
नई दिल्ली। भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) को लेकर पिछले एक साल से अधिक समय से जारी बातचीत अब एक बेहद जटिल मोड़ पर पहुंच गई है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने स्पष्ट किया है कि ट्रेड डील को लेकर दोनों देशों के बीच वार्ता ऐसे मुकाम (प्लैटो) पर आ खड़ी हुई है, जहां से आगे एक-दूसरे को नई रियायतें देना या हासिल करना दोनों पक्षों के लिए बेहद मुश्किल साबित हो रहा है। म्यूनिख सिक्योरिटी कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने कहा कि दोनों ही देशों ने अब तक अपने-अपने राष्ट्रीय और आर्थिक हितों की रक्षा करते हुए काफी कड़ाई से बातचीत की है।
फरवरी 2025 से जारी है वार्ता, 500 अरब डॉलर के व्यापार का रखा गया था लक्ष्य उल्लेखनीय है कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर बातचीत की नींव फरवरी 2025 में रखी गई थी, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की वॉशिंगटन में ऐतिहासिक मुलाकात हुई थी। इस बैठक के दौरान दोनों आर्थिक महाशक्तियों ने वर्ष 2030 तक आपसी द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ा कर 500 अरब डॉलर तक पहुंचाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया था। हालांकि, व्यापक समझौते को अंतिम रूप देने से पहले फरवरी 2026 में दोनों देशों ने एक अंतरिम ट्रेड एग्रीमेंट के फ्रेमवर्क की घोषणा की थी, लेकिन लंबा वक्त बीत जाने के बाद भी यह सौदा अंतिम अंजाम तक नहीं पहुंच सका है।
टैरिफ, मार्केट एक्सेस और ट्रेड डेफिसिट पर फंसा पेच बातचीत के लगातार आगे न बढ़ पाने के पीछे आयात शुल्क (टैरिफ), अमेरिकी उत्पादों की भारतीय बाजार तक पहुंच (मार्केट एक्सेस) और दोनों देशों के बीच बढ़ता व्यापार असंतुलन सबसे मुख्य वजहें बनी हुई हैं। अमेरिकी ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव जैमीसन ग्रीर ने भी हाल ही में 1 अक्टूबर को संकेत दिए थे कि डील अभी जल्द पूरी होने के करीब नहीं है। हालांकि, गतिरोध दूर करने के लिए हाल ही में केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने 29 सितंबर से 5 अक्टूबर तक अमेरिका का दौरा किया और अंतरिम समझौते पर गहन चर्चा की, लेकिन अंतिम सहमति अभी भी दूर नजर आ रही है।
टैरिफ बढ़ाने की अमेरिकी नीति पर भारत ने उठाए सवाल, बातचीत से हल निकालने की सलाह वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस बात पर जोर दिया कि मौजूदा व्यापार संतुलन में भारत फायदे की स्थिति में है, जबकि अमेरिका इस व्यापारिक घाटे को कम करने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने अमेरिका द्वारा व्यापार घाटा कम करने के लिए बार-बार टैरिफ (आयात शुल्क) बढ़ाने की रणनीति पर खुलकर सवाल उठाए। चीन के साथ भारत के व्यापार घाटे का उदाहरण देते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि बहुत बड़े व्यापारिक अंतर को केवल भारी टैक्स या टैरिफ लगाकर ठीक नहीं किया जा सकता, बल्कि इसके लिए दूरदर्शी आपसी बातचीत और संतुलन स्थापित करने का रास्ता अपनाना ही सबसे व्यावहारिक उपाय है।

















