बेंगलुरु में नकली कैंसर दवाओं के बड़े रैकेट का भंडाफोड़: 90 से ज्यादा अस्पतालों पर मंडराया संकट, एक्सपायर्ड दवाओं पर नकली लेबल लगाकर 50% डिस्काउंट में सप्लाई का खेल

बेंगलुरु। कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में कैंसर और जीवन रक्षक (Life-Saving) दवाओं के नाम पर चल रहे एक जानलेवा और फर्जी कारोबार का सनसनीखेज भंडाफोड़ हुआ है। बेंगलुरु पुलिस की विशेष जांच टीम (SIT) और राज्य औषधि नियंत्रण विभाग की संयुक्त कार्रवाई में एक ऐसे बड़े गिरोह का खुलासा हुआ है, जो कथित तौर पर शहर के 90 से अधिक अस्पतालों, क्लीनिकों और फार्मेसियों में नकली और री-पैक्ड दवाएं सप्लाई कर रहा था। पुलिस ने इस मामले में ‘कृपा हेल्थकेयर’ नाम की फार्मेसी के मालिक वीरेश कुमार जैन को गिरफ्तार कर लिया है।

एक्सपायर्ड दवाओं की होती थी री-पैकेजिंग, 50% छूट का लालच देकर अस्पतालों में सप्लाई

जांचकर्ताओं के मुताबिक, यह गिरोह बहुत ही शातिराना तरीके से काम कर रहा था। गिरोह बेहद कम कीमत पर या एक्सपायर हो चुकी जीवन रक्षक दवाओं और आईसीयू (ICU) इंजेक्शंस को हासिल करता था। इसके बाद उन दवाओं को नए कंटेनरों में भरकर उन पर नामी फार्मास्युटिकल कंपनियों के हूबहू दिखने वाले फर्जी और नए लेबल चिपका दिए जाते थे। इन जहरीली और एक्सपायर्ड दवाओं को लगभग 50 प्रतिशत तक की भारी छूट पर अस्पतालों, क्लीनिकों और रिटेल मेडिकल स्टोर्स को बेचा जाता था। मिनर्वा सर्कल स्थित ‘कृपा हेल्थकेयर’ का इस्तेमाल इन नकली दवाओं को डंप करने और सप्लाई करने के मुख्य केंद्र के रूप में किया जा रहा था।

फार्महाउस पर छापे में 5 करोड़ की दवाएं जब्त, 5 राज्यों में फैला था नेटवर्क

इस पूरे रैकेट का जाल काफी गहरा है। मामले की कड़ियां 18 अगस्त को बिदादी और डोड्डेरी स्थित एक फार्महाउस पर पड़े छापे से जुड़ी हैं, जहां से अधिकारियों ने करीब 5 करोड़ रुपये मूल्य की संदिग्ध नकली दवाएं, फर्जी बिल, इंजेक्शन रिफिल करने के उपकरण और नकली लेबल बरामद किए थे। इस जब्ती के बाद जांच का दायरा बढ़ाते हुए एसआईटी ने कर्नाटक, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, तमिलनाडु और महाराष्ट्र समेत 5 राज्यों के 10 से अधिक स्थानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की, जिसके बाद वीरेश कुमार जैन तक पुलिस के हाथ पहुंचे।

5 साल से चल रहा था खेल, मुख्य सरगना प्रशांत फरार; अंतरराज्यीय कनेक्शन खंगाल रही SIT

संयुक्त पुलिस आयुक्त (पश्चिम) और एसआईटी प्रमुख वामसी कृष्णा ने बताया कि आरोपी वीरेश कुमार पिछले 5 साल से यह फर्म चला रहा था। वह इस पूरे रैकेट के मुख्य सरगना और मास्टरमाइंड प्रशांत नाम के व्यक्ति के संपर्क में था। प्रशांत फिलहाल पुलिस को चकमा देकर फरार है, जिसकी तलाश में कई पुलिस टीमें जुटी हुई हैं। जांच एजेंसियों को अंदेशा है कि इस धंधे में 15 से ज्यादा मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव (MR) भी शामिल थे जो अंतरराज्यीय स्तर पर दवाओं के ट्रांसपोर्टेशन में मदद करते थे। पुलिस अब बैंक खातों, खरीद-बिक्री के रिकॉर्ड और बिलों को खंगाल रही है ताकि उन तमाम अस्पतालों की पहचान की जा सके जहां मरीजों को ये नकली दवाएं दी गई हैं।

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