
उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जिले से एक बड़ी खबर सामने आई है। पीलीभीत स्थित विशेष न्यायाधीश एससी/एसटी एक्ट कोर्ट ने थाना माधोटांडा क्षेत्र के गांव बूंदीभूड में देशी व अंग्रेजी शराब की दुकान का विरोध कर रही महिलाओं पर लाठीचार्ज और मारपीट के गंभीर मामले में कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने एसडीएम, तहसीलदार, सीओ और जिला आबकारी अधिकारी समेत कई प्रशासनिक व पुलिस अधिकारियों के खिलाफ तत्काल प्राथमिकी (FIR) दर्ज करने का सख्त आदेश दिया है।
मानकों के विपरीत शराब दुकान खोलने का विरोध कर रहे थे ग्रामीण
प्राप्त विवरण के अनुसार, यह याचिका माधोटांडा थाना क्षेत्र के गांव बूंदीभूड की रहने वाली 19 वर्षीय शीतल पुत्री रामशीष ने धारा 173(4) बीएनएसएस के तहत कोर्ट में दाखिल की थी। वादी का आरोप है कि गांव के चौराहे पर खटीमा-उत्तराखंड मुख्य मार्ग पर लालदेव यादव नामक व्यक्ति ने दो दुकानें बनवाकर कंपोजिट शराब लाइसेंसी को किराए पर उठा दी थीं। उक्त दुकान से महज 150 से 200 मीटर की दूरी पर बालिकाओं का एक विद्यालय और एक धार्मिक मंदिर स्थित है, जो उत्तर प्रदेश सरकार की आबकारी व शराब नीति के नियमों का सीधा उल्लंघन है। इसके विरोध में ग्रामीणों ने पूर्व में जिलाधिकारी से भी शिकायत की थी।
7 मई को पुलिस और प्रशासन ने किया लाठीचार्ज, महिलाओं से मारपीट का आरोप
याचिका में आरोप लगाया गया है कि बीते 7 मई 2026 को ग्रामीणों के विरोध को दबाने के लिए भारी पुलिस बल के साथ प्रशासनिक अमला मौके पर पहुंचा। आरोप है कि क्षेत्रीय आबकारी निरीक्षक दीपक कुमार, एसडीएम कलीनगर प्रमेश कुमार, तहसीलदार वीरेन्द्र कुमार, नायब तहसीलदार अक्षय कुमार, राजस्व निरीक्षक राजेश कुमार, लेखपाल वेदप्रकाश, सीओ पूरनपुर प्रतीक दहिया, जिला आबकारी अधिकारी कल्पनाथ रजक, प्रभारी निरीक्षक अशोक पाल, महिला थाना प्रभारी रीता सिंह तथा 10-12 अन्य अज्ञात अधिकारियों व पुलिसकर्मियों ने निहत्थे ग्रामीणों और महिलाओं पर लाठीचार्ज कर दिया तथा उनके साथ अभद्रता व मारपीट की।
24 घंटे के भीतर FIR दर्ज कर विवेचना शुरू करने का सख्त आदेश
मामले की सुनवाई करते हुए विशेष न्यायाधीश एससी/एसटी एक्ट कोर्ट ने घटना को अत्यंत गंभीर माना और पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। अदालत ने थाना प्रभारी माधोटांडा को आदेश जारी करते हुए निर्देश दिया है कि 24 घंटे के भीतर नामजद एसडीएम, तहसीलदार, सीओ व आबकारी अधिकारियों समेत अन्य आरोपियों के खिलाफ सुसंगत धाराओं में मुकदमा दर्ज किया जाए और मामले की निष्पक्ष विवेचना सुनिश्चित की जाए। कोर्ट के इस फैसले के बाद प्रशासनिक गलियारे में हड़कंप मच गया है।











