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BRICS सम्मेलन के समापन सत्र में चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने सदस्य देशों के बीच एक ‘एकीकृत बाजार’ बनाने और ओपन-सोर्स आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) प्लेटफॉर्म विकसित करने का बड़ा प्रस्ताव रखा है। आगामी BRICS सम्मेलन की अध्यक्षता चीन के हाथों में जाने वाली है, जिससे यह साफ संकेत मिलता है कि बीजिंग इन दोनों मुद्दों को अगले साल के मुख्य एजेंडे के रूप में पेश करने की पूरी तैयारी कर रहा है। हालांकि, चीनी राष्ट्रपति की इस पहल ने भारतीय नीति निर्माताओं और सुरक्षा विशेषज्ञों को सतर्क कर दिया है। भारत में इस प्रस्ताव को लेकर कोई उत्साह नहीं है, बल्कि इसे भारतीय अर्थव्यवस्था और सामरिक सुरक्षा के लिए एक नई चुनौती के रूप में देखा जा रहा है।
भारतीय बाजारों पर मंडराया चीनी सामानों की बाढ़ का साया BRICS ने शुरुआत से ही खुद को एक मुक्त व्यापार क्षेत्र (Free Trade Area) के रूप में विकसित करने से बचाकर रखा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि टैरिफ दरों को कम करके BRICS देशों के बाजारों को आपस में एकीकृत किया जाता है, तो बिना मजबूत सुरक्षात्मक उपायों के भारतीय बाजार पूरी तरह से चीनी सामानों और कंपनियों के लिए खुल जाएंगे। इससे भारत के घरेलू विनिर्माण क्षेत्र और स्वदेशी तकनीकों के विकास को अपूरणीय क्षति पहुंचने का गंभीर खतरा है। भारत सरकार लगातार चीनी निवेशों की कड़ी निगरानी करती आई है और घरेलू उद्योग जगत के तमाम दबावों के बावजूद सुरक्षा मानकों में कोई ढील नहीं दी गई है। अपने बाजारों को सस्ते चीनी उत्पादों से बचाने की यह चिंता केवल भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि अमेरिका, यूरोप और जापान जैसे विकसित देश भी चीन पर अपनी आर्थिक निर्भरता घटाने के लिए ‘डी-रिस्किंग’ की नीति अपना रहे हैं।
RCEP का कड़वा अनुभव और द्विपक्षीय व्यापार समझौतों पर भारत की रणनीति चीन के वर्चस्व वाली व्यापारिक व्यवस्थाओं से दूरी बनाए रखने की भारत की नीति काफी पुरानी है। नवंबर 2019 में भारत ने क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक भागीदारी (RCEP) समझौते से अंतिम समय में खुद को अलग कर लिया था, क्योंकि इसमें चीनी सामानों की भारतीय बाजार में बाढ़ आने का प्रत्यक्ष डर था। RCEP से बाहर निकलने के बाद भारत ने अपनी वैश्विक व्यापार नीति में बड़ा बदलाव किया है। भारत अब ऑस्ट्रेलिया, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), ब्रिटेन, यूरोपीय संघ और EFTA देशों के साथ द्विपक्षीय मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को प्राथमिकता दे रहा है, ताकि आयात के स्रोतों में विविधता लाई जा सके और किसी एक देश पर निर्भरता पूरी तरह खत्म हो सके।
चीनी AI और लार्ज लैंग्वेज मॉडल्स से डेटा सुरक्षा पर रेड फ्लैग शी चिनफिंग के पांच सूत्रीय एक्शन प्लान में चीन के लार्ज लैंग्वेज मॉडल्स (LLMs) और AI तकनीकों को BRICS देशों में बढ़ावा देने का प्रस्ताव शामिल है। रक्षा और डेटा सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह चीनी तकनीकों के आवरण में अन्य देशों के डिजिटल ढांचे में पैठ बनाने की सोची-समझी कोशिश हो सकती है। भारत पहले से ही राष्ट्रीय सुरक्षा और डेटा गोपनीयता के आधार पर सैकड़ों चीनी ऐप्स को प्रतिबंधित कर चुका है। इसके अतिरिक्त, संवेदनशील क्षेत्रों में चीन निर्मित कैमरों और दूरसंचार उपकरणों के इस्तेमाल पर भी कड़ी पाबंदी लागू है। ऐसी स्थिति में, चीन द्वारा प्रायोजित ओपन-सोर्स AI प्लेटफॉर्म के प्रस्ताव को भारत एक बड़े ‘रेड फ्लैग’ यानी खतरे की घंटी के रूप में देख रहा है।














