अमेरिकी मिडटर्म इलेक्शन के महासंग्राम के ठीक पहले मध्य पूर्व की भू-राजनीति में अचानक बड़ा भूचाल आ गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निर्देश पर अमेरिकी सैन्य बलों ने रणनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ पर स्थित ईरान के केशम द्वीप पर ड्रोन हमले किए हैं। अमेरिकी मीडिया और अधिकारियों के हवाले से आई इस खबर की पुष्टि करते हुए ईरानी समाचार एजेंसी ‘आईआरएनए’ (IRNA) ने रिपोर्ट किया है कि केशम द्वीप पर सोमवार (2 नवंबर) को कई भीषण धमाकों की आवाजें सुनी गई हैं।
यह हमला ऐसे वक्त पर हुआ है जब अमेरिका में संसद (कांग्रेस) पर नियंत्रण तय करने वाले बेहद अहम मिडटर्म चुनाव के लिए वोटिंग शुरू होने जा रही है। हालांकि, अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने अभी इस ऑपरेशन पर आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप प्रशासन ने इन हमलों को सीमित और रणनीतिक रूप से गुप्त रखा है ताकि ईरान के साथ बड़े स्तर पर खुला युद्ध शुरू होने का संकेत न जाए।
इजराइल-अमेरिका की गुप्त प्लानिंग और ट्रंप की ‘अग्निपरीक्षा’
मिडटर्म चुनावों की वोटिंग से ठीक पहले हुए इन हमलों को लेकर अंतरराष्ट्रीय मीडिया में कई कयास लगाए जा रहे हैं। खुफिया सूत्रों और मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और अमेरिकी प्रशासन के बीच मध्य पूर्व में ईरान के खिलाफ मोर्चेबंदी को लेकर गहन प्लानिंग चल रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मध्य पूर्व में तनाव और सैन्य दबाव बढ़ाने से अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को मिडटर्म चुनाव में कड़ा संदेश देने में मदद मिल सकती है। दूसरी ओर, इजराइल में संभावित संकटकालीन स्थिति वहां की घरेलू राजनीति में इमरजेंसी सरकार बनाने के रास्ते खोल सकती है।
मिडटर्म चुनाव में सीनेट की 35 और हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स की सभी 435 सीटों पर मुकाबला है। ट्रंप के लिए संसद के दोनों सदनों में बहुमत बचाना बहुत बड़ी चुनौती बना हुआ है। चुनाव से ठीक पहले तेहरान के खिलाफ अपनी सख्त नीति का प्रदर्शन कर ट्रंप अमेरिकी वोटर्स को अपने पक्ष में लामबंद करने की कोशिश में हैं।
ईरान का पलटवार: ‘इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर से 2 अमेरिकी MQM-170 ड्रोन गिराए’
अमेरिकी हमलों के तुरंत बाद ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की एयरोस्पेस फोर्स ने भी बड़ा दावा ठोक दिया है। IRGC के आधिकारिक बयानों के अनुसार, ईरानी सुरक्षा बलों ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में केशम द्वीप के ठीक दक्षिण में अमेरिकी सेना के 2 ‘MQM-170’ टोही ड्रोन को मार गिराया है।
ईरानी सैन्य कमान ने स्पष्ट किया है कि अमेरिकी ड्रोन को नष्ट करने के लिए आधुनिक ‘इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम’ का इस्तेमाल किया गया, जिसके जरिए उनके नेविगेशन और कंट्रोल को ध्वस्त कर दिया गया। इस ताजा घटना के साथ ही ईरानी बलों द्वारा जब्त या मार गिराए गए इस आधुनिक अमेरिकी ड्रोन मॉडल की कुल संख्या अब 4 हो गई है।
हमलों के बीच पर्दे के पीछे बैकचैनल कूटनीति भी जारी
हैरानी की बात यह है कि एक तरफ जहां होर्मुज की खाड़ी में बारूद की गंध फैल रही है, वहीं दूसरी तरफ वाशिंगटन और तेहरान के बीच पर्दे के पीछे बैकचैनल कूटनीतिक बातचीत भी जारी है। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बकाई ने हाल ही में पुष्टि की थी कि दोनों देश मध्यस्थों के माध्यम से एक-दूसरे को लगातार संदेश भेज रहे हैं।
कतर की मध्यस्थता के जरिए दोनों पक्षों में सहमति बनाने का प्रयास किया जा रहा है, और इसी सिलसिले में ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने दोहा का अहम दौरा भी किया था। राष्ट्रपति ट्रंप ने भी हाल ही में पत्रकारों के सवाल के जवाब में संकेत दिया था कि “तेहरान के साथ कोई समझौता हो सकता है।”
28 फरवरी के सैन्य संघर्ष से लेकर सीजफायर तक की पूरी कहानी
गौरतलब है कि चालू वर्ष 2026 में 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल ने मिलकर ईरान के खिलाफ बड़े पैमाने पर सैन्य अभियान शुरू किया था। इसके जवाब में ईरान ने पूरे मध्य पूर्व में फैले अमेरिकी सैन्य ठिकानों और इजराइली संपत्तियों को निशाना बनाया।
महीनों तक चले भीषण तनाव के बाद अप्रैल में दोनों पक्षों के बीच अस्थाई सीजफायर पर सहमति बनी थी। बाद में 18 जून को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में अंतरराष्ट्रीय जहाजों की सुरक्षा को लेकर ‘नेविगेशन ऑफ फ्रीडम’ समझौते (MoU) पर हस्ताक्षर भी किए गए थे, लेकिन खाड़ी की सुरक्षा और गश्त को लेकर उपजे मतभेदों के कारण इसे पूरी तरह लागू नहीं किया जा सका। अब मिडटर्म चुनाव के दिन केशम द्वीप पर हुए हमलों ने इस नाजुक सीजफायर को एक बार फिर खतरे में डाल दिया है।


















