पीलीभीत वोटर लिस्ट में बड़ी धांधली: 10 हजार से ज्यादा गलत फॉर्म स्वीकृत; वर्तमान और पूर्व DM से मांगा गया जवाब

उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जिले में मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर हुई गड़बड़ी के मामले में अब जिला निर्वाचन अधिकारियों की सीधी जवाबदेही तय करने की बड़ी तैयारी शुरू हो गई है. विधानसभा क्षेत्र-127 (पीलीभीत) की वोटर लिस्ट में व्यापक स्तर पर EPIC नंबर यानी मतदाता पहचान पत्र संख्या में धांधली और गलत प्रविष्टियां सामने आने के बाद प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) नवदीप रिणवा ने कड़ा रुख अपनाया है. CEO ने जिले के वर्तमान और उस अवधि में तैनात रहे पूर्ववर्ती जिला निर्वाचन अधिकारी (डीएम) से औपचारिक स्पष्टीकरण तलब किया है. दोनों उच्च अधिकारियों को अब यह लिखित में बताना होगा कि उनके कार्यकाल के दौरान इतनी बड़ी संख्या में फर्जी व त्रुटिपूर्ण प्रविष्टियां कैसे दर्ज हुईं और समय रहते उन पर प्रशासनिक निगरानी क्यों नहीं रखी गई.

13,779 प्रविष्टियां पाई गईं गलत, 10,470 त्रुटिपूर्ण फॉर्म कर दिए गए स्वीकृत

मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय द्वारा कराई गई प्राथमिक जांच में बेहद चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं. जांच रिपोर्ट के मुताबिक, 31 मई 2026 से 29 अगस्त 2026 के बीच कुल 13,779 फॉर्म गलत और त्रुटिपूर्ण तरीके से सिस्टम में दर्ज किए गए थे. सबसे गंभीर बात यह रही कि संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों द्वारा बिना उचित सत्यापन के इनमें से 10,470 त्रुटिपूर्ण फॉर्म स्वीकृत भी कर दिए गए. यानी गलत जानकारी और गड़बड़ी के बावजूद बड़ी संख्या में आवेदनों को हरी झंडी दे दी गई, जिसने चुनाव आयोग की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.

कैसे खुली धांधली की पोल? जानिए पूरा मामला

दरअसल, पीलीभीत विधानसभा क्षेत्र की वोटर लिस्ट को लेकर चुनाव आयोग के पास शिकायत पहुंची थी कि बड़ी संख्या में मतदाताओं के EPIC (इलेक्शन फोटो पहचान पत्र) नंबर पर किसी अन्य व्यक्ति का विवरण और नाम प्रदर्शित हो रहा है. जब इस शिकायत का तकनीकी और जमीनी सत्यापन कराया गया तो कुल 13,779 फॉर्मों में भारी त्रुटियां पाई गईं और 10,470 फॉर्मों के स्वीकृत होने की पुष्टि हुई. एक ही वोटर आईडी नंबर पर दूसरे मतदाता का डेटा दर्ज होना मतदाता सूची की शुद्धता, पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर बेहद गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है.

लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत वर्तमान और पूर्व DM से मांगा स्पष्टीकरण

मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए CEO नवदीप रिणवा ने पीलीभीत के वर्तमान डीएम (जिला निर्वाचन अधिकारी) और उस समयावधि में कार्यरत रहे पूर्व डीएम दोनों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. यह स्पष्टीकरण लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 और मैनुअल ऑन इलेक्टोरल रोल्स, 2023 के तहत जिला निर्वाचन अधिकारियों के लिए तय वैधानिक जिम्मेदारियों के आधार पर तलब किया गया है.

लापरवाही साबित होने पर होगी सख्त दंडात्मक कार्रवाई

निर्वाचन नियमों के अनुसार, जिले में मतदाता सूची के निर्माण, पुनरीक्षण और संशोधन से जुड़े सभी कार्यों की निष्पक्ष निगरानी की प्राथमिक जिम्मेदारी जिला निर्वाचन अधिकारी की होती है. चुनाव आयोग के सूत्रों का कहना है कि दोनों अधिकारियों द्वारा दिए जाने वाले जवाब की समीक्षा के बाद यदि पर्यवेक्षण में लापरवाही या कर्तव्यहीनता की बात साबित होती है, तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ नियमानुसार सख्त प्रशासनिक व कानूनी कार्रवाई की जाएगी.

वोटर लिस्ट को लेकर चुनाव आयोग हुआ सख्त, दिए कड़े निर्देश

गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची में गड़बड़ियों और फर्जीवाड़े को लेकर लगातार राजनीतिक व प्रशासनिक सवाल उठ रहे हैं. इसी के मद्देनजर मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने 30 अक्टूबर को ही प्रदेश के सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों को सख्त निर्देश जारी किए हैं:

  • दैनिक समीक्षा: सभी डीएम को प्रतिदिन अनिवार्य रूप से स्वयं ECI नेट (ECINet) पर लॉगिन कर मतदाता सूची से जुड़े कामकाज और फॉर्मों की स्थिति की समीक्षा करनी होगी.

  • गोपनीयता के कड़े नियम: अधिकारियों को सख्त हिदायत दी गई है कि वे अपनी आधिकारिक यूजर आईडी, पासवर्ड और OTP किसी भी अधीनस्थ या अन्य व्यक्ति के साथ साझा न करें.

  • जवाबदेही तय: भविष्य में किसी भी जिले में ऐसी लापरवाही पाए जाने पर सीधे जिला निर्वाचन अधिकारी को जिम्मेदार माना जाएगा.

 

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