नई दिल्ली। इजरायल में हुए आम चुनावों के बाद सामने आए एग्जिट पोल के नतीजों ने प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के लंबे राजनीतिक करियर पर संकट के बादल मंडरा दिए हैं। देश के तीन प्रमुख मीडिया संस्थानों द्वारा जारी किए गए एग्जिट पोल के अनुमानों में पूर्व सैन्य प्रमुख गादी आइजेनकोट के नेतृत्व वाला राजनीतिक गठबंधन नेतन्याहू के खेमे से आगे निकलता दिखाई दे रहा है। हालांकि, किसी भी पक्ष को स्पष्ट बहुमत न मिलने के कारण अब सरकार बनाने के लिए राजनीतिक दलों के बीच शह-मात का खेल तेज होना तय है।
एग्जिट पोल का गणित: आइजेनकोट को बढ़त, नेतन्याहू पिछड़े
इजरायल के तीनों प्रमुख मीडिया घरानों के एग्जिट पोल में आइजेनकोट के गठबंधन का पलड़ा भारी दिख रहा है।
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चैनल 13: आइजेनकोट ब्लॉक को 53 सीटें और नेतन्याहू के खेमे को 50 सीटें मिलने का अनुमान।
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सरकारी प्रसारक कान (Kan): आइजेनकोट गठबंधन को 55 और नेतन्याहू को 50 सीटें।
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चैनल 12: आइजेनकोट के पक्ष में 52 सीटें, जबकि नेतन्याहू के खाते में 50 सीटें।
इजरायल की 120 सीटों वाली संसद ‘नेसेट’ में सरकार बनाने के लिए जादूई आंकड़ा 61 सीटों का है। चूंकि दोनों मुख्य गठबंधनों में से कोई भी 61 के आंकड़े तक नहीं पहुंच पा रहा है, ऐसे में छोटे दलों का रुख इजरायल की भावी राजनीति का रुख तय करेगा।
1988 के बाद रिकॉर्ड 75% वोटिंग, 7 अक्टूबर के हमले बने सबसे बड़ा मुद्दा
इस बार इजरायल के मतदाताओं में मतदान को लेकर ऐतिहासिक उत्साह देखा गया। मतदान समाप्त होने से दो घंटे पहले तक 74.3 फीसदी वोट पड़ चुके थे और अंतिम आंकड़ा 75 प्रतिशत के पार जाने का अनुमान है, जो 1988 के बाद सबसे ज्यादा है। 7 अक्टूबर 2023 को हमास के बर्बर हमले और उसके बाद गाजा, लेबनान व ईरान के साथ चले युद्धों के बाद यह पहला राष्ट्रीय चुनाव है। भ्रष्टाचार के आरोपों और 7 अक्टूबर की सुरक्षा चूक को लेकर विपक्ष ने नेतन्याहू को घेरा है, वहीं 77 वर्षीय नेतन्याहू ने खुद को देश की सुरक्षा का एकमात्र मजबूत स्तंभ और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का करीबी बताकर वोट मांगे।
कौन हैं गादी आइजेनकोट, जिन्होंने हिला दी नेतन्याहू की सत्ता?
66 वर्षीय गादी आइजेनकोट इजरायल सेना के पूर्व प्रमुख हैं। गाजा युद्ध के दौरान उन्होंने अपने एक बेटे और दो भतीजों को खो दिया था। 7 अक्टूबर के हमले के बाद वे नेतन्याहू की ‘वॉर कैबिनेट’ का हिस्सा बने थे, लेकिन बाद में नेतन्याहू की नीतियों से नाराज होकर उन्होंने पद से इस्तीफा दे दिया और राजनीति में मध्यमार्गी चेहरा बनकर उभरे। सुरक्षा पर सख्त और घरेलू मामलों में संतुलित रुख रखने के कारण वे मतदाताओं की पहली पसंद बनते दिख रहे हैं।
क्या फिर होंगे चुनाव?
यदि अंतिम नतीजों में भी किसी दल को बहुमत नहीं मिलता है, तो सरकार गठन के लिए हफ्तों तक मोल-भाव (जोड़-तोड़) चलेगा। अगर कोई सहमति नहीं बनी, तो देश में एक बार फिर से आम चुनाव कराने की नौबत आ सकती है। तब तक बेंजामिन नेतन्याहू कार्यवाहक प्रधानमंत्री के रूप में पद पर बने रहेंगे।


















