक जीवन के दौरान शादी के उपहारों, स्त्रीधन, विरासत, पारिवारिक रीति-रिवाजों और समय-समय पर की गई खरीद-फरोख्त से जुटाई है. इसके साथ ही महिला ने पिछले पांच असेसमेंट वर्षों का ब्योरा दिया, जिससे पता चला कि उसके परिवार की कुल ग्रॉस इनकम लगभग 4.55 करोड़ रुपये थी. इसके बावजूद एसेसिंग ऑफिसर (AO) ने महिला के स्पष्टीकरण को केवल आंशिक रूप से ही स्वीकार किया था.
ITAT मुंबई का अहम फैसला: बिल न होना ही आधार नहीं
ITAT मुंबई ने आयकर विभाग के रुख को खारिज करते हुए फैसला सुनाया कि एक ही परिवार के पास मौजूद आम सोने के गहनों और हीरे जड़े गहनों को वैध मानना, लेकिन केवल फिजिकल फॉर्म (सिक्का या बार) की वजह से शुद्ध सोने को अनअकाउंटेड मानना तर्कसंगत नहीं है.
अदालत ने टिप्पणी की कि सिर्फ पुराने खरीद बिल (bills) का न होना निर्णायक आधार नहीं बन सकता, खासकर तब जब संपत्ति का स्पष्टीकरण दशकों में मिले शादी के तोहफों, स्त्रीधन और विरासत पर आधारित हो. हालांकि, ट्रिब्यूनल ने यह भी साफ किया कि शुद्ध सोने पर दिया गया यह फैसला केवल इस खास केस के तथ्यों पर लागू होता है और इसे सामान्य नियम नहीं माना जाना चाहिए.
CBDT की गाइडलाइन नंबर 1916 क्या कहती है?
आयकर विभाग तलाशी के दौरान केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) के निर्देश संख्या 1916 का इस्तेमाल करता है. इस निर्देश में तलाशी के समय जब्ती से छूट के लिए गहनों की मानक सीमाएं तय की गई हैं:
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शादीशुदा महिला: 500 ग्राम सोने के गहने
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अविवाहित महिला: 250 ग्राम सोने के गहने
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पुरुष सदस्य: 100 ग्राम सोने के गहने
ITAT ने स्पष्ट किया कि यह 1916 की गाइडलाइन कोई पक्की ‘टैक्स-फ्री सीमा’ या कानूनी छूट नहीं है, बल्कि यह केवल एक व्यावहारिक बेंचमार्क (benchmark) है ताकि अधिकारी यह तय कर सकें कि परिवार के पास मौजूद जेवर उचित और स्वाभाविक सीमा में हैं या नहीं.
घर में कितना रख सकते हैं सोना-चांदी? एक्सपर्ट की राय
प्रसिद्ध चार्टर्ड अकाउंटेंट सुरेश सुराना के अनुसार, भारतीय कानून में किसी भी व्यक्ति के लिए घर या बैंक लॉकर में सोना या चांदी रखने की कोई अधिकतम कानूनी सीमा (legal limit) तय नहीं की गई है.
सुराना स्पष्ट करते हैं कि कोई भी नागरिक कितनी भी मात्रा में सोना या चांदी रख सकता है, बशर्ते वह संपत्ति कानूनी कमाई से हासिल की गई हो और व्यक्ति के पास उसके आय के स्रोत (source of income) का संतोषजनक स्पष्टीकरण मौजूद हो.
चांदी की वस्तुओं के संदर्भ में CBDT के निर्देशों में कोई तय मात्रात्मक सीमा नहीं है. सुराना बताते हैं कि इस मामले में 11.2 किलो चांदी की जब्ती को भी कोर्ट ने परिवार की आर्थिक स्थिति, विरासत और लंबी शादीशुदा जिंदगी को देखते हुए जायज माना. हालांकि, सुरक्षित रहने के लिए यह बेहद जरूरी है कि अगर बड़ी मात्रा में सोना, बुलियन या चांदी रखी गई है, तो उनसे जुड़े खरीद बिल, वसीयत, गिफ्ट डीड या पारिवारिक दस्तावेज संभालकर रखे जाएं.



















