नई दिल्ली/वॉशिंगटन: भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते (Bilateral Trade Agreement) को लेकर लंबे समय से चल रही बातचीत पर अंतिम सहमति का इंतजार और लंबा हो सकता है। 1 अक्टूबर 2026 को अमेरिका की तरफ से स्पष्ट किया गया कि दोनों देशों के बीच ट्रेड डील पर वार्ता लगातार जारी है, लेकिन इसके तुरंत फाइनल होने की उम्मीद नहीं है। हालांकि, दोनों देश अपने मतभेदों को सुलझाने के लिए गंभीरता से प्रयास कर रहे हैं।
अमेरिकी ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव (USTR) जेमिसन ग्रीर ने बयान देते हुए बताया कि वॉशिंगटन और नई दिल्ली मिलकर एक मजबूत व्यापार समझौते को आकार देने में लगे हैं। उन्होंने जानकारी दी कि मिल्वौकी में आयोजित G20 ट्रेड मिनिस्टर्स की बैठक के दौरान भारतीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल के साथ उनकी बेहद सकारात्मक और सार्थक चर्चा हुई है।
‘विवादित मुद्दों की हुई पहचान, समाधान के लिए जारी हैं प्रयास’
अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीर ने कहा कि फिलहाल कोई त्वरित फैसला होने की संभावना नहीं है, लेकिन दोनों पक्षों ने उन प्रमुख बिंदुओं को चिन्हित कर लिया है जिन पर सहमति नहीं बन पा रही है। उन्होंने कहा कि इन मतभेदों को दूर करने के लिए दोनों देश पूरी लगन से काम कर रहे हैं।
दूसरी ओर, आधिकारिक सूत्रों के अनुसार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच फोन पर हुई बातचीत में भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने पर सहमति बनी है। प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) ने बताया कि दोनों शीर्ष नेताओं ने व्यापार, रक्षा, ऊर्जा और क्रिटिकल टेक्नोलॉजी के क्षेत्रों में जारी सहयोग की समीक्षा की।
इन 3 प्रमुख मुद्दों पर फंसा हुआ है व्यापार समझौते का पेंच
केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल 29 सितंबर से 5 अक्टूबर तक अमेरिका की यात्रा पर हैं, जहां वे अमेरिकी अधिकारियों और प्रमुख कारोबारी दिग्गजों के साथ व्यापार समझौते व अंतरिम (Interim) डील पर लगातार बैठकें कर रहे हैं। इसके बावजूद तीन बड़े क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच मुख्य मतभेद बने हुए हैं:
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मार्केट एक्सेस (बाजार पहुंच): अमेरिका अपने कृषि, डेयरी और मेडिकल डिवाइसेज उत्पादों के लिए भारतीय बाजार में आसान पहुंच चाहता है, जिस पर भारत अपने घरेलू किसानों और उद्योगों के हितों को ध्यान में रखकर सतर्क रुख अपना रहा है।
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टैरिफ और ड्यूटी विवाद: अमेरिका द्वारा कई भारतीय उत्पादों पर लगाए गए शुल्कों और भारत द्वारा अमेरिकी आईटी व तकनीकी सामानों पर लगाए जाने वाले टैरिफ को लेकर दोनों देशों के अपने-अपने तर्क हैं।
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रूसी तेल आयात पर अमेरिकी शुल्क: भारत द्वारा रूस से कच्चा तेल खरीदे जाने के संदर्भ में अमेरिका द्वारा उठाए गए हालिया कदमों और नए शुल्कों को लेकर भारत ने अपनी सख्त आपत्ति जताई है।
















